निकाय चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, टिकट के लिए अब चलेगा ‘लोकल’ फॉर्मूला!
राजस्थान में 309 नगर निकाय चुनाव को लेकर BJP ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जानिए उम्मीदवार चयन, स्थानीय कनेक्शन, जयपुर समेत बड़े निगमों पर रणनीति और घोषणा पत्र की तैयारी।
राजस्थान में 309 नगर निकायों के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को निकाय चुनाव की रणनीति को लेकर अहम बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में चुनावी रणनीति के साथ-साथ संभावित उम्मीदवारों के चयन, संगठन की भूमिका और वार्ड स्तर पर पार्टी की स्थिति को लेकर चर्चा हुई। भाजपा ने बड़े नगर निगमों को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना है और इन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
309 निकायों के लिए BJP ने शुरू की तैयारी
राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। पार्टी ने चुनाव को केवल स्थानीय स्तर का मुकाबला न मानकर इसे सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने के अवसर के तौर पर भी देखा है।
भाजपा की रणनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार के करीब 30-31 महीने के कार्यकाल को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी है। पार्टी रिफाइनरी, मेट्रो विस्तार, रोजगार और विकास से जुड़े कामों को लेकर जनता के बीच जाने की योजना बना रही है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार के कामों और संगठन की मजबूत जमीनी मशीनरी के जरिए अधिक से अधिक निकायों में जीत हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूर्व विधायक और प्रत्याशियों को भी मिली जिम्मेदारी
भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारियों में पूर्व विधायकों, विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रत्याशियों और अनुभवी कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय करने का फैसला किया है।
बैठक में ऐसे नेताओं को बुलाया गया, जिन्हें अपने क्षेत्रों में संगठन और चुनावी गतिविधियों का जमीनी अनुभव है। पार्टी का मानना है कि इन नेताओं की स्थानीय पकड़ और कार्यकर्ताओं से संपर्क चुनावी रणनीति को मजबूत करने में मदद करेगा।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी कहा कि इन नेताओं के पास बूथ और वार्ड स्तर तक काम करने का अनुभव है। उनकी भूमिका निकाय चुनाव के साथ-साथ आगे होने वाले पंचायत चुनावों में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
टिकट वितरण में ‘लोकल कनेक्शन’ को प्राथमिकता
निकाय चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भाजपा ने अपनी शुरुआती नीति भी स्पष्ट कर दी है। पार्टी की सामान्य कोशिश होगी कि जिस वार्ड से उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है, वह उसी वार्ड या क्षेत्र का निवासी हो।
इसके पीछे भाजपा का तर्क है कि स्थानीय उम्मीदवार को क्षेत्र की समस्याओं, मतदाताओं और स्थानीय समीकरणों की बेहतर जानकारी होती है। साथ ही मतदाताओं के साथ उसका सीधा संपर्क भी रहता है।
हालांकि, पार्टी ने इस नियम को पूरी तरह कठोर नहीं रखा है।
जरूरत पड़ी तो बदल सकता है टिकट का फॉर्मूला
भाजपा के मुताबिक स्थानीय उम्मीदवार उसकी प्राथमिकता जरूर रहेगा, लेकिन किसी विशेष परिस्थिति में पार्टी टिकट वितरण के सामान्य फॉर्मूले में बदलाव कर सकती है।
अगर संगठन को लगता है कि किसी दूसरे क्षेत्र का कोई मजबूत कार्यकर्ता किसी विशेष वार्ड में पार्टी के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है, तो उसे वहां से चुनाव लड़ाने का विकल्प खुला रहेगा।
यानी ‘स्थानीय उम्मीदवार’ सामान्य नीति होगी, लेकिन अंतिम फैसला वार्ड की परिस्थितियों, उम्मीदवार की जीतने की क्षमता और संगठन की जरूरत को देखकर किया जाएगा।
जयपुर समेत बड़े नगर निगमों पर खास नजर
भाजपा की नजर खास तौर पर जयपुर सहित प्रदेश के बड़े नगर निगमों पर है। इन शहरों में वार्डों की संख्या अधिक होने के साथ राजनीतिक प्रभाव भी बड़ा है।
ऐसे में पार्टी यहां बूथ स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की तैयारी में जुटी है। स्थानीय समीकरण, पिछले चुनाव के नतीजे, संगठन की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता जैसे पहलुओं को टिकट तय करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।
13 सदस्यीय घोषणा पत्र समिति का गठन
निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने घोषणा पत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय घोषणा पत्र समिति बनाई गई है।
यह समिति स्थानीय निकायों से जुड़े मुद्दों, शहरों की जरूरतों और जनता से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हुए पार्टी के चुनावी एजेंडे को तैयार करेगी।
इस घोषणा पत्र में शहरी विकास, आधारभूत सुविधाएं, रोजगार, यातायात, सफाई, जल निकासी और स्थानीय स्तर की अन्य समस्याओं को प्रमुखता मिलने की संभावना है।
सरकार के कामकाज को बनाएगी चुनावी मुद्दा
भाजपा निकाय चुनाव में अपनी राज्य सरकार के कामकाज को भी प्रमुखता से जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। पार्टी के अनुसार पिछले करीब 30-31 महीनों में सरकार ने कई विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है।
रिफाइनरी परियोजना, मेट्रो विस्तार, रोजगार और अन्य विकास योजनाओं को चुनाव प्रचार में प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर पेश किया जा सकता है।
पार्टी का लक्ष्य इन योजनाओं को स्थानीय स्तर की जरूरतों से जोड़कर मतदाताओं तक पहुंचाना है।
BJP का बड़ा लक्ष्य- ज्यादा से ज्यादा निकायों में जीत
भाजपा नेताओं ने निकाय चुनाव में व्यापक जीत का लक्ष्य रखा है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन सरकार के काम और कार्यकर्ताओं की ताकत के साथ जनता के बीच जाएगा।
पार्टी ने दूसरे राज्यों में मिली चुनावी सफलताओं का उदाहरण देते हुए राजस्थान में भी मजबूत प्रदर्शन का लक्ष्य तय किया है। हालांकि स्थानीय निकाय चुनावों में वार्ड स्तर के समीकरण काफी महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए उम्मीदवार चयन और स्थानीय संगठन की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
अब टिकट के दावेदारों की नजर पार्टी के फैसले पर
बैठक के बाद भाजपा के टिकट के संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ना तय माना जा रहा है। स्थानीय कार्यकर्ता लंबे समय से टिकट की तैयारी में जुटे हैं और अब पार्टी की रणनीति सामने आने के बाद उनकी उम्मीदें भी बढ़ी हैं।
लेकिन भाजपा का स्थानीय उम्मीदवार वाला फॉर्मूला कई दावेदारों के लिए महत्वपूर्ण होगा। अंतिम सूची तैयार करते समय पार्टी स्थानीय पकड़, संगठन में सक्रियता, सामाजिक समीकरण और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे कई पहलुओं का आकलन कर सकती है।
फिलहाल भाजपा ने निकाय चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने के साथ घोषणा पत्र की तैयारी और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है। अब आने वाले दिनों में वार्डवार रणनीति और संभावित उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

