निकाय में झटका, पंचायत में जीत का भरोसा! डोटासरा का ‘सूपड़ा साफ’ वाला दावा, सवाल- आखिर इतना कॉन्फिडेंस आया कहां से?
राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पंचायत चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होने का दावा किया है। यह बयान निकाय चुनाव में भाजपा की बढ़त के बाद सामने आया है।
राजस्थान कांग्रेस में इन दिनों चुनावी गणित से ज्यादा आत्मविश्वास का गणित चर्चा में है। वजह हैं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, जिन्होंने डेगाना में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच दावा कर दिया कि आने वाले पंचायत चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि उनका यह दावा ऐसे वक्त आया है जब हालिया निकाय चुनाव के नतीजों में भाजपा ने कांग्रेस से ज्यादा वार्डों पर जीत दर्ज की और बाद के मेयर चुनावों में 10 में से 9 नगर निगमों में भाजपा के मेयर बने।
यानी शहरों के चुनाव का स्कोरबोर्ड अभी पूरी तरह पुराना भी नहीं हुआ और कांग्रेस ने गांवों के अगले मुकाबले में जीत का ऐलान पहले ही कर दिया। अब सियासी सवाल यही है कि डोटासरा के इस आत्मविश्वास का आधार आखिर क्या है? जमीनी फीडबैक, पार्टी का आंतरिक आकलन या फिर निकाय चुनाव की हार के बाद पंचायत चुनाव में तस्वीर पलटने की उम्मीद?
निकाय में भाजपा आगे, पंचायत में कांग्रेस का दावा
14 सितंबर को आए शहरी निकाय चुनाव के आंकड़ों में भाजपा ने 4,023 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस 3,438 वार्डों पर रही। हालांकि कई निकायों में निर्दलीयों और छोटे दलों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद मेयर चुनाव में भाजपा ने जयपुर, जोधपुर और कोटा समेत कई बड़े नगर निगमों में जीत दर्ज की और कुल 10 में से 9 नगर निगमों में मेयर पद अपने नाम कर लिया।
ऐसे में डोटासरा का पंचायत चुनाव को लेकर इतना स्पष्ट दावा अपने आप में राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
‘सूपड़ा साफ’ वाला कॉन्फिडेंस, लेकिन गणित क्या कहता है?
डोटासरा ने डेगाना के कांग्रेस पंचायत राज कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि पंचायत चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होगा। उन्होंने सरकार पर चुनाव लड़ने के इच्छुक कांग्रेस नेताओं और संभावित उम्मीदवारों की जानकारी जुटाने का आरोप भी लगाया।
यहीं से सियासी व्यंग्य का सवाल निकलता है—निकाय चुनाव के नतीजों में भाजपा को बढ़त मिली, लेकिन पंचायत चुनाव आते ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के पास जीत का इतना पक्का भरोसा कहां से आ गया?
सियासत में दावा करना आसान है, लेकिन चुनावी मैदान में उस दावे को वोट में बदलना अलग कहानी होती है। खासकर तब, जब सामने वाली पार्टी हालिया शहरी निकाय चुनाव में बढ़त के आंकड़े लेकर मैदान में उतर रही हो।
डोटासरा का हमला भी जारी, सरकार पर लगाए कई आरोप
डोटासरा ने अपने भाषण में भाजपा सरकार पर पंचायत चुनाव में दबाव बनाने, निकाय चुनाव के दौरान पुलिस के इस्तेमाल और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को डराने या दबाव में लेने की कोशिश हुई तो पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी।
उन्होंने खाद, किसानों की समस्याओं, मुआवजे, पेंशन और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दों को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर बिजली, पानी और चुनाव कराने जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए।
इन आरोपों और दावों पर भाजपा का पक्ष अलग हो सकता है, इसलिए इन्हें कांग्रेस नेताओं के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
असली परीक्षा गांव के मैदान में होगी
निकाय चुनाव शहरों की राजनीति का पैमाना हैं, जबकि पंचायत चुनाव का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण अलग होता है। गांवों में स्थानीय चेहरे, व्यक्तिगत संपर्क, जातीय-सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार की पकड़ जैसे फैक्टर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए निकाय चुनाव के आंकड़ों को पंचायत चुनाव का सीधा परिणाम मानना भी सही नहीं होगा। लेकिन डोटासरा के ‘भाजपा का सूपड़ा साफ’ वाले दावे ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि कांग्रेस पंचायत चुनाव को लेकर आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
अब सवाल सिर्फ इतना है—**डोटासरा का यह आत्मविश्वास पंचायत चुनाव के मैदान में वोटों में बदलता है या फिर निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस को एक और कड़ी चुनावी परीक्षा का सामना करना पड़ेगा?**

