गहलोत का सरकार पर हमला, बोले- सूखे के खतरे से निपटने की अभी से हो तैयारी, पानी-चारे से लेकर रोजगार तक बनाएं प्लान

राजस्थान में कमजोर मानसून को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को संभावित सूखे से निपटने के लिए पहले से मास्टर प्लान तैयार करने की सलाह दी है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था पर जोर दिया।

गहलोत का सरकार पर हमला, बोले- सूखे के खतरे से निपटने की अभी से हो तैयारी, पानी-चारे से लेकर रोजगार तक बनाएं प्लान

राजस्थान में कमजोर मानसून को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को अभी से तैयारी करने की सलाह दी है। 2 सितंबर को प्रेस से बातचीत में गहलोत ने कहा कि राज्य में बारिश की स्थिति चिंताजनक है और अगर आने वाले समय के लिए अभी से ठोस योजना नहीं बनाई गई तो ग्रामीण इलाकों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

गहलोत ने सरकार से अपील की कि संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए रोजगार, पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था को लेकर पहले से मास्टर प्लान तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि अकाल या सूखे के दौरान परेशानियां होना स्वाभाविक है, लेकिन सरकार की तैयारी ऐसी होनी चाहिए कि लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

कमजोर मानसून पर गहलोत की सरकार को सलाह

अशोक गहलोत ने कहा कि वह मानसून की स्थिति को लेकर सरकार से पहले भी कई बार आग्रह कर चुके हैं। उनके मुताबिक खरीफ की बुआई का समय काफी हद तक निकल चुका है, हालांकि जिन इलाकों में अभी बारिश होती है, वहां कुछ किसान बुआई कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को भविष्य की स्थिति का आकलन करते हुए अभी से कदम उठाने चाहिए। गहलोत ने खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर जोर दिया।

 'अभी से तय करें, गांवों में कौन-कौन से काम शुरू होंगे'

गहलोत ने कहा कि यदि बारिश की स्थिति खराब रहती है तो ग्रामीण आबादी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ऐसे में सरकार को पहले से यह तय करना चाहिए कि लोगों को मजदूरी कैसे उपलब्ध कराई जाएगी और गांवों में कौन-कौन से काम शुरू किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सिर्फ हालात बिगड़ने के बाद राहत के इंतजाम करने के बजाय सरकार को पहले से कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। इससे जरूरत पड़ने पर तत्काल काम शुरू किए जा सकेंगे और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मदद मिल सकेगी।

पानी और चारे की व्यवस्था पर भी जोर

पूर्व मुख्यमंत्री ने संभावित सूखे की स्थिति में पेयजल को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को अभी से यह देखना चाहिए कि आने वाले समय में इंसानों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था कहां से होगी।

इसके साथ ही उन्होंने पशुओं के लिए चारे के इंतजाम को लेकर भी तैयारी करने की बात कही। गहलोत के मुताबिक सूखे की स्थिति में केवल लोगों के लिए पानी और रोजगार ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि पशुधन को बचाना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

 मनरेगा को लेकर भी उठाए सवाल

गहलोत ने मनरेगा को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा के बंद होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले मनरेगा के माध्यम से ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलती थी।

गहलोत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार को वैकल्पिक तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी गंभीरता से काम करना चाहिए।

## 'अकाल में परेशानी होगी, लेकिन उसे कम किया जा सकता है'

गहलोत ने कहा कि अगर बारिश कम होती है और अकाल या सूखे जैसी स्थिति बनती है तो लोगों को परेशानी होना स्वाभाविक है। लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि इस परेशानी को न्यूनतम किया जाए।

उन्होंने सरकार से पानी, रोजगार, चारा और गांवों में शुरू किए जाने वाले कामों को लेकर व्यापक योजना बनाने का आग्रह किया। गहलोत के मुताबिक अगर तैयारी पहले से होगी तो संकट आने पर सरकार को अचानक फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और प्रभावित लोगों तक राहत तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।

## राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर भी बोले गहलोत

प्रेस से बातचीत के दौरान गहलोत से राम मंदिर ट्रस्ट में एयर मार्शल जितेंद्र को सीईओ बनाए जाने और पहले उठे कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर भी सवाल किया गया।

इस पर गहलोत ने कहा कि अगर पहले चोरी का मामला सामने आया था तो उसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें रुकनी चाहिए और पूरे मामले की जांच जरूरी है।

इस बयान के जरिए गहलोत ने एक तरफ राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पुराने विवाद पर सवाल उठाया, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में मानसून की कमजोर स्थिति को लेकर सरकार को समय रहते तैयारी करने की सलाह दी।