जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में रचेगा इतिहास, उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदी लेंगे सात फेरे

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषियों को विवाह की अनुमति दी है। 22 जुलाई को जेल परिसर में शादी होगी। जानिए कोर्ट ने अनुच्छेद-21 का हवाला देते हुए क्या कहा।

जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में रचेगा इतिहास, उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदी लेंगे सात फेरे

राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था में एक अनोखा और मानवीय फैसला सामने आया है। जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल (खुला बंदी शिविर) में पहली बार उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषी आपस में विवाह बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों की शादी को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनने और विवाह करने का अधिकार प्राप्त है, चाहे वह कारावास की सजा ही क्यों न काट रहा हो।

नागौर निवासी 33 वर्षीय मूलाराम अपने पड़ोसी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, जबकि मुंबई निवासी 31 वर्षीय सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा भुगत रही हैं। दोनों वर्तमान में जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में रह रहे हैं, जहां कैदियों को खेती सहित अन्य कार्य करने की अनुमति होती है।

इसी दौरान खेती के काम के दौरान दोनों की मुलाकात हुई। समय के साथ यह परिचय दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गया। दोनों ने साथ जीवन बिताने की इच्छा जताई और विवाह की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

मामले की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर शामिल थे, ने कहा कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी स्वतंत्र इच्छा से विवाह करने से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद-21 में निहित गरिमापूर्ण जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ते हुए विवाह की अनुमति प्रदान की।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, मूलाराम और सीमा का विवाह 22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल परिसर में ही संपन्न कराया जाएगा। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए समारोह को सीमित रखा गया है। शादी में पंडित सहित अधिकतम 21 लोगों को शामिल होने की अनुमति दी गई है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि विवाह का पूरा खर्च मूलाराम स्वयं वहन करेंगे।

यह फैसला केवल दो कैदियों के विवाह की अनुमति भर नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि कानून सजा के साथ-साथ व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और गरिमा की भी रक्षा करता है। मंडोर ओपन जेल में होने वाली यह शादी भारतीय न्यायिक इतिहास में एक नई मिसाल के रूप में दर्ज होगी।