गुरु नानक देव जी जयंती आज, मानवता, समानता और सेवा संदेश के प्रतीक
इस साल गुरु नानक जयंती 5 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है और ये गुरु नानक देव की 556वीं जयंती है। गुरुनानक जयंती तो गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है, जो कि सिक्खों का सबसे खास पर्व होता है।
जयपुर। इस साल गुरु नानक जयंती 5 नवंबर यानी आज मनाई जा रही है और ये गुरु नानक देव की 556वीं जयंती है। गुरुनानक जयंती तो गुरु पर्व के नाम से भी जाना जाता है, जो कि सिक्खों का सबसे खास पर्व होता है। इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी की करुणा, सद्भाव और सत्य की शिक्षाएं आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अब के पाकिस्तान में हुआ जन्म
सिख धर्म के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का जन्म रावी नदी के किनारे स्थित तलवण्डी नामक गांव में सन1469 की कार्तिकी पूर्णिमा को हुआ था। तलवण्डी पाकिस्तान में पंजाब प्रान्त का एक नगर है। जो (अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब) में है। गुरु ने पूरी दुनिया को समानता, भाईचारा, प्रेम और सेवा का संदेश दिया। उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि इंसान की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि जाति या धर्म से। इनके पिता का नाम मेहता कालूचन्द तथा माता का नाम तृप्ता देवी था। तलवण्डी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया। इनकी बहन का नाम नानकी था।

गुरु नानक देव जी का जीवन परिचय
गुरु नानक देव जी बचपन से ही ज्ञानवान और दयालु स्वभाव के थे। उनके पिता व्यापारी थे, जिन्होंने एक बार उन्हें व्यापार के लिए पैसे दिए। लेकिन गुरु नानक देव जी ने उस पैसे से भूखे लोगों को भोजन कराया और कहा —
“यही है सच्चा सौदा।”
उनका यह संदेश आज भी मानवता की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है।
बचपन से इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे। लड़कपन ही से ये सांसारिक विषयों से उदासीन रहा करते थे। पढ़ने-लिखने में इनका मन नहीं लगा। 7-8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया क्योंकि भगवत्प्राप्ति के सम्बन्ध में इनके प्रश्नों के आगे अध्यापक ने हार मान ली। तथा वे इन्हें ससम्मान घर छोड़ने आ गए। तत्पश्चात् सारा समय वे आध्यात्मिक चिन्तन और सत्संग में व्यतीत करने लगे। बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएँ घटीं जिन्हें देखकर गाँव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व मानने लगे। बचपन के समय से ही इनमें श्रद्धा रखने वालों में इनकी बहन नानकी तथा गांव के शासक राय बुलार प्रमुख थे।
गुरु नानक देव जी के प्रमुख उपदेश
गुरु नानक देव जी ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, भेदभाव और ऊँच-नीच को समाप्त करने का संदेश दिया। उनके तीन मुख्य सिद्धांत आज भी जीवन का आधार हैं
- नाम जपो — ईश्वर का स्मरण और ध्यान करो।
- किरत करो — ईमानदारी से मेहनत करो।
- वंड छको — जो कमाओ उसमें से ज़रूरतमंदों के साथ बाँटो।
गुरु जी ने कहा —
“ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान, सब एक ही परमात्मा की संतान हैं।”
गुरु नानक जयंती का महत्व
गुरु नानक जयंती को ‘प्रकाश पर्व’ भी कहा जाता है। इस दिन गुरुद्वारों में अखंड पाठ, नगर कीर्तन और लंगर सेवा का आयोजन किया जाता है। देशभर में श्रद्धालु गुरु जी के उपदेशों को याद करते हुए सेवा और भक्ति का भाव अपनाते हैं।
गुरु नानक देव जी के संदेश आज भी प्रासंगिक
आज जब दुनिया में तनाव, भेदभाव और हिंसा जैसी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, गुरु नानक देव जी के विचार मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने कहा था
“जब तक किसी एक व्यक्ति को भी दुख है, तब तक तुम्हारी पूजा अधूरी है।”
उनका जीवन सिखाता है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और सच्चा इंसान वही है जो दूसरों के सुख-दुख में सहभागी बनता है।

