SC के फैसले के बाद CJP ने रद्द किया 5 सितंबर का प्रदर्शन, आशुतोष रांका बोले- न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन रद्द कर दिया। संगठन ने छात्रों की FIR रद्द करने और मुआवजे के निर्देश का स्वागत किया।

SC के फैसले के बाद CJP ने रद्द किया 5 सितंबर का प्रदर्शन, आशुतोष रांका बोले- न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई

सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपने विरोध प्रदर्शन को रद्द करने का ऐलान कर दिया है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द किए जाने और पीड़ित परिवारों को मुआवजे के लिए समय-सीमा तय होने के बाद फिलहाल प्रस्तावित प्रदर्शन की जरूरत नहीं है।

हालांकि, रांका ने साफ कहा कि CJP का संघर्ष यहीं समाप्त नहीं होगा। उनके अनुसार, संगठन व्यवस्था से प्रभावित और निराश हुए हर व्यक्ति के साथ खड़ा रहेगा और पूरी तरह न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाता रहेगा।

 5 सितंबर का CJP प्रदर्शन रद्द

आशुतोष रांका ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का फैसला किया है। साथ ही भविष्य में इसी मामले को लेकर नई एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने को लेकर भी अदालत के निर्देशों का हवाला दिया गया।

रांका के मुताबिक, केंद्र सरकार को NEET पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के लिए 90 दिनों की समय-सीमा भी दी गई है। इन फैसलों को देखते हुए CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रद्द करने का निर्णय लिया है।

बोले- पूरी तरह न्याय मिलने तक नहीं रुकेंगे

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने पहले बयान में रांका ने कहा कि CJP उन सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है, जो मौजूदा व्यवस्था के कारण प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि संगठन की लड़ाई केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। जब तक प्रभावित लोगों को पूरी तरह न्याय नहीं मिल जाता, तब तक CJP उनके मुद्दों को उठाती रहेगी और संघर्ष जारी रहेगा।

 सीकर में पीड़ित छात्र के परिवार से मिलने की बात

आशुतोष रांका ने कहा कि वह सीकर में एक प्रभावित छात्र के परिवार से मिलने जाएंगे। उनका कहना है कि NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद प्रभावित हुए छात्रों और उनके परिवारों के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी गड़बड़ियों का असर केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे छात्रों और उनके परिवारों पर गहरा सामाजिक और मानसिक दबाव भी पड़ता है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने FIR पर सुनाया अहम फैसला

देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच CJP के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर अहम फैसला सुनाया।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए इन शक्तियों का प्रयोग किया जा रहा है।

पीड़ित परिवारों के मुआवजे पर भी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि NEET प्रश्नपत्र लीक मामले से प्रभावित परिवारों को तय समयसीमा के भीतर मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने इसके लिए तीन महीने यानी 90 दिन की समय-सीमा तय की।

इस फैसले के बाद CJP ने इसे छात्रों और प्रभावित परिवारों के संघर्ष की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। संगठन का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया को उसके अंतिम परिणाम तक पहुंचाना अभी भी जरूरी है।

2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में एक अहम पहलू यह भी रहा कि केंद्र सरकार की मांग पर दिल्ली पुलिस को कुछ लोगों के खिलाफ नई कार्रवाई की अनुमति दी गई। अदालत ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले बताए गए 2,873 लोगों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी।

यानी एक ओर जहां अदालत ने युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य को देखते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने का फैसला दिया, वहीं दूसरी ओर गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP के 5 सितंबर के प्रदर्शन को रद्द करने के ऐलान ने इस पूरे आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है। आशुतोष रांका का कहना है कि प्रदर्शन भले ही फिलहाल रद्द किया गया हो, लेकिन प्रभावित छात्रों और परिवारों के लिए न्याय की मांग को लेकर संगठन की लड़ाई जारी रहेगी।