राजस्थान में 10 साल का सबसे बड़ा अकाल? गहलोत का दावा, हजारों गांवों में सूखे का संकट, सरकार से तत्काल राहत की मांग

राजस्थान में कम बारिश के बीच सूखे का संकट गहराने की चर्चा है। अशोक गहलोत ने दशक का सबसे बड़ा अकाल बताया, वहीं सरकार ने पानी और चारे के लिए राहत उपायों का ऐलान किया।

राजस्थान में 10 साल का सबसे बड़ा अकाल? गहलोत का दावा, हजारों गांवों में सूखे का संकट, सरकार से तत्काल राहत की मांग

राजस्थान में सूखे का संकट अब केवल खेतों तक सीमित नहीं है। कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के साथ पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ने की आशंका है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया है कि प्रदेश पिछले दस वर्षों के सबसे बड़े अकाल का सामना कर रहा है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार से तत्काल राहत कार्य तेज करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई जिलों में चारे की कीमत बढ़ रही है और हजारों गांव सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। हालांकि, दस वर्षों के सबसे बड़े अकाल और प्रभावित गांवों के संबंध में गहलोत के दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

चार जिलों के 6,637 गांवों को लेकर गहलोत का दावा

गहलोत ने अपने बयान में पश्चिमी राजस्थान के चार जिलों की स्थिति का उल्लेख किया। उनके अनुसार, जोधपुर के करीब 2,000, बाड़मेर के 2,460, बालोतरा के 1,216 और जैसलमेर के 961 गांव सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। इन आंकड़ों के आधार पर चार जिलों के कुल 6,637 गांवों में संकट होने का दावा किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि यही स्थिति मारवाड़ के अन्य इलाकों और प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे सकती है।

चारा 1200 रुपए प्रति मण! पशुपालकों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

गहलोत ने सबसे ज्यादा चिंता पशुपालकों की स्थिति को लेकर जताई है। उनके मुताबिक, जोधपुर, बाड़मेर और बालोतरा में चारे की कीमत बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर चारा लगभग 1,200 रुपए प्रति मण तक पहुंच गया है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो पशुपालकों के सामने अपने पशुओं के लिए पर्याप्त चारा जुटाना मुश्किल हो सकता है। गहलोत ने सरकार से चारे की कीमतों पर नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने और प्रभावित इलाकों में चारा तथा पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। 

किसानों के साथ मजदूरों के रोजगार पर भी संकट

सूखे का असर केवल फसल उत्पादन पर नहीं पड़ता। खेती से जुड़े मजदूरों और पशुपालन पर निर्भर परिवारों की आय भी प्रभावित हो सकती है। गहलोत ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में मजदूरों के लिए रोजगार और मजदूरी की व्यवस्था पहले से तैयार की जाए। उनका कहना है कि संकट बढ़ने का इंतजार करने के बजाय सरकार को अभी से व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। 

मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर गहलोत ने उठाए सवाल

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की बाड़मेर यात्रा के दौरान की गई घोषणाओं का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के 48 घंटे बाद भी स्थानीय प्रशासन को सरकार से लिखित स्वीकृति मिलने का इंतजार था। गहलोत ने इस कथित देरी पर सवाल उठाते हुए सरकार से राहत संबंधी स्वीकृतियां तत्काल जारी करने की मांग की है। हालांकि, प्रशासन को लिखित स्वीकृति नहीं मिलने संबंधी उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?

राज्य सरकार की ओर से भी कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए राहत उपायों की घोषणाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन पेयजल व्यवस्था और टैंकरों से जलापूर्ति 31 दिसंबर तक जारी रखने की बात कही है। बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो खोलने की घोषणा भी की गई है। इसके अतिरिक्त जिला कलेक्टरों को एक करोड़ रुपए तक के आपातकालीन कार्य स्वीकृत करने का अधिकार दिया गया है। मुख्य सचिव ने भी अधिकारियों को जल वितरण की कार्ययोजना तैयार करने और पशुओं के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

15 अक्टूबर के बाद स्पष्ट हो सकती है सूखे की वास्तविक तस्वीर

कमजोर मानसून के बाद राज्य में फसल खराबी और सूखे की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्टों में 11 से अधिक जिलों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। पाली, जैसलमेर और जालोर के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी अधिक बताई जा रही है। 15 अक्टूबर के बाद गिरदावरी रिपोर्ट मिलने की संभावना है। इसके आधार पर प्रभावित जिलों और तहसीलों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। 

अब सबसे बड़ा सवाल - राहत की घोषणाएं जमीन पर कब उतरेंगी?

राजस्थान में सूखे की स्थिति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। गहलोत ने व्यापक राहत योजना और तत्काल प्रशासनिक स्वीकृतियों की मांग की है। दूसरी ओर सरकार ने पेयजल आपूर्ति, चारा डिपो और आपातकालीन कार्यों से संबंधित कदमों की घोषणा की है। अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रभावित क्षेत्रों में पानी और चारे की वास्तविक उपलब्धता कितनी है तथा राहत योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक कब और कैसे पहुंचेगा। अंतिम गिरदावरी रिपोर्ट से नुकसान की व्यापकता स्पष्ट होगी। लेकिन जिन क्षेत्रों में अभी पानी और चारे की कमी है, वहां राहत कार्यों की प्रगति महत्वपूर्ण बनी हुई है।