निकाय चुनाव में भाजपा का ‘मिशन जीत’: बीएल संतोष जयपुर में संभालेंगे कमान, बागियों से बूथ तक बनेगा चुनावी रोडमैप

राजस्थान निकाय चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष 4 सितंबर को जयपुर पहुंचेंगे। बैठक में टिकट विवाद, बागियों को साधने, बूथ मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति पर मंथन होगा।

निकाय चुनाव में भाजपा का ‘मिशन जीत’: बीएल संतोष जयपुर में संभालेंगे कमान, बागियों से बूथ तक बनेगा चुनावी रोडमैप

राजस्थान में निकाय चुनाव का सियासी मुकाबला तेज होने के साथ भाजपा ने संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी कर ली है। टिकट वितरण के बाद कई जगह सामने आए विरोध और नाराजगी के बीच पार्टी अब बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों को परखने जा रही है। इसी सिलसिले में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष 4 सितंबर को जयपुर पहुंचेंगे। उनके दौरे को निकाय चुनाव की तैयारियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

जयपुर में बीएल संतोष प्रदेश के शीर्ष नेताओं और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश कोर कमेटी के नेता शामिल रहेंगे। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ-साथ टिकट बंटवारे के बाद पैदा हुई स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।

बागियों को साधना भाजपा की पहली प्राथमिकता

निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद कई वार्डों में भाजपा के भीतर असंतोष देखने को मिला है। टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कई दावेदारों और उनके समर्थकों ने नाराजगी जताई है। कुछ स्थानों पर विरोध के स्वर खुले तौर पर सामने आए हैं, जबकि कुछ सीटों पर पार्टी से जुड़े लोग निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर गए हैं।

पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि अंदरूनी खींचतान का सीधा असर अधिकृत प्रत्याशियों के चुनावी प्रदर्शन पर न पड़े। ऐसे में बीएल संतोष की बैठक में नाराज नेताओं को वापस संगठन की मुख्यधारा में लाने और स्थानीय स्तर पर विवाद सुलझाने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

जहां बगावत, वहां स्थानीय स्तर पर फोकस

भाजपा उन वार्डों को अलग से चिन्हित कर सकती है जहां अधिकृत प्रत्याशी के सामने पार्टी से जुड़े नेता या समर्थक चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं को बातचीत की जिम्मेदारी देने से लेकर नाराज दावेदारों को संगठन में जिम्मेदारी देने तक के विकल्पों पर विचार हो सकता है।

पार्टी की कोशिश रहेगी कि चुनाव के दौरान संगठन के भीतर का मतभेद वोटों में बंटवारा न कर दे। खासकर करीबी मुकाबले वाले वार्डों में एक-एक वोट महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब बूथ स्तर पर होगी संगठन की परीक्षा

भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ मैनेजमेंट को अहम स्थान दिया जाता है। यही वजह है कि बैठक में सिर्फ बड़े नेताओं और प्रत्याशियों की स्थिति पर चर्चा नहीं होगी, बल्कि जमीनी संगठन की सक्रियता का भी आकलन किया जा सकता है।

किन वार्डों में बूथ कमेटियां सक्रिय हैं, कहां कार्यकर्ताओं की टीम मजबूत है, किन क्षेत्रों में पार्टी का नेटवर्क कमजोर है और मतदाताओं तक पहुंच बनाने में कहां कमी रह गई है—इन सभी पहलुओं पर फीडबैक लिया जा सकता है।

चुनावी वॉर रूम और प्रचार अभियान पर भी नजर

निकाय चुनाव को लेकर भाजपा की ओर से तैयार किए जा रहे चुनावी वॉर रूम की गतिविधियां भी समीक्षा के दायरे में रह सकती हैं। स्थानीय मुद्दों को चुनाव अभियान से जोड़ने, सरकार की उपलब्धियों को मतदाताओं तक पहुंचाने और प्रत्याशियों के प्रचार को संगठन के अभियान के साथ जोड़ने पर भी रणनीति बनाई जा सकती है।

प्रचार रथों और जमीनी जनसंपर्क अभियान की भूमिका को लेकर भी पार्टी नेतृत्व फीडबैक ले सकता है। कोशिश होगी कि प्रदेश स्तर का संदेश हर वार्ड और बूथ तक एक समान तरीके से पहुंचे।

सिर्फ निकाय चुनाव नहीं, आगे की भी तैयारी

भाजपा के लिए यह चुनाव केवल नगर निकायों में जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा। प्रदेश में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की दिशा में आगे बढ़ने के बीच निकाय चुनाव संगठन की जमीनी तैयारियों की बड़ी परीक्षा बन सकते हैं।

निकाय चुनाव के बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी प्रस्तावित हैं। ऐसे में भाजपा इस चुनाव के जरिए अपने बूथ नेटवर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय संगठन की क्षमता को परखना चाहती है। निकाय चुनाव में तैयार किया गया संगठनात्मक मॉडल आगे पंचायत चुनावों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

सामान्य वर्ग के आंदोलन पर भी हो सकती है चर्चा

बैठक में चुनावी तैयारियों के अलावा यूजीसी रोल-बैक को लेकर सामान्य वर्ग के एक गुट की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन का मुद्दा भी उठ सकता है। चुनावी माहौल में किसी भी सामाजिक या राजनीतिक असंतोष का असर पार्टी के जनाधार पर न पड़े, इसे लेकर प्रदेश नेतृत्व स्थिति का आकलन कर सकता है।

कुल मिलाकर बीएल संतोष का जयपुर दौरा भाजपा के लिए टिकट विवाद से आगे निकलकर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि पार्टी नाराज दावेदारों को कितना साध पाती है और चुनावी मैदान में संगठन की एकजुटता कितनी मजबूत दिखाई देती है।