जयपुर रेलवे स्टेशन से तीन बार गुजरे थे महात्मा गांधी, हर बार बढ़ता गया लोगों का उत्साह; राजस्थान में ऐसे जगी आजादी की चिंगारी

Gandhi Jayanti 2026 पर जानिए महात्मा गांधी का जयपुर रेलवे स्टेशन से जुड़ा इतिहास। बताया जाता है कि गांधीजी तीन बार जयपुर स्टेशन से गुजरे और हर बार उनसे मिलने लोगों की भीड़ उमड़ी।

जयपुर रेलवे स्टेशन से तीन बार गुजरे थे महात्मा गांधी, हर बार बढ़ता गया लोगों का उत्साह; राजस्थान में ऐसे जगी आजादी की चिंगारी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर देशभर में बापू को याद किया जा रहा है। राजस्थान में भी गांधी जयंती के मौके पर उनके विचारों, अहिंसा और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया जा रहा है। लेकिन राजस्थान से महात्मा गांधी का जुड़ाव सिर्फ आजादी के आंदोलन तक सीमित नहीं था। जयपुर रेलवे स्टेशन से जुड़ी उनकी तीन यात्राएं आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं। बताया जाता है कि गांधीजी तीन अलग-अलग मौकों पर जयपुर रेलवे स्टेशन से होकर गुजरे और हर बार उनसे मिलने के लिए लोगों की भीड़ स्टेशन पहुंची।

जयपुर रेलवे स्टेशन पर गांधीजी की स्मृति आज भी उनकी प्रतिमा और शिलालेख के जरिए दिखाई देती है। यह स्मृति उस दौर की कहानी कहती है, जब राजस्थान को राजपूताना कहा जाता था और यहां अलग-अलग रियासतों में राजशाही व्यवस्था कायम थी। ऐसे समय में गांधीजी के विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन की खबरों ने लोगों के बीच राजनीतिक जागरूकता पैदा करने में भूमिका निभाई।

पहली बार 1901 में जयपुर स्टेशन पहुंचे गांधी

गांधीजी की पहली जयपुर यात्रा 1901 से जुड़ी बताई जाती है। उस समय उनकी देशभर में वैसी पहचान नहीं बनी थी जैसी आगे चलकर हुई। हालांकि दक्षिण अफ्रीका में उनके आंदोलनों के कारण वे राजनीतिक हलकों में पहचान बनाने लगे थे।

दिल्ली से राजकोट की ओर जाते समय गांधीजी कुछ समय के लिए जयपुर रेलवे स्टेशन पर रुके। उनके जयपुर पहुंचने की खबर जैसे-जैसे लोगों को मिली, लोग स्टेशन पर उन्हें देखने के लिए पहुंचने लगे। उस समय राजस्थान की रियासतों में राजनीतिक गतिविधियों पर आज जैसी खुली सार्वजनिक भागीदारी नहीं थी। ऐसे माहौल में गांधीजी को देखने के लिए लोगों का स्टेशन पहुंचना अपने आप में खास घटना माना गया।

बताया जाता है कि उस समय गांधीजी की उम्र करीब 32 वर्ष थी। यह वह दौर था जब दक्षिण अफ्रीका में उनके संघर्ष की चर्चा भारत तक पहुंच रही थी और धीरे-धीरे उनका सार्वजनिक प्रभाव बढ़ रहा था।

1921 में पहली बार स्टेशन पर गांधीजी ने लोगों को किया संबोधित

जयपुर रेलवे स्टेशन से गांधीजी का दूसरा महत्वपूर्ण जुड़ाव 3 नवंबर 1921 का माना जाता है। उस समय वे अजमेर से दिल्ली की ओर जा रहे थे। उनके जयपुर स्टेशन पर आने की खबर लोगों तक पहुंची तो बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने स्टेशन पहुंच गए।

इस बार गांधीजी ने स्टेशन पर मौजूद लोगों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित भी किया। उनके संदेश का केंद्र अहिंसा, सामाजिक भेदभाव और स्वतंत्रता आंदोलन में जनता की भागीदारी था।

यह दौर देश के असहयोग आंदोलन का था और गांधीजी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था। इसलिए 1921 में जयपुर स्टेशन पर उनका रुकना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बन गया। लोगों के बीच स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर बढ़ती राजनीतिक चेतना का असर राजस्थान की रियासतों में भी दिखाई देने लगा।

1939 में आधी रात को उमड़ा लोगों का हुजूम

गांधीजी की जयपुर रेलवे स्टेशन से जुड़ी तीसरी यात्रा 1 मार्च 1939 की बताई जाती है। इस बार स्थिति बिल्कुल अलग थी। गांधीजी के जयपुर से गुजरने की खबर पहले ही लोगों तक पहुंच चुकी थी और देर रात उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पहुंच गए।

बताया जाता है कि रात करीब 12 बजे गांधीजी जयपुर स्टेशन से गुजरे। उन्हें देखने और सुनने के लिए लोगों की भीड़ स्टेशन पर मौजूद थी। इस दौरान गांधीजी ने लोगों को संबोधित किया और अहिंसा तथा स्वतंत्रता संघर्ष का संदेश दिया।

1901 में जहां गांधीजी को देखने के लिए सीमित संख्या में लोग स्टेशन पहुंचे थे, वहीं 1939 तक उनकी लोकप्रियता और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव इतना बढ़ चुका था कि उनके गुजरने की खबर पर बड़ी भीड़ स्टेशन पहुंचने लगी थी। यही बदलाव जयपुर और राजस्थान में बदलती राजनीतिक चेतना की कहानी भी बताता है।

राजस्थान में गांधी के विचारों का असर क्यों महत्वपूर्ण था?

उस दौर का राजस्थान आज के एकीकृत राजस्थान जैसा नहीं था। राजपूताना अनेक देशी रियासतों में विभाजित था और अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग शासकों का शासन था। सामाजिक स्तर पर रूढ़ियां, छुआछूत और सामंती व्यवस्थाएं मौजूद थीं।

ऐसे समय में गांधीजी के अहिंसा, स्वदेशी, खादी और सामाजिक समानता के विचार राजस्थान के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के लिए महत्वपूर्ण बने। राजस्थान में प्रजामंडल आंदोलनों के उभार को भी देश में चल रहे गांधी नेतृत्व वाले स्वतंत्रता संघर्ष और स्थानीय राजनीतिक जागरण से जोड़ा जाता है।

जयपुर में भी राजनीतिक जागृति का विस्तार हुआ। उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार जयपुर प्रजामंडल की स्थापना 1931 में हुई और बाद में जमनालाल बजाज तथा हीरालाल शास्त्री जैसे नेताओं के प्रयासों से इसे पुनर्गठित किया गया।

अजमेर बना गांधीवादी गतिविधियों का अहम केंद्र

गांधीजी का राजस्थान से जुड़ाव सिर्फ जयपुर रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं था। अजमेर उस समय सीधे ब्रिटिश प्रशासन के अधीन क्षेत्र था, जबकि आसपास का राजपूताना विभिन्न देशी रियासतों में बंटा हुआ था। इसी वजह से अजमेर स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना।

गांधीवादी विचारों के प्रभाव से राजस्थान में प्रजामंडल और अन्य राजनीतिक संगठनों के जरिए जनता के अधिकारों, जिम्मेदार शासन और सामाजिक सुधार के मुद्दे उठने लगे। आगे चलकर इन आंदोलनों ने राजस्थान के राजनीतिक जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जयपुर स्टेशन आज भी संभाले है गांधीजी की याद

आज जयपुर का रेलवे स्टेशन आधुनिक यातायात व्यवस्था का बड़ा केंद्र है, लेकिन स्टेशन परिसर में गांधीजी की प्रतिमा और उनसे जुड़ी स्मृति उस दौर की याद दिलाती है जब रेलवे स्टेशन सिर्फ यात्रियों के आने-जाने की जगह नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की खबरों और नेताओं से जुड़ने का भी माध्यम बनता था।

गांधीजी की जयपुर से जुड़ी ये तीन यात्राएं एक दिलचस्प बदलाव की कहानी बताती हैं—1901 में एक युवा गांधी, जिन्हें देखने के लिए लोग धीरे-धीरे स्टेशन तक पहुंचे; 1921 में वही गांधी लोगों को संबोधित कर रहे थे और 1939 तक उनके गुजरने की खबर पर बड़ी भीड़ स्टेशन पर जमा होने लगी थी।