डोटासरा को विश्वेंद्र सिंह ने क्यों याद दिलाया 14 साल पुराना 'स्वागत'? जानिए भरतपुर में क्या हुआ था
राजस्थान कांग्रेस में विश्वेंद्र सिंह और गोविंद सिंह डोटासरा के विवाद के बीच 2012 का भरतपुर कांग्रेस कार्यशाला कांड फिर चर्चा में है। जानें पूरा घटनाक्रम।
राजस्थान कांग्रेस में शुरू हुआ ताजा विवाद अब 14 साल पुराने घटनाक्रम तक पहुंच गया है। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भरतपुर आने पर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से भी बेहतर स्वागत करने की बात कही है। सामान्य परिस्थितियों में यह किसी नेता का स्वागत करने वाला बयान लग सकता है। लेकिन राजस्थान कांग्रेस के इतिहास से परिचित लोगों के लिए इसमें मई 2012 की एक विवादित घटना का संदर्भ छिपा है। उस समय भरतपुर में आयोजित कांग्रेस की एक कार्यशाला के दौरान हिंसक झड़प हुई थी। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की खबरें सामने आई थीं। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने विश्वेंद्र सिंह पर घटना में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसे सिंह ने खारिज कर दिया था। अब सवाल है कि आखिर 14 साल बाद वही घटना दोबारा राजनीतिक चर्चा का विषय क्यों बन गई?
भरतपुर से शुरू हुआ नया विवाद
ताजा विवाद भरतपुर और डीग के निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस नेताओं के बीच सामने आई बयानबाजी से जुड़ा है। विश्वेंद्र सिंह ने स्थानीय कांग्रेस संगठन और प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इसी दौरान उन्होंने डोटासरा के भरतपुर संबंधी बयान पर भी आपत्ति जताई। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि अगली बार डोटासरा भरतपुर आएंगे तो उनका स्वागत डॉ. चंद्रभान से भी बेहतर किया जाएगा। इस टिप्पणी को मई 2012 में हुई घटना के संदर्भ में देखा जा रहा है।
5 मई 2012: कांग्रेस की कार्यशाला में क्या हुआ था?
करीब 14 साल पहले भरतपुर में कांग्रेस की संभागीय कार्यशाला आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान सहित कई वरिष्ठ नेता, सांसद और विधायक उपस्थित थे।
कार्यशाला के दौरान स्थानीय संगठन को लेकर विवाद सामने आया। विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का मुद्दा उठाया। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल पर कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया और मामला हिंसक झड़प में बदल गया। समकालीन समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कार्यक्रम में मौजूद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई तथा कुर्सियां भी फेंकी गईं। घटना के बाद कांग्रेस संगठन में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
डॉ. चंद्रभान ने लगाए थे आरोप
कार्यशाला में हुई हिंसा के बाद तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चंद्रभान ने विश्वेंद्र सिंह को जिम्मेदार ठहराया था। मामला कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचा। पार्टी की ओर से विश्वेंद्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उनसे पूछा गया कि घटना में उनकी कथित भूमिका और अनुशासनहीनता के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। हालांकि विश्वेंद्र सिंह ने हिंसा करवाने के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि स्थानीय संगठन को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी और हिंसा में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
पुराने विवाद में व्यक्तिगत आरोप भी लगे थे
घटना के बाद विश्वेंद्र सिंह और डॉ. चंद्रभान के बीच बयानबाजी काफी तीखी हो गई थी। विश्वेंद्र सिंह ने डॉ. चंद्रभान के खिलाफ एक पुराने आपराधिक मामले का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। डॉ. चंद्रभान ने इन आरोपों का विरोध किया था। उस समय प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने संबंधित पुराने मामले में अदालत से बरी होने की बात कही थी। इसलिए विश्वेंद्र सिंह के तत्कालीन आरोपों को किसी आपराधिक दोषसिद्धि के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। बाद में विश्वेंद्र सिंह ने डॉ. चंद्रभान के संबंध में इस्तेमाल की गई अपनी टिप्पणी पर पार्टी आलाकमान के सामने खेद भी जताया था। हालांकि उन्होंने कार्यशाला में हुई हिंसा में अपनी भूमिका से इनकार जारी रखा।
कांग्रेस ने स्थगित कर दी थीं अन्य कार्यशालाएं
भरतपुर की घटना का असर केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहा। घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस ने जयपुर, कोटा और उदयपुर में प्रस्तावित अपनी अन्य संभागीय कार्यशालाएं भी स्थगित कर दी थीं। इससे उस समय पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए। विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले नेताओं और उनके पक्ष में खड़े नेताओं के बीच भी मतभेद दिखाई दिए।
अब फिर क्यों चर्चा में आया 2012 का मामला?
इस बार विवाद का केंद्र कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विश्वेंद्र सिंह के बीच चल रही बयानबाजी है। भरतपुर और डीग में निकाय चुनाव के बाद संगठन की भूमिका को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक हुए। विश्वेंद्र सिंह ने प्रदेश नेतृत्व की आलोचना की। दूसरी ओर, कांग्रेस संगठन की ओर से उनके आचरण पर सवाल उठाए

