Crude Oil Price: 100 डॉलर के पार कच्चा तेल, फिर भी नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें आज के रेट

Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं। जानें प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम और कच्चे तेल की तेजी का भारत पर असर।

Crude Oil Price: 100 डॉलर के पार कच्चा तेल, फिर भी नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें आज के रेट

Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। इसके बावजूद भारत में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।

देश में पेट्रोल-डीजल के दाम में आखिरी बदलाव 25 मई को हुआ था। उस समय पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 2.7 से 2.8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद से घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

रोजाना जारी होते हैं पेट्रोल-डीजल के रेट

भारत में डायनामिक फ्यूल प्राइसिंग सिस्टम लागू है। इसके तहत तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी करती हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव होने पर घरेलू कीमतों में हर दिन बदलाव जरूरी नहीं होता।

यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के रेट फिलहाल स्थिर हैं।

आज कितनी है कच्चे तेल की कीमत?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड करीब 108.23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले एक सप्ताह में इसकी कीमत में करीब 6 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी तेजी के साथ करीब 103.80 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक संघर्ष की आशंका से ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित होने की स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहने पर भारत को तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

फिलहाल तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है। हालांकि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसका असर फल, सब्जियों और रोजमर्रा की दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।