70 दिन से अस्पताल में भर्ती 5 प्रसूताओं ने डायलिसिस ठुकराया-राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु के लिए लगाई गुहार
Kota Medical College Hospital News: कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती पांच महिलाओं ने डायलिसिस कराने से इनकार कर राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की है। जानिए पूरा मामला और अस्पताल प्रशासन का पक्ष।
कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले करीब 70 दिनों से भर्ती पांच प्रसूता महिलाओं के मामले ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। इलाज के दौरान किडनी खराब होने का आरोप लगा रहीं इन महिलाओं ने अब डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने राष्ट्रपति के नाम इच्छा मृत्यु की गुहार भी लगाई है। इससे पहले परिजनों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी अवधि समाप्त होने के बाद यह कदम उठाया गया।
जानकारी के अनुसार, पिंकी और आरती का बुधवार को डायलिसिस निर्धारित था, लेकिन दोनों महिलाओं ने अस्पताल के बाहर आकर इलाज की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से मना कर दिया। उनके साथ मौजूद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अब केवल किडनी ट्रांसप्लांट ही उनकी जिंदगी बचा सकता है।
परिजनों का दावा है कि सभी महिलाएं 4 से 8 मई 2026 के बीच प्रसव के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हुई थीं। उनका आरोप है कि उपचार के दौरान उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हो गईं, जिसके बाद से वे लगातार डायलिसिस पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि पिछले दो महीने से अधिक समय से चल रहा यह इलाज शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा रहा है। साथ ही परिवारों को सामाजिक और आर्थिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, अस्पताल प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन का कहना है कि पांचों मरीजों का इलाज पूरी चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में पहले लगभग तीन महीने तक दवाओं और अन्य उपचार के जरिए किडनी की कार्यक्षमता सुधारने की कोशिश की जाती है। इसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम यह तय करती है कि किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं।
डॉ. जैन ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी मरीजों का इलाज राज्य सरकार की ओर से पूरी तरह निशुल्क कराया जा रहा है और उन पर किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं डाला जा रहा। उन्होंने कहा कि यदि परिजन चाहें तो मरीजों को अस्पताल से घर ले जा सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर डायलिसिस के लिए वापस ला सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत है तो अस्पताल प्रशासन उसके समाधान के लिए तैयार है।

