राजस्थान में 4 चरणों में पंचायतीराज चुनाव: 1.69 लाख जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे, 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव चार चरणों में होंगे। 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समितियों और 14,403 ग्राम पंचायतों में चुनाव होंगे।

राजस्थान में 4 चरणों में पंचायतीराज चुनाव: 1.69 लाख जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे, 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव का बिगुल बज गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया के तहत 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों में चुनाव होंगे। इसके साथ ही बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों में सरपंच, उपसरपंच और वार्ड पंच चुने जाएंगे।

कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और प्रधानों के चुनाव 22 दिसंबर को होंगे। वहीं जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव भी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार कराए जाएंगे। जयपुर जिले में पंचायत चुनाव चार चरणों में होंगे।

1.69 लाख पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे

इन चुनावों के जरिए प्रदेश में करीब 1.69 लाख नए पंचायतीराज जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। 1403 जिला परिषद सदस्यों और 8245 पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम के जरिए होंगे। वहीं 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच-उपसरपंच और करीब 1.30 लाख वार्ड पंचों का चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाएगा।

पंचायत समिति सदस्य मिलकर संबंधित पंचायत समितियों में प्रधान का चुनाव करेंगे, जबकि जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे।

महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण

पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। चुनाव के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं पंचायतीराज संस्थाओं में प्रतिनिधित्व करेंगी। 14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच और 7,200 महिला उपसरपंच चुने जाने हैं। वहीं करीब 65 हजार महिला वार्ड पंच चुने जाएंगे।

सरपंच पदों में एसटी के लिए 3058, एससी के लिए 2493 और ओबीसी के लिए 1961 पद आरक्षित हैं। वार्ड पंचों के करीब 1.30 लाख पदों में भी एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान है।

जयपुर में सबसे ज्यादा वोटर

पंचायतीराज चुनाव में पुरुष मतदाताओं की हिस्सेदारी 51.82 प्रतिशत, जबकि महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी 48.18 प्रतिशत है। 41 जिलों में जयपुर में सबसे ज्यादा करीब 18.99 लाख मतदाता हैं। वहीं जैसलमेर में सबसे कम करीब 4.36 लाख मतदाता हैं।

पिछले पंचायतीराज चुनावों की तुलना में इस बार चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव आया है। पहले प्रदेश में 33 जिला परिषद थीं, जबकि अब 41 जिला परिषदों में चुनाव हो रहे हैं। इसी तरह पंचायत समितियों की संख्या भी 352 से बढ़कर 457 हो गई है।

ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत सरकारी तबादलों पर पाबंदी रहेगी। मंत्री अपने विधानसभा क्षेत्रों में सरकारी वाहनों से दौरे नहीं कर सकेंगे और सरकारी गेस्ट हाउस तथा डाक बंगलों में ठहरने पर भी रोक रहेगी।

सरकार नई योजनाओं और कार्यक्रमों की घोषणा नहीं कर सकेगी। हालांकि पहले से स्वीकृत और चल रहे काम जारी रह सकेंगे। जिन टेंडरों की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है, उन पर भी नियमानुसार काम जारी रह सकता है। ऐसी कोई सरकारी घोषणा नहीं की जा सकेगी, जिससे मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माना जाए।

ग्रामीण इलाकों में उद्घाटन और शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों पर भी आचार संहिता के प्रावधान लागू होंगे।

चुनाव में 2.72 लाख पुलिसकर्मियों की तैनाती

पंचायतीराज चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए बड़े स्तर पर पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान करीब 2.72 लाख पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान केंद्रों और संवेदनशील क्षेत्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

सरकार और विपक्ष के लिए सियासी परीक्षा

पंचायतीराज चुनाव सिर्फ स्थानीय स्तर का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के लिए भी अहम परीक्षा माना जा रहा है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव परिणामों से ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ का संकेत मिलेगा।

हालांकि जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव में स्थानीय स्तर पर समीकरण और समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिला परिषद सदस्य मिलकर जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्य मिलकर प्रधान चुनते हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद इन पदों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होने की संभावना है।

पंचायतीराज चुनावों में दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होने के कारण जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव के दौरान स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि इन चुनावों के परिणामों के साथ-साथ जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव पर भी सभी की नजर रहेगी।