चुनाव लड़ने को छोड़ी सरकारी नौकरी तो हार के बाद वापसी नहीं, Rajasthan High Court का बड़ा फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने के लिए सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने और हार के बाद सेवा में वापसी की मांग करने वाले पूर्व सीनियर ऑडिटर नीरज बिश्नोई की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि चुनाव हारना इस्तीफा वापस लेने के लिए ‘material change in circumstances’ नहीं माना जा सकता।
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के चुनाव लड़ने और बाद में सेवा में वापसी से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि कोई कर्मचारी अगर राजनीति में आने के लिए स्वेच्छा से नौकरी छोड़ता है, चुनाव लड़ता है और हारने के बाद दोबारा सरकारी सेवा में लौटना चाहता है, तो केवल चुनावी हार को परिस्थितियों में ऐसा बदलाव नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर इस्तीफा वापस लेना जरूरी हो। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने पूर्व सीनियर ऑडिटर नीरज बिश्नोई की याचिका खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जयपुर के निर्णय को बरकरार रखा।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिया था इस्तीफा
नीरज बिश्नोई नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 लड़ने के उद्देश्य से इस्तीफा दिया था। इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उन्होंने रतनगढ़ विधानसभा सीट से बसपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेने और सरकारी सेवा में बहाली के लिए आवेदन किया। विभाग ने उनका अनुरोध स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद मामला CAT और फिर हाईकोर्ट पहुंचा।
कोर्ट ने कहा- यह सोच-समझकर लिया गया फैसला था
हाईकोर्ट ने माना कि चुनाव लड़ने के लिए नौकरी छोड़ना कर्मचारी का स्वैच्छिक और विचारपूर्वक लिया गया निर्णय था। अदालत ने कहा कि कर्मचारी ने जिस उद्देश्य से इस्तीफा दिया था, उसने उस उद्देश्य को पूरा भी किया और चुनाव लड़ा। इसलिए चुनाव हार जाना उस मूल परिस्थिति में कोई ऐसा “material change” नहीं है, जिसके आधार पर इस्तीफा वापस लेना अनिवार्य हो जाए। मामला CCS (Pension) Rules, 2021 के Rule 26(5) से भी जुड़ा था। इस नियम के तहत इस्तीफा वापस लेने पर विचार कुछ विशेष परिस्थितियों और सार्वजनिक हित में किया जा सकता है। CAT ने भी माना था कि इस मामले में “compelling reason” और “material change in circumstances” जैसी आवश्यक शर्तें पूरी नहीं होतीं।
पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट का तर्क भी नहीं माना
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि इस्तीफे का असर पेंशन और रिटायरमेंट लाभों पर पड़ेगा, इसकी जानकारी बाद में हुई। लेकिन अदालत ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि पेंशन या रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलने की जानकारी चुनाव हारने के बाद सामने आना इस्तीफा वापस लेने के लिए बाध्यकारी कारण नहीं माना जा सकता।
राजनीतिक निष्पक्षता पर भी कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहने से जुड़े नियमों पर भी ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक दल के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुका था, इसलिए उसकी राजनीतिक गतिविधि भी इस्तीफा वापसी पर विचार करते समय महत्वपूर्ण पहलू है। अंततः हाईकोर्ट ने CAT जयपुर के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

