राजस्थान में फिर टंकी पर चढ़ा विरोध: मेरिट और बोनस अंकों से भर्ती की मांग, 3 नर्सिंगकर्मी प्रदर्शन पर
जयपुर में मेरिट और बोनस अंकों के आधार पर नर्सिंग ऑफिसर व ANM भर्ती की मांग को लेकर एक महिला समेत तीन संविदा नर्सिंगकर्मी पानी की टंकी पर चढ़ गए।
राजस्थान में अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करने का तरीका एक बार फिर सामने आया है। कुछ समय पहले छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों के टंकी पर चढ़ने का मामला सामने आया था और अब जयपुर में एक महिला समेत तीन संविदा नर्सिंगकर्मियों ने इसी तरह विरोध का रास्ता अपनाया है।
प्रदर्शन कर रहे नर्सिंगकर्मियों की मुख्य मांग है कि आगामी नर्सिंग ऑफिसर और ANM भर्ती में मेरिट के साथ-साथ बोनस अंकों को भी आधार बनाया जाए। उनका कहना है कि वे लंबे समय से सरकार और संबंधित विभाग के सामने अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
टंकी पर चढ़े तीन नर्सिंगकर्मी
जयपुर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे एक महिला समेत तीन संविदा नर्सिंगकर्मी पानी की टंकी पर चढ़ गए। सूचना मिलते ही पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची।
किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए टंकी के नीचे सुरक्षा जाल लगाया गया है। प्रशासन और बचाव दल प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश में जुटे हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—क्या अपनी मांगों को मनवाने के लिए कर्मचारियों को आखिर टंकी पर चढ़ने जैसा कदम क्यों उठाना पड़ता है?
दो साल से मेरिट और बोनस अंकों की मांग
प्रदर्शन कर रहे नर्सिंगकर्मियों का कहना है कि वे पिछले करीब दो वर्षों से नर्सिंग ऑफिसर और ANM की भर्ती मेरिट और बोनस अंकों के आधार पर किए जाने की मांग कर रहे हैं।
उनका तर्क है कि जिन संविदा नर्सिंगकर्मियों ने वर्षों तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में काम किया है, उनके अनुभव और सेवाकाल को भर्ती प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।
नर्सिंगकर्मियों का दावा है कि उन्होंने अपनी मांग को लेकर कई बार सरकार और विभाग के स्तर पर अपनी बात रखी, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिला। इसी नाराजगी के चलते अब उन्होंने टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करने का फैसला किया।
8 से 10 साल से स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने का दावा
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग योजनाओं और सेवाओं में बड़ी संख्या में संविदा नर्सिंगकर्मी लंबे समय से काम कर रहे हैं।
उनके मुताबिक NHM, NRHM, UTB, PPP मॉडल, 108 एम्बुलेंस, जनता क्लिनिक और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी अन्य सेवाओं में हजारों नर्सिंगकर्मी पिछले 8 से 10 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन्हें अभी तक नियमित नियुक्ति का लाभ नहीं मिला है। ऐसे में उनका कहना है कि आगामी भर्ती में उनके अनुभव और सेवा अवधि को बोनस अंकों के जरिए महत्व दिया जाना चाहिए।
टंकी पर चढ़ना बना विरोध का रास्ता
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में पानी की टंकियों पर चढ़कर प्रदर्शन करने की घटनाएं लगातार चर्चा में रही हैं। छात्र हों, कर्मचारी हों या किसी अन्य वर्ग के प्रदर्शनकारी—जब सामान्य विरोध और ज्ञापन से बात आगे नहीं बढ़ती तो कुछ लोग अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ऐसे रास्ते चुनते हैं।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए किसी व्यक्ति की सुरक्षा को खतरे में डालना सही तरीका है?
एक तरफ प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, इसलिए उन्हें अपनी बात मजबूती से रखने के लिए ऐसा कदम उठाना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करना न सिर्फ प्रदर्शनकारियों के लिए जोखिम पैदा करता है, बल्कि प्रशासन के सामने भी उन्हें सुरक्षित नीचे उतारने की चुनौती खड़ी कर देता है।
अब सवाल समाधान का है
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित नीचे उतारना है। लेकिन इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और नर्सिंगकर्मियों के बीच बातचीत के जरिए इस विवाद का कोई रास्ता निकाला जा सकता है?
नर्सिंगकर्मियों की मांगों पर सरकार का क्या रुख है और आगामी भर्ती में मेरिट, अनुभव और बोनस अंकों को लेकर क्या फैसला होता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।
लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—आखिर ऐसी नौबत क्यों आती है कि अपनी मांग मनवाने के लिए कर्मचारियों और छात्रों को पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध करना पड़ता है?

