आधी रात गूंजे कृष्ण जन्म के जयकारे, मथुरा में 500 ड्रोन से सजी कृष्ण लीला; नाथद्वारा में 21 तोपों की सलामी
देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आस्था और भव्य आयोजनों के साथ मनाई गई। मथुरा में 500 ड्रोन शो और कामधेनु से अभिषेक, नाथद्वारा में 21 तोपों की सलामी, जबकि सांवलियाजी में 1100 ड्रोन शो आकर्षण का केंद्र रहा।
देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार रात आस्था, उमंग और भव्य आयोजनों के साथ मनाया गया। रात 12 बजते ही मथुरा-वृंदावन से लेकर द्वारका, जयपुर, पुरी और देश के अलग-अलग शहरों में मंदिरों के पट खुले और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की शुरुआत हुई।
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में जन्मोत्सव का विशेष आयोजन हुआ। यहां कान्हा का सोने से सजी चांदी की कामधेनु से अभिषेक किया गया। वहीं, 500 ड्रोन के शानदार शो के जरिए आसमान में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को जीवंत किया गया। जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शाम तक 15 लाख से अधिक भक्तों के दर्शन करने की जानकारी सामने आई।

राजस्थान के राजसमंद स्थित नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर में भी जन्माष्टमी का उत्सव खास रहा। मध्यरात्रि में भगवान श्रीनाथजी को 21 तोपों की सलामी दी गई। इस दौरान मंदिर परिसर जयकारों और भक्ति के माहौल से गूंज उठा।
राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर में भी आधी रात को भगवान के जन्म के साथ मंदिर के पट खोले गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे और कृष्ण जन्मोत्सव के साक्षी बने।

द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर, दिल्ली के इस्कॉन और बिरला मंदिर सहित देशभर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन हुए। मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में होने वाली विशेष मंगला आरती भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही। यह आरती साल में केवल जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित होती है।
पटना के इस्कॉन मंदिर में 108 चांदी के कलशों से भगवान कृष्ण का अभिषेक किया गया। मंदिर की भव्य सजावट के लिए करीब 8 टन फूलों का इस्तेमाल किया गया। वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में मंदिरों को फूलों, रोशनी और आकर्षक झांकियों से सजाया गया।

चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी मंदिर में भी जन्माष्टमी पर भव्य ड्रोन शो हुआ। तीन साल बाद आयोजित इस शो में 1100 ड्रोन एक साथ आसमान में नजर आए। ड्रोन की रोशनी से श्रीकृष्ण जन्म, शेषनाग की छत्रछाया, गोवर्धन पर्वत, बांसुरी बजाते कान्हा और सांवलियाजी मंदिर जैसी आकृतियां बनाई गईं।
वाराणसी में भी जन्माष्टमी के मौके पर विशेष झांकी आकर्षण का केंद्र बनी। झांकी में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर, वृंदावन, बांके बिहारी मंदिर, केदारनाथ और अयोध्या समेत कई धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों को दर्शाया गया।

गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जन्माष्टमी पर पूजा-अर्चना की। वहीं, देश के विभिन्न शहरों में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, आरती, झांकियों और धार्मिक आयोजनों के जरिए भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।
कृष्ण जन्म के साथ ही देशभर के मंदिरों में ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारे गूंज उठे। कहीं भव्य रोशनी और ड्रोन शो ने लोगों का ध्यान खींचा तो कहीं पारंपरिक पूजा और आरती ने भक्तों को आध्यात्मिक माहौल से जोड़ दिया। इस तरह जन्माष्टमी ने देशभर में आस्था और उत्सव का रंग बिखेर दिया।

