पुतिन का भारत दौरा: Su-57 से ब्रह्मोस-NG तक, मोदी से मुलाकात में क्या-क्या होगा तय?

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं। पीएम मोदी के साथ बैठक में Su-57, ब्रह्मोस-NG, S-400, परमाणु ऊर्जा, रुपये-रूबल व्यापार और INSTC समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है।

पुतिन का भारत दौरा: Su-57 से ब्रह्मोस-NG तक, मोदी से मुलाकात में क्या-क्या होगा तय?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं और अब नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली उनकी अहम बैठक पर हैं। BRICS समिट में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे पुतिन के दौरे को सिर्फ कूटनीतिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है।

राष्ट्रपति पुतिन का विमान शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे दिल्ली के पालम एयरफोर्स स्टेशन पर उतरा। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया। रेड कार्पेट और गार्ड ऑफ ऑनर के बाद रूसी राष्ट्रपति का काफिला दिल्ली के मौर्या शेरटन होटल के लिए रवाना हुआ।

 यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बड़ी BRICS मौजूदगी

फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब पुतिन रूस से बाहर आयोजित BRICS समिट में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में भारत दौरे को रूस-भारत रिश्तों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की प्रस्तावित बैठक को लेकर है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच रक्षा सौदों के साथ-साथ ऊर्जा, व्यापार और भुगतान व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।

Su-57 पर बन सकती है बड़ी बात

रक्षा क्षेत्र में रूस का Su-57 फाइटर जेट सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकता है। रूस भारत को इस लड़ाकू विमान की बिक्री के साथ भारत में इसके उत्पादन और तकनीक साझा करने का प्रस्ताव दे चुका है।

भारत की दिलचस्पी सिर्फ विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। नई तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता हासिल करना भी बातचीत का बड़ा हिस्सा हो सकता है, ताकि भविष्य में देश के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को फायदा मिल सके।

ब्रह्मोस-NG पर भी बढ़ सकता है सहयोग

ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग आगे बढ़ने की संभावना है। खास तौर पर ब्रह्मोस-NG को लेकर चर्चा अहम है। यह मौजूदा ब्रह्मोस के मुकाबले हल्की होगी और इसे तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमानों से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

इसके अलावा S-400 सिस्टम की बाकी डिलीवरी, उसके रखरखाव और Su-30MKI के अपग्रेड से जुड़े मुद्दे भी बातचीत में जगह बना सकते हैं। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत Su-30MKI में नए रडार और आधुनिक हथियार प्रणाली शामिल करने की दिशा में काम किया जाना है।

 रक्षा से आगे परमाणु ऊर्जा पर नजर

मोदी-पुतिन बातचीत का एजेंडा सिर्फ हथियारों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में पहले से काम कर रही है।

भविष्य में रूसी तकनीक के इस्तेमाल से भारत में नए परमाणु बिजली संयंत्र और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने की संभावनाओं पर भी बातचीत हो सकती है।

डॉलर से आगे रुपये-रूबल की तैयारी?

भारत और रूस के बीच व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश भी जारी है। दोनों देश रुपये और रूबल में भुगतान को आसान बनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

इसका मकसद दोनों देशों के कारोबार में भुगतान की प्रक्रिया को ज्यादा सुगम बनाना है। रूस की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था पर काम किया जा सकता है।

 रूस तक व्यापार पहुंचाने वाले रास्तों पर भी फोकस

भारत-रूस व्यापार को गति देने के लिए कनेक्टिविटी भी एजेंडे में महत्वपूर्ण हो सकती है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।

INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही का समय कम करने में मदद कर सकता है।

अब नजर मोदी-पुतिन मुलाकात पर

पुतिन का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में मोदी और पुतिन की बैठक से निकलने वाले संकेत सिर्फ रक्षा सौदों तक सीमित नहीं होंगे। Su-57 और ब्रह्मोस-NG से लेकर परमाणु ऊर्जा, रुपये-रूबल कारोबार और नए ट्रेड रूट तक—कई मोर्चों पर भारत-रूस रिश्तों की अगली दिशा तय हो सकती है।