सनी देओल की अंडररेटेड फिल्में: दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जादू

सनी देओल की कई दमदार फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा पाईं, लेकिन आज भी उन्हें अंडररेटेड और कल्ट क्लासिक माना जाता है।

सनी देओल की अंडररेटेड फिल्में: दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर नहीं चला जादू
Sunny deol

सनी देओल इन दिनों अपनी फिल्म बॉर्डर 2 को लेकर चर्चा में हैं। इससे पहले गदर 2 ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर उनके करियर को नई ऊंचाई दी। एक्शन और देशभक्ति के किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले सनी देओल ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दी हैं। हालांकि, उनकी कुछ ऐसी फिल्में भी रहीं जो कंटेंट और अभिनय के मामले में मजबूत थीं, लेकिन टिकट खिड़की पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। आज उन्हीं फिल्मों पर एक नजर डालते हैं जिन्हें समय के साथ अंडररेटेड माना जाने लगा।

अर्जुन पंडित (1999)

इस फिल्म में सनी देओल का इंटेंस और इमोशनल किरदार देखने को मिला था। रिलीज के समय फिल्म खास कमाई नहीं कर पाई, लेकिन बाद में इसे कल्ट फॉलोइंग मिली। कहानी और सनी की परफॉर्मेंस को आज भी सराहा जाता है।

यतीम (1988)

जेपी दत्ता के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सनी देओल ने संवेदनशील भूमिका निभाई थी। मजबूत कहानी और अभिनय के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा असर नहीं छोड़ पाई।

सलाखें (1998)

एक्शन-ड्रामा से भरपूर इस फिल्म में सनी अपने एंग्री यंग मैन अंदाज में नजर आए। हालांकि दर्शकों से वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिला जैसा उम्मीद थी और फिल्म फ्लॉप साबित हुई।

द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई (2003)

बड़े बजट और इंटरनेशनल लोकेशंस पर बनी यह फिल्म अपने समय की महंगी फिल्मों में गिनी जाती थी। अच्छी कमाई के बावजूद लागत के मुकाबले प्रदर्शन कमजोर रहा। आज इसे एक अंडररेटेड स्पाई थ्रिलर माना जाता है।

घायल: वन्स अगेन (2016)

सुपरहिट घायल का सीक्वल होने के कारण इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं। फिल्म में एक्शन और इमोशन दोनों थे, लेकिन यह पहले पार्ट जैसा असर नहीं छोड़ पाई।

मोहल्ला अस्सी (2018)

वाराणसी की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाती है। विवादों के चलते रिलीज में देरी हुई और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी।

ब्लैक

इस फिल्म में सनी देओल का अपेक्षाकृत शांत और संयमित अंदाज देखने को मिला। हालांकि फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नाकाम रही।