डायलिसिस रोकने पर अड़ीं कोटा की प्रसूताएं मानीं, प्रशासन से वार्ता के बाद इलाज फिर शुरू

कोटा मेडिकल कॉलेज में किडनी प्रभावित प्रसूताओं ने प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के साथ बैठक के बाद दोबारा डायलिसिस कराने पर सहमति दे दी। जानिए पूरा मामला, किडनी ट्रांसप्लांट और मुआवजे की मांग पर क्या कहा गया।

डायलिसिस रोकने पर अड़ीं कोटा की प्रसूताएं मानीं, प्रशासन से वार्ता के बाद इलाज फिर शुरू

कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किडनी प्रभावित प्रसूताओं के इलाज को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है। प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के साथ करीब दो घंटे चली अहम बैठक के बाद सभी प्रसूताएं और उनके परिजन दोबारा डायलिसिस कराने के लिए तैयार हो गए। इसके साथ ही अस्पताल में उपचार को लेकर बना गतिरोध खत्म हो गया है।

बैठक में एडीएम सिटी विनोद कुमार, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन और एडिशनल एसपी सुभाष चंद्र मिश्रा मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रसूताओं और उनके परिजनों को इलाज की पूरी प्रक्रिया समझाई और भरोसा दिलाया कि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। आश्वासन के बाद सभी मरीजों ने डायलिसिस जारी रखने पर सहमति जताई।

किडनी ट्रांसप्लांट पर क्या कहा मेडिकल कॉलेज ने?

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होती है और इसके लिए 90 दिन बाद रजिस्ट्रेशन किया जाता है। उन्होंने कहा कि हर मरीज को ट्रांसप्लांट की आवश्यकता नहीं होती। कई मामलों में नियमित डायलिसिस और इलाज से किडनी की कार्यक्षमता में सुधार भी संभव है। जरूरत पड़ने पर नियमानुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

मुआवजे की मांग बरकरार

इलाज शुरू करने पर सहमति बनने के बावजूद प्रसूताओं के परिजनों ने आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग दोहराई। उनका कहना है कि चिकित्सा सुविधा के साथ सरकार को प्रभावित परिवारों को उचित वित्तीय मदद भी उपलब्ध करानी चाहिए।

48 घंटे की चेतावनी के बाद बढ़ा था विवाद

इससे पहले पांच में से चार प्रसूताओं ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया था। उन्होंने दो दिन पहले प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। समयसीमा पूरी होने के बाद उन्होंने डायलिसिस बंद करने का फैसला लिया और राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग भी की थी।

क्या है पूरा मामला?

प्रसूताओं और उनके परिजनों का आरोप है कि वे 4 से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हुई थीं। उनका दावा है कि उपचार के दौरान उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हो गईं, जिसके बाद से वे लगातार अस्पताल में भर्ती हैं और डायलिसिस पर निर्भर हैं। फिलहाल प्रशासन की पहल के बाद उपचार फिर से नियमित रूप से शुरू हो गया है, जबकि किडनी ट्रांसप्लांट और मुआवजे की मांग को लेकर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।