ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा या 2029 की तैयारी? कांग्रेस के सड़क पर उतरने के पीछे क्या है असली रणनीति
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में कांग्रेस का आंदोलन क्या सिर्फ चुनाव आयोग तक सीमित है? 2027 और 2029 की राजनीति के बीच समझिए कांग्रेस की संभावित रणनीति।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कांग्रेस लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और INDIA गठबंधन के कई नेताओं की सक्रियता के बीच एक बड़ा राजनीतिक सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस का असली उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा लेना है या आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक माहौल तैयार करना?
दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है। ऐसे में केवल विरोध प्रदर्शन के आधार पर उन्हें पद से नहीं हटाया जा सकता। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए जनता के सामने खुद को चुनावी अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाली पार्टी के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में SIR की प्रक्रिया है, जिसे लेकर विपक्ष मतदाता सूची की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जता रहा है। वहीं, चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़ता रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक उठाकर व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप देने की कोशिश कर रही है।
इस आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पहलू INDIA गठबंधन के भीतर नेतृत्व और राजनीतिक श्रेय को लेकर संभावित प्रतिस्पर्धा भी है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह जरूरी हो सकता है कि विपक्षी आंदोलनों में उसकी भूमिका स्पष्ट दिखाई दे। साथ ही समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना भी बड़ी चुनौती है।
राजनीतिक बहस का एक पहलू यह भी है कि विरोध प्रदर्शन, हिरासत और FIR जैसी घटनाएं भविष्य में कांग्रेस के चुनावी अभियान का हिस्सा बन सकती हैं। पार्टी इन्हें अपने संघर्ष के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत कर सकती है। हालांकि, इसे कांग्रेस की निश्चित रणनीति के बजाय एक संभावित राजनीतिक आकलन के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस का यह आंदोलन चुनाव आयोग पर दबाव बनाने तक सीमित रहेगा या 2027 और 2029 की चुनावी राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनेगा? क्या कांग्रेस इस आंदोलन का नेतृत्व और राजनीतिक श्रेय अपने नाम कर पाएगी, या INDIA गठबंधन के भीतर ही नई प्रतिस्पर्धा सामने आएगी?**
इन्हीं सवालों और कांग्रेस की संभावित राजनीतिक रणनीति का विश्लेषण कर रही हैं भारती जैन, PK Times की इस खास रिपोर्ट INSIDE STORY में।
देखिए पूरी इनसाइड स्टोरी नीचे दिए गए वीडियो में।

