सचिन पायलट बोले- शिक्षा मंत्री दें इस्तीफा, सोनम वांगचुक की मांगों पर सरकार करे संवाद

सचिन पायलट ने सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने शिक्षा, पेपर लीक, स्वास्थ्य व्यवस्था, तबादला नीति और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।

सचिन पायलट बोले- शिक्षा मंत्री दें इस्तीफा, सोनम वांगचुक की मांगों पर सरकार करे संवाद
Sachin pilot

टोंक में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वांगचुक पिछले 19-20 दिनों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया है। पायलट ने कहा कि सरकार को तुरंत संवाद शुरू कर समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देशभर में लगातार पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों से करोड़ों छात्रों का व्यवस्था पर से विश्वास उठ चुका है। कांग्रेस और राहुल गांधी इसी मुद्दे को लेकर देशव्यापी अभियान चला रहे हैं। कुछ दिन पहले इसकी शुरुआत कोटा से हुई थी और अब राहुल गांधी देहरादून में छात्रों की आवाज बुलंद कर रहे हैं। पायलट ने कहा कि शिक्षा देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण विषय है, लेकिन केंद्र सरकार न तो इस पर गंभीर है और न ही जवाबदेही तय कर रही है।

सचिन पायलट ने कहा कि सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और इस मामले में हाईकोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा है। इसके बावजूद सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संवाद और भरोसे का रास्ता अपनाए तो समाधान निकल सकता है, लेकिन केंद्र सरकार जनता के आक्रोश और युवाओं की भावनाओं की पूरी तरह अनदेखी कर रही है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए ताकि युवाओं का विश्वास दोबारा कायम हो सके।

राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पायलट ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। गर्भवती महिलाओं की मौत जैसी गंभीर घटनाओं के बावजूद केवल छोटे अधिकारियों के तबादले किए जा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल बीकानेर या कोटा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। सरकार के रवैये में संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती है और जनता का स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा टूट चुका है।

उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में शिक्षा, चिकित्सा और कानून व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण आधार होते हैं, लेकिन राजस्थान सरकार इन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। सरकार विकास और उपलब्धियों के बड़े-बड़े विज्ञापन देने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता परेशान है और मूलभूत व्यवस्थाएं लगातार कमजोर होती जा रही हैं।

सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि तबादलों के लिए स्पष्ट नीति, नियम और मापदंड होने चाहिए, लेकिन राजनीतिक हित साधने और विरोधियों को निशाना बनाने के लिए कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी की होती है और चुनाव के बाद सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। बदले की राजनीति लंबे समय तक जनता स्वीकार नहीं करती।

राजनीतिक मर्यादा पर बोलते हुए सचिन पायलट ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा और आचरण दोनों संयमित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि वैचारिक और सैद्धांतिक विरोध लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियां और सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। राजनीतिक दलों और नेताओं को समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर भी पायलट ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त तकनीकी तैयारी और वाहन कंपनियों को पूरी तरह तैयार किए इस नीति को लागू किया गया है, जिसका नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई वाहनों के इंजन प्रभावित हो रहे हैं, माइलेज कम हो रही है और आम उपभोक्ता अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करना और तेल की खपत घटाना जरूरी है, लेकिन ऐसी नीतियां वैज्ञानिक तैयारी, तकनीकी परीक्षण और जनता को विश्वास में लेकर लागू की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी मनमर्जी से फैसले थोप रही है और जनता में इसे लेकर व्यापक नाराजगी है।

पायलट ने कहा कि विपक्ष आगामी मानसून सत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेपर लीक, तबादला नीति और एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल समेत जनता से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों को मजबूती से उठाएगा।