नाम वापसी के बाद राजस्थान निकाय चुनाव की तस्वीर साफ, कहीं बागी मैदान से बाहर तो कहीं निर्दलीय बिगाड़ेंगे समीकरण

राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव 2026 में नामांकन वापसी के बाद चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। जयपुर के 19 निकायों में 2,644, अजमेर में 360 और अलवर में 1,713 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों की बड़ी संख्या मुकाबला रोचक बनाएगी।

नाम वापसी के बाद राजस्थान निकाय चुनाव की तस्वीर साफ, कहीं बागी मैदान से बाहर तो कहीं निर्दलीय बिगाड़ेंगे समीकरण

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव-2026 में नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही अब चुनावी रण की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। टिकट कटने के बाद मैदान में उतरे बागियों को मनाने की राजनीतिक कोशिशों का दौर भी खत्म हो चुका है। कई जगह बागियों ने नाम वापस लेकर पार्टी प्रत्याशियों को राहत दी है, जबकि कुछ निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की चुनौती बढ़ा दी है।

नाम वापसी के बाद अब प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे और इसके साथ ही प्रचार अभियान भी पूरी रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। जयपुर से लेकर अजमेर, बीकानेर, अलवर, दौसा, धौलपुर और अन्य निकायों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।

जयपुर में 19 निकायों में 2,644 प्रत्याशी मैदान में

जयपुर जिले के 19 नगरीय निकायों में नाम वापसी के बाद कुल 2,644 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रह गए हैं। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है।

टिकट वितरण के बाद नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधने में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पूरी ताकत लगाई थी। नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि किन वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों के सामने अपने ही खेमे से चुनौती कायम है।

निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी कई वार्डों में चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। खासतौर पर उन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होगा, जहां प्रमुख दलों के बीच मतों का अंतर कम रहने की संभावना है।

अजमेर में निर्दलीयों की बड़ी मौजूदगी

अजमेर नगर निगम में नाम वापसी के बाद 125 नाम वापस लिए गए। अब यहां कांग्रेस के 77, भाजपा के 79 और 204 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं।

निर्दलीय उम्मीदवारों की यह संख्या दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत जनसंपर्क के आधार पर मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकते हैं।

अजमेर में अब पार्टियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने समर्थक वोट को एकजुट रखने की होगी।

 बीकानेर में 373 प्रत्याशी, एक प्रत्याशी निर्विरोध

बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में नाम वापसी के बाद 373 प्रत्याशी चुनाव मैदान में बचे हैं। वहीं भाजपा की एक प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी हैं।

इसके साथ ही बाकी वार्डों में चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। पार्टी संगठन अब प्रत्याशियों के प्रचार और बूथ स्तर की रणनीति पर फोकस करेगा।

अलवर में 350 वार्डों के लिए 1,713 उम्मीदवार

अलवर जिले में भी नाम वापसी के बाद चुनावी तस्वीर बदल गई है। जिले के 350 वार्डों में 440 नाम वापस लिए गए, जिसके बाद 1,713 अभ्यर्थी चुनाव मैदान में रह गए हैं।

इतनी बड़ी संख्या में प्रत्याशियों के मैदान में रहने से कई सीटों पर वोटों का बंटवारा चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। स्थानीय समीकरण, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और वार्ड स्तर के मुद्दे यहां निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

धौलपुर में भी कई सीटों पर मुकाबला रोचक

धौलपुर की बाड़ी नगर पालिका में 73 नाम वापस लिए जाने के बाद 179 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं धौलपुर नगर परिषद में 94 नामांकन वापस हुए और अब 382 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे।

सैंपऊ में 104 और मनियां में 56 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रह गए हैं। इन निकायों में भी अब प्रचार अभियान तेज होने के साथ स्थानीय मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में आने की उम्मीद है।

 मालपुरा में प्रत्याशी को लेकर विवाद

मालपुरा में नाम वापसी के दौरान राजनीतिक विवाद भी सामने आया। कांग्रेस प्रत्याशी लता देवी को नाम वापस लेने के लिए कथित दबाव और पैसों के लालच के आरोपों को लेकर हंगामा हुआ।

इस मामले ने नामांकन वापसी के आखिरी दौर को राजनीतिक रूप से गरमा दिया। हालांकि आरोपों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति संबंधित जांच और सामने आने वाले तथ्यों से स्पष्ट होगी।

 केकड़ी में 99 उम्मीदवार मैदान में

केकड़ी में नामांकन वापसी के बाद 21 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लिए। अब कुल 99 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। यहां भी अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों का पूरा फोकस प्रचार अभियान पर रहेगा।

सिरोही में सांसद के खिलाफ आचार संहिता की शिकायत

सिरोही में चुनावी माहौल के बीच सांसद लुम्बराम चौधरी के खिलाफ आचार संहिता के कथित उल्लंघन को लेकर शिकायत सामने आई है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सामने आई इस शिकायत ने स्थानीय राजनीति में चर्चा बढ़ा दी है।

अब चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर मामले में क्या कार्रवाई होती है, इस पर भी नजर रहेगी।

## 2 चरणों में होगा मतदान, सुरक्षा भी रहेगी कड़ी

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के लिए मतदान दो चरणों में होगा। पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 11 सितंबर को वोट डाले जाएंगे। इसके बाद 14 सितंबर को मतगणना होगी।

चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है। दौसा में करीब 2,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की योजना है और अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग भी की गई है।

अब असली परीक्षा पार्टियों की

नाम वापसी का चरण खत्म होने के साथ ही राजनीतिक दलों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन को एकजुट रखने की होगी। जहां बागी मैदान में हैं, वहां पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या वाले वार्डों में हर वोट महत्वपूर्ण हो सकता है।

अब चुनावी मैदान सज चुका है। प्रत्याशियों के चेहरे तय हैं, नामांकन वापसी का दौर खत्म हो चुका है और जल्द ही चुनाव चिह्नों के साथ प्रचार अभियान अपने चरम पर पहुंचेगा। ऐसे में राजस्थान के निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ बागियों और निर्दलीयों की भूमिका पर भी सभी की नजर रहेगी।