वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2: बीकानेर के 46 सीमांत गांवों के विकास पर खर्च होंगे 138 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत बीकानेर के खाजूवाला और बज्जू क्षेत्र के 46 सीमावर्ती गांवों के विकास पर 138 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार पर विशेष फोकस रहेगा।
भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे गांव अब केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि विकास के नए मॉडल के रूप में भी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत बीकानेर जिले के खाजूवाला और बज्जू क्षेत्र के 46 सीमांत गांवों और ढाणियों के विकास के लिए करीब 138 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना, पलायन रोकना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। बीकानेर जिला प्रशासन ने प्रारंभिक एक्शन प्लान तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।
सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
योजना के तहत सीमावर्ती गांवों में सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसका लक्ष्य इन गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

सुरक्षा व्यवस्था भी होगी मजबूत
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के तहत सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती दी जाएगी। योजना में शामिल प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
सीमावर्ती गांवों में सीसीटीवी और निगरानी तंत्र का विस्तार
पुलिस और बीएसएफ चौकियों का आधुनिकीकरण
संचार नेटवर्क को मजबूत बनाना
आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी करना
संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सुविधाओं का विस्तार
रोजगार और आत्मनिर्भरता पर जोर
सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण पलायन लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहा है। योजना के तहत डेयरी, कृषि आधारित गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा।
एक गांव-एक उत्पाद' मॉडल के जरिए ग्रामीण उत्पादों को बाजार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। साथ ही युवाओं को कौशल विकास और स्वरोजगार कार्यक्रमों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत खाजूवाला और बज्जू-खालसा क्षेत्र के 46 गांवों और ढाणियों को शामिल किया गया है। इनमें आनंदगढ़, फतुवाला, सांचू, भूरासर, अक्खूसर, राववाला, अनेवाला, कब्रेवाला और कायमवाला सहित कई सीमांत गांव शामिल हैं।
2028-29 तक पूरा होगा कार्य
प्रशासन ने वर्ष 2028-29 तक सभी प्रस्तावित कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सड़क, इंटरनेट, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार से जुड़े प्रोजेक्ट प्राथमिकता के आधार पर पूरे किए जाएंगे।
राजस्थान के अन्य सीमावर्ती जिले भी होंगे शामिल
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2 के दूसरे चरण में राजस्थान के अन्य सीमावर्ती जिलों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत:
बीकानेर के 45 गांव
श्रीगंगानगर के 69 गांव
जैसलमेर के 34 गांव
बाड़मेर के 36 गांव को विकसित किया जाएगा। इस चरण के लिए कुल 6,839 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
यह योजना सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Saloni Kushwaha 
