आधी रात को गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो’, घर-घर सजे कान्हा के दरबार

राजस्थान में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिरों और घरों में जयकारे गूंजे, झांकियां सजाई गईं और लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार कर भोग लगाया गया।

आधी रात को गूंजा ‘नंद के घर आनंद भयो’, घर-घर सजे कान्हा के दरबार

राजस्थान में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। रात के 12 बजते ही मंदिरों के साथ घरों में भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव शुरू हो गया। बाल गोपाल के जन्म के साथ ही ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा।

जन्माष्टमी को लेकर लोगों ने अपने घरों में विशेष तैयारियां कीं। बच्चों और परिवार के सदस्यों ने मिलकर भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियां सजाईं। कहीं फूलों से कान्हा का दरबार सजाया गया तो कहीं पालने और झूले को रंग-बिरंगी सजावट से तैयार किया गया।

लड्डू गोपाल का विशेष श्रृंगार कर उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाए गए। आधी रात को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद माखन-मिश्री समेत विभिन्न पकवानों का भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने बाल गोपाल को झूला झुलाकर जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।

कृष्ण जन्म के साथ ही घरों में प्रसाद वितरण हुआ और परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। देर रात तक भजन-कीर्तन और कृष्ण भक्ति का दौर चलता रहा। पूरे प्रदेश में जन्माष्टमी ने घर-घर को उत्सव और आस्था के रंग में रंग दिया।