पुलिस की वर्दी में व्यापारी का अपहरण, फिर दुबई में ठिकाना: एक साल बाद जयपुर पहुंचा मास्टरमाइंड करण आसवानी
जयपुर में पुलिसकर्मी बनकर व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता और उनके चालक के अपहरण व फिरौती मांगने के मामले में लंबे समय से फरार आरोपी करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी को UAE से भारत लाया गया है। AGTF, इंटरपोल और UAE एजेंसियों के समन्वय से आरोपी को डिटेन किया गया।
पुलिसकर्मी बनकर व्यापारी का अपहरण करने और उसके परिवार से फिरौती मांगने के चर्चित मामले में राजस्थान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी **करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी** को संयुक्त अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के बाद UAE से भारत लाया गया है।
राजस्थान की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF), इंटरपोल और UAE की संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय के बाद आरोपी की लोकेशन का पता लगाया गया। इसके बाद उसे वहां डिटेन किया गया और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजस्थान पुलिस की टीम उसे जयपुर लेकर पहुंची।
मामला जयपुर के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोप है कि गिरोह ने पुलिसकर्मियों की वर्दी का इस्तेमाल कर व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता और उनके चालक का अपहरण किया था। बाद में व्यापारी के परिवार से फिरौती की मांग की गई।
अगस्त 2025 से शुरू हुई थी अपहरण की कहानी
पूरा मामला 20 अगस्त 2025 का बताया जा रहा है।
व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता अपने घर से वैशाली नगर की ओर निकले थे। उनके साथ चालक योगेश भी था। कुछ समय बाद व्यापारी से संपर्क टूट गया और उनका मोबाइल फोन बंद आने लगा।
अगले दिन परिवार के पास व्यापारी के ही मोबाइल से कॉल आया। कॉल करने वालों ने परिवार को उनके अपहरण की जानकारी देते हुए रिहाई के बदले फिरौती मांगी।
मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद जांच और तलाश शुरू की गई। पुलिस कार्रवाई के दौरान व्यापारी और उनके चालक को सुरक्षित छुड़ा लिया गया।
पुलिस की वर्दी बनी अपहरण की साजिश का हिस्सा
पुलिस जांच आगे बढ़ी तो वारदात का तरीका भी सामने आया।
आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी दिखाने के लिए पुलिस जैसी वर्दी का इस्तेमाल किया था। इसी आड़ में व्यापारी और उनके चालक को किडनैप करने का आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि अपहृत लोगों को अलग-अलग ठिकानों पर रखा गया था। मामले के तार राजस्थान से बाहर दूसरे स्थानों तक भी जुड़े पाए गए।
पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल वाहनों की भी जांच की और मामले से जुड़े कई आरोपियों तक पहुंची।
तीन साथी पकड़े गए, करण आसवानी निकल गया विदेश
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने **हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका** को गिरफ्तार किया।
इन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा बढ़ा तो करण आसवानी की कथित भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई। पुलिस उसके संभावित ठिकानों पर पहुंचती, उससे पहले वह फरार हो गया।
जांच एजेंसियों को बाद में जानकारी मिली कि आरोपी भारत छोड़कर UAE पहुंच चुका है और वहां छिपकर रह रहा है।
विदेश भागने के बाद भी जारी रही तलाश
करण के देश से बाहर निकल जाने के बाद मामला राजस्थान पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया।
AGTF ने आरोपी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाश के लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया और इंटरपोल के जरिए संबंधित विदेशी एजेंसियों के साथ जानकारी साझा की गई।
तकनीकी सूचनाओं और खुफिया इनपुट के आधार पर आरोपी की लोकेशन UAE में ट्रेस की गई।
इसके बाद अबू धाबी स्थित इंटरपोल यूनिट के सहयोग से करण को डिटेन किया गया।
31 अगस्त को दुबई के लिए रवाना हुई AGTF टीम
आरोपी के डिटेन होने के बाद उसे भारत लाने की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हुई।
31 अगस्त को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में AGTF की टीम जयपुर से UAE के लिए रवाना हुई।
ऑपरेशन की निगरानी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के स्तर पर की गई। टीम में DSP रविंद्र प्रताप सहित पुलिस निरीक्षक सुनील जांगिड़ और राम सिंह नाथावत व अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका रही।
आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आरोपी को भारतीय एजेंसियों के हवाले किया गया और टीम उसे लेकर जयपुर पहुंची।
## करीब 25 साल पुराना बताया जा रहा आपराधिक रिकॉर्ड
करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी का नाम केवल इस अपहरण मामले में ही सामने नहीं आया है।
पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, उसके खिलाफ आपराधिक मामलों का सिलसिला करीब ढाई दशक पुराना बताया गया है।
साल 2000 में मुरलीपुरा थाने में उसके खिलाफ हत्या से जुड़ा मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003 और 2005 में शिप्रापथ थाने तथा 2009 में मानसरोवर थाने में अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी है।
वर्ष 2023 में भी बिंदायका, खोह नागोरियान और मानसरोवर थाना क्षेत्रों में अपहरण, जबरन वसूली और मारपीट जैसी धाराओं से जुड़े मामलों में उसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में आया।
इसके बाद 2025 में व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता के अपहरण और संगठित अपराध से जुड़े मामले में भी उसे आरोपी बनाया गया।
## रेड कॉर्नर नोटिस ने कैसे बढ़ाई आरोपी की मुश्किल?
जब कोई वांछित आरोपी देश छोड़कर विदेश भाग जाता है, तो उसकी गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस के लिए सीधे संभव नहीं होती। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधित एजेंसियों का सहयोग लिया जाता है।
करण आसवानी के मामले में भी राजस्थान पुलिस ने इंटरपोल के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
उसकी लोकेशन की जानकारी UAE की संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाई गई और वहां डिटेन किए जाने के बाद भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इस पूरे ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस जांच के साथ अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के समन्वय की अहम भूमिका रही।
## जयपुर लाने के बाद अब केस के कई सवालों पर होगी पूछताछ
करण के जयपुर पहुंचने के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब अपहरण की पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ने की चुनौती होगी।
पुलिस उससे यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि वारदात की योजना कैसे बनाई गई, गिरोह में किस सदस्य की क्या भूमिका थी, व्यापारी को निशाना बनाने के पीछे क्या वजह थी और फरारी के दौरान उसे किन लोगों से सहायता मिली।
इसके अलावा संगठित अपराध नेटवर्क और पहले दर्ज मामलों से संभावित संबंधों की भी जांच आगे बढ़ सकती है।
आरोपी को संबंधित अदालत के सामने पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जयपुर से दुबई तक पहुंची जांच, आखिर पुलिस के शिकंजे में आया आरोपी
व्यापारी के अपहरण से शुरू हुआ यह मामला करीब एक साल बाद अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन तक पहुंच गया।
एक तरफ मामले में तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, दूसरी तरफ कथित मास्टरमाइंड विदेश निकल गया था। लेकिन रेड कॉर्नर नोटिस, तकनीकी निगरानी और इंटरपोल सहित UAE की एजेंसियों के सहयोग से आखिरकार उसे भारत वापस लाया गया।
अब करण आसवानी से पूछताछ के बाद पुलिस को इस अपहरण कांड और उससे जुड़े कथित संगठित अपराध नेटवर्क के बारे में नई जानकारियां मिलने की उम्मीद है।

