अल नीनो से भारत में बढ़ सकता है गर्मी का खतरा, 6 महीने में 55 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान; मार्च पर नजर

अल नीनो के संभावित असर के बीच क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के ट्रैकर ने अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक भारत में गर्मी से करीब 55 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान जताया है।

अल नीनो से भारत में बढ़ सकता है गर्मी का खतरा, 6 महीने में 55 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान; मार्च पर नजर

अल नीनो के संभावित असर को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के नए El Niño Heat Mortality Tracker के मुताबिक, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच भारत में गर्मी से जुड़ी करीब 55 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इनमें से बड़ी संख्या मार्च में होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह आंकड़ा वैज्ञानिक मॉडल पर आधारित अनुमान है, निश्चित रूप से होने वाली मौतों की भविष्यवाणी नहीं।

 दुनिया में 3.73 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के ताजा ट्रैकर के अनुसार, अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक दुनियाभर में अत्यधिक गर्मी के कारण लगभग 3.73 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। जून 2026 से मार्च 2027 तक की पूरी अवधि के लिए यह अनुमान करीब 8.57 लाख है।

ये आंकड़े सामान्य तापमान वाले वर्षों की तुलना में गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मृत्यु दर का अनुमान दर्शाते हैं। इन्हें अब तक दर्ज हुई मौतों की वास्तविक संख्या नहीं समझना चाहिए। ट्रैकर में बीते महीनों के तापमान संबंधी आंकड़ों और आने वाले महीनों के मौसमी पूर्वानुमानों का इस्तेमाल किया गया है।

भारत के साथ इन देशों में भी बढ़ सकता है खतरा

ट्रैकर के मुताबिक, अक्टूबर से मार्च के बीच गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान कई देशों में अधिक है।

नाइजीरिया में करीब 56 हजार और भारत में करीब 55 हजार अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इंडोनेशिया में यह संख्या लगभग 29 हजार, जबकि ब्राजील में भी गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है। ये अनुमान अलग-अलग देशों में तापमान, स्थानीय परिस्थितियों और गर्मी के प्रति लोगों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

क्या है अल नीनो और इसका मौसम पर क्या असर पड़ता है?

अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। इसके कारण वायुमंडलीय हवाओं और बारिश के वैश्विक पैटर्न में बदलाव आ सकता है। भारत में इसका असर मानसून और तापमान पर पड़ सकता है, लेकिन प्रभाव हर क्षेत्र और मौसम में एक जैसा नहीं होता।

अल नीनो का मतलब यह नहीं है कि देश के हर हिस्से में लगातार भीषण गर्मी पड़ेगी। स्थानीय मौसम, बारिश, हवा और अन्य जलवायु परिस्थितियां भी तापमान को प्रभावित करती हैं।

मार्च में क्यों जताई जा रही है ज्यादा चिंता?

ट्रैकर के अनुसार, भारत में अनुमानित अतिरिक्त मौतों का बड़ा हिस्सा मार्च 2027 में हो सकता है। मार्च में गर्मी बढ़ने के साथ कई क्षेत्रों में तापमान तेजी से ऊपर जा सकता है। ऐसे में खुले में काम करने वाले श्रमिकों, बुजुर्गों और उन लोगों को अधिक जोखिम हो सकता है जिनके पास ठंडक, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की पर्याप्त सुविधा नहीं है।

हालांकि, आने वाले महीनों में मौसम के पूर्वानुमान और वास्तविक तापमान के आधार पर अनुमान बदल सकते हैं। इसलिए इस आंकड़े को निश्चित नतीजे के बजाय संभावित जोखिम का संकेत समझना चाहिए।

गर्मी से होने वाले नुकसान को कैसे कम किया जा सकता है?

समय रहते चेतावनी जारी करना, स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखना, सार्वजनिक स्थानों पर ठंडक और पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ाना तथा खुले में काम करने वालों के लिए उचित सुरक्षा उपाय अपनाना गर्मी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब का ट्रैकर भी इसी उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि सरकारें और संबंधित संस्थाएं उन क्षेत्रों की पहचान कर सकें जहां गर्मी का खतरा अधिक हो सकता है और समय रहते संसाधनों की व्यवस्था की जा सके।