SC का सख्त रुख, आवारा पशुओं पर लगाम लगाओ, हाईवे से हटाओ वरना...

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा पशुओं और कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि स्टेट और नेशनल हाईवे से आवारा मवेशियों और जानवरों को तुरंत हटाया जाए।

SC का सख्त रुख, आवारा पशुओं पर लगाम लगाओ, हाईवे से हटाओ वरना...

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा पशुओं और कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि स्टेट और नेशनल हाईवे से आवारा मवेशियों और जानवरों को तुरंत हटाया जाए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सार्वजनिक स्थलों पर बाड़ लगाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ—न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया—ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए बाड़ (फेंसिंग) लगाई जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार इन जगहों से आवारा पशुओं या कुत्तों को हटाने के बाद उन्हें दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाए।

शेल्टर होम में रखे जाएं जानवर

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हटाए गए सभी आवारा पशुओं को पशु आश्रय स्थल (शेल्टर होम) में स्थानांतरित किया जाए। इसके लिए पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 के तहत नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया अनिवार्य होगी। कोर्ट ने स्थानीय निकायों (नगर निगमों और पंचायतों) को आदेश दिया कि वे ऐसे सार्वजनिक स्थलों की नियमित निगरानी करें ताकि दोबारा कोई जानवर सड़क पर न छोड़ा जाए।

मुख्य सचिवों को 8 हफ्तों में रिपोर्ट सौंपने का आदेश

शीर्ष अदालत ने कहा कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और 8 हफ्तों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

कोर्ट ने जताई नाराजगी

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आवारा पशुओं से जुड़ी घटनाओं के कारण जन सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। कोर्ट ने कहा— “हम लगातार ऐसी खबरें पढ़ रहे हैं जो न केवल आम जनता की सुरक्षा से जुड़ी हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को भी प्रभावित करती हैं।” इससे पहले भी अदालत ने ABC नियमों के क्रियान्वयन में खामियों पर असंतोष व्यक्त किया था और राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।