Hanuman Beniwal Nagaur - क्या RLP बनेगी किंगमेकर? 18 वार्डों में लगाया दांव
नागौर नगर परिषद चुनाव में BJP और कांग्रेस के बीच मुकाबले में RLP के 18 उम्मीदवार नतीजों के बाद किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। 60 वार्डों वाले नगर परिषद में त्रिशंकु बोर्ड की स्थिति बनी तो हनुमान बेनीवाल की पार्टी बोर्ड गठन में निर्णायक हो सकती है।
राजस्थान नगर निकाय चुनाव की वोटिंग खत्म हो चुकी है। अब हर राजनीतिक दल अपनी जीत और बोर्ड बनाने का दावा कर रहा है। लेकिन नागौर में मुकाबला BJP और कांग्रेस की सीधी लड़ाई से आगे निकल सकता है। यहां हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी RLP चुनाव परिणाम के बाद सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने की स्थिति में आ सकती है। RLP का बोर्ड नहीं, फिर भी बेनीवाल क्यों महत्वपूर्ण? यही नागौर की राजनीति का सबसे दिलचस्प गणित है। 18 सीटों पर उम्मीदवार होने के कारण RLP अपने दम पर बहुमत तक नहीं पहुंच सकती। इसलिए सीधे तौर पर RLP का बोर्ड बनने की संभावना नहीं है। लेकिन पार्टी समर्थकों की नजर एक अलग परिस्थिति पर है। अगर नतीजों में BJP और कांग्रेस दोनों स्पष्ट बहुमत से पीछे रह जाती हैं और RLP के कई प्रत्याशी जीतकर आते हैं तो बेनीवाल की पार्टी बोर्ड गठन में निर्णायक हो सकती है। ऐसी स्थिति में सवाल यह नहीं रहेगा कि RLP कितनी सीटें जीती, बल्कि यह होगा कि RLP के बिना बोर्ड कौन बना सकता है? नागौर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। उपलब्ध अंतिम प्रत्याशी सूची के मुताबिक RLP ने इनमें से 18 वार्डों में उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस 47 और भाजपा 46 वार्डों में चुनाव लड़ रही हैं।
18 वार्डों का दांव बदल सकता है 60 वार्डों का गणित
हनुमान बेनीवाल खुद नागौर में अपने उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करते दिखाई दिए। उन्होंने कई वार्डों में सभाएं और जनसंपर्क कर RLP प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे। इसलिए नागौर का परिणाम बेनीवाल के लिए स्थानीय चुनाव से कहीं अधिक राजनीतिक मायने रखता है। अच्छे नतीजे उन्हें अपने गृह क्षेत्र में तीसरी राजनीतिक ताकत के रूप में अपनी पकड़ दिखाने का मौका देंगे।
'किंगमेकर' बनने के लिए कितनी जीत जरूरी?
यह पूरी तरह BJP और कांग्रेस के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। अगर किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल जाता है तो RLP की भूमिका सीमित हो जाएगी। लेकिन दोनों प्रमुख दल बहुमत से कुछ सीट पीछे रहते हैं और RLP पर्याप्त वार्ड जीत लेती है तो उसके पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में सभापति की कुर्सी BJP या कांग्रेस में से किसी के पास जाए, राजनीतिक चाबी बेनीवाल के हाथ में होने की संभावना बन सकती है।
नागौर से निकलेगा बेनीवाल की निकाय राजनीति का संदेश
RLP ने नागौर के बाहर भी राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में निकाय चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की है। इसलिए ये चुनाव यह भी बताएंगे कि बेनीवाल का प्रभाव विधानसभा और लोकसभा की राजनीति से निकलकर स्थानीय निकाय स्तर पर कितना मजबूत हुआ है। फिलहाल RLP समर्थक किंगमेकर बनने की उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन इसका फैसला केवल चुनाव परिणाम करेंगे। अगर BJP या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला तो कहानी वहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन अगर नागौर में त्रिशंकु बोर्ड की तस्वीर बनी और RLP के पार्षद निर्णायक संख्या में जीते तो चुनाव के बाद सबसे बड़ा सवाल होगा। नागौर में बोर्ड किसका बनेगा, नहीं, बल्कि हनुमान बेनीवाल बोर्ड किसका बनवाएंगे?

