100 दिन में बदलेगी जयपुर की सूरत? 100 करोड़ के प्लान में सफाई से लेकर रोशनी तक पर फोकस
जयपुर नगर निगम की 100 दिवसीय कार्ययोजना में 150 वार्डों के विकास, 10 हजार LED लाइटों, 600 गुलाबी दीवारों और परकोटे की सफाई पर फोकस है। जानें पूरा प्लान।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में अगले 100 दिनों के दौरान विकास कार्यों और जनसुविधाओं को रफ्तार देने की तैयारी है। जयपुर नगर निगम ने शहर के सभी 150 वार्डों में विकास, सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए 100 दिवसीय कार्ययोजना शुरू की है। महापौर सुनील कोठारी ने इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के तहत प्रत्येक वार्ड में 50 लाख रुपये के विकास कार्य करवाने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही परकोटे में विशेष सफाई अभियान, 10 हजार नई एलईडी लाइटें लगाने और 600 दीवारों को गुलाबी रंग से सजाने की भी तैयारी है।
नगर निगम का दावा है कि इस अभियान से शहर की सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा। हालांकि, योजना का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तय समय में काम कितनी तेजी से और किस स्तर पर पूरे होते हैं।
150 वार्डों में विकास कार्य, 100 करोड़ रुपये का बजट
जयपुर नगर निगम की 100 दिवसीय कार्ययोजना का उद्देश्य शहर के सभी 150 वार्डों में विकास कार्यों को गति देना है। योजना में सड़क, बिजली, पानी और दूसरी बुनियादी जनसुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
महापौर के अनुसार, प्रत्येक वार्ड में पार्षदों की अनुशंसा पर 50 लाख रुपये के विकास कार्य करवाए जाएंगे। इस हिसाब से 150 वार्डों में कुल 75 करोड़ रुपये के काम प्रस्तावित हैं। वहीं, पूरी कार्ययोजना के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट बताए जाने से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शेष राशि किन मदों में खर्च होगी।
महापौर ने यह भी दावा किया कि जयपुर में बदलाव केवल 100 दिनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अगले एक साल में भी इसका असर दिखाई देगा।
परकोटे में 2,000 निगमकर्मी संभालेंगे सफाई की जिम्मेदारी
जयपुर के परकोटे में सफाई व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए 31 अक्टूबर को ऑपरेशन क्लीन स्वीप का दूसरा अभियान चलाने की योजना है। इसके लिए 36 बीट बनाई जाएंगी और करीब 2,000 निगमकर्मियों को तैनात किया जाएगा।
दिवाली को देखते हुए शहर में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए 3,000 अतिरिक्त कर्मचारियों को भी लगाने की जानकारी दी गई है। ये कर्मचारी एक महीने तक दोहरी शिफ्ट में काम करेंगे।
नगर निगम का लक्ष्य कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाना और सभी वार्डों में सफाई व्यवस्था का स्तर सुधारना है। दिवाली के दौरान व्यापार मंडलों का सहयोग भी 11 दिनों तक लिया जाएगा, जबकि पहले यह अवधि सात दिन बताई गई थी।
10 हजार नई LED लाइटें लगेंगी
शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी बेहतर करने के लिए चरणबद्ध तरीके से 10 हजार नई एलईडी लाइटें लगाने की योजना बनाई गई है। इसमें उन बिजली के खंभों को भी शामिल किया जाएगा, जहां फिलहाल रोशनी की व्यवस्था नहीं है।
इस पहल का उद्देश्य रात के समय शहर के अलग-अलग इलाकों में बेहतर रोशनी उपलब्ध कराना है। योजना कितने चरणों में पूरी होगी और किन क्षेत्रों को पहले शामिल किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
600 दीवारों को गुलाबी रंग से सजाने की तैयारी
जयपुर की पहचान को और आकर्षक बनाने के लिए ‘रंग दे गुलाबी 2.0’ अभियान 24 अक्टूबर से शुरू करने की योजना है। इसके तहत शहर की 600 दीवारों को गुलाबी रंग से संवारा जाएगा।
इसके अलावा, शहर में कचरा जमा होने वाले 500 हॉटस्पॉट भी चिह्नित किए गए हैं। इन स्थानों पर सफाई, कचरा प्रबंधन और सौंदर्यीकरण से जुड़े काम किए जाएंगे।
नगर निगम ने योजना को समय पर पूरा करने के लिए अलग-अलग जोनों को लक्ष्य देने और नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाने की बात कही है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद बनी कार्ययोजना
जयपुर नगर निगम की इस योजना की रूपरेखा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर हुई समीक्षा बैठक के बाद तैयार की गई। बैठक में नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और नगरीय विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधि शामिल हुए थे।
इसके बाद शुक्रवार को नगर निगम के ईसी सभागार में महापौर सुनील कोठारी, उप-महापौर सरोज कंवर और निगम आयुक्त ओमप्रकाश कसेरा की मौजूदगी में 100 दिवसीय कार्ययोजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
अब 100 दिनों में काम पूरा करना होगी असली चुनौती
जयपुर नगर निगम की इस कार्ययोजना में विकास, सफाई, रोशनी और सौंदर्यीकरण जैसे कई अहम मुद्दों को शामिल किया गया है। सभी 150 वार्डों में काम करवाने और परकोटे की सफाई व्यवस्था सुधारने की योजना शहरवासियों के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, योजना की सफलता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि निर्धारित समय में काम पूरा होने, बजट के प्रभावी इस्तेमाल और नियमित निगरानी से तय होगी। अब देखना होगा कि 100 दिनों में जयपुर के कितने इलाकों में बदलाव जमीन पर दिखाई देता है।

