अरब सागर से सीधा जुड़ेगा राज्य, जालोर में बनेगा इनलैंड पोर्ट, राजस्थान को मिलेगी बड़ी उपलब्धि

राजस्थान अब समुद्री व्यापार के नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है, जिसके तहत अरब सागर से राजस्थान का सीधा जलमार्गीय कनेक्शन स्थापित होगा।

अरब सागर से सीधा जुड़ेगा राज्य, जालोर में बनेगा इनलैंड पोर्ट, राजस्थान को मिलेगी बड़ी उपलब्धि

जयपुर। राजस्थान अब समुद्री व्यापार के नए युग में प्रवेश करने जा रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है, जिसके तहत अरब सागर से राजस्थान का सीधा जलमार्गीय कनेक्शन स्थापित होगा। जल संसाधन मंत्री डॉ. सुरेश सिंह रावत के अथक प्रयासों से यह सपना साकार होने की कगार पर है। जालोर जिले में प्रस्तावित इनलैंड पोर्ट के माध्यम से राज्य में पानी के जहाज चलेंगे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के द्वार खुलेंगे। यह परियोजना न केवल राज्य को भूमिबद्ध होने की बाधा से मुक्त करेगी, बल्कि आर्थिक विकास की नई गति प्रदान करेगी।

राजस्थान को समुद्री पहुंच का नया द्वार

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत जालोर में विकसित होने वाले इनलैंड पोर्ट से कांडला पोर्ट (गुजरात) तक सीधा जलमार्ग स्थापित होगा। इंडस्ट्रियल पावर कॉरिडोर के अंतर्गत यह परियोजना 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निवेश पर आधारित है। लगभग 262 किलोमीटर लंबा यह जलमार्ग अरब सागर के किनारे से शुरू होकर जालोर तक विस्तारित होगा, जिससे माल ढुलाई तेज, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल बनेगी।

मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया, "यह परियोजना जालोर, बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों में उद्योगों के लिए नई संभावनाएं खोलेगी। टेक्सटाइल, पत्थर, कृषि उत्पादों, तिलहन, ग्वार, दालों और बाजरे जैसे उत्पादों का निर्यात आसान होगा। इसके अलावा, पचपदरा (बालोतरा) में चल रहे एचपीसीएल-राजस्थान ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट को भी इससे तेज गति मिलेगी।" परियोजना के सफल होने पर राज्य को लैंडलॉक्ड स्टेट की छवि से मुक्ति मिलेगी और समुद्री व्यापार में सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

आर्थिक क्रांति और रोजगार के अवसर

यह इनलैंड पोर्ट राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। अनुमान के अनुसार, इससे 50 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। स्थानीय युवाओं को लॉजिस्टिक्स, कार्गो हैंडलिंग, शिपिंग और संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण और नौकरियां मिलेंगी। इसके साथ ही, कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, जिससे उद्योगों की उत्पादकता बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा, "विकसित राजस्थान का विजन अब हकीकत बन रहा है। यह परियोजना न केवल आर्थिक विकास का प्रतीक है, बल्कि राज्य के हर कोने तक समृद्धि पहुंचाने का माध्यम बनेगी। केंद्र सरकार का सहयोग और हमारी टीम के प्रयासों से यह सपना साकार हो रहा है।"

परियोजना का इतिहास और वर्तमान स्थिति

यह विचार वर्षों पुराना है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे गति दी है। 2015 में तत्कालीन सरकार ने भी जालोर में कृत्रिम इनलैंड पोर्ट की संभावना तलाशी थी, जिसमें गुजरात के कच्छ क्षेत्र से नहर बनाकर अरब सागर का पानी लाने का प्रस्ताव था। हालांकि, कुछ तकनीकी चुनौतियों के कारण यह रुका रहा। अब, मुख्यमंत्री शर्मा के नेतृत्व में नई योजना के तहत डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) और केंद्र सरकार का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।

परियोजना में न्यूनतम 3 मीटर ड्राफ्ट वाली नहर का निर्माण होगा, जो मौजूदा नदियों और चेरास (लूनी नदी) का उपयोग करेगी। कांडला पोर्ट से जहाजों का सीधा आवागमन सुनिश्चित होगा, जिससे माल ढुलाई की लागत 30-40 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन भी प्राथमिकता पर है, ताकि स्थानीय पारिस्थितिकी संरक्षित रहे।

राजस्थान का समुद्री कनेक्टिविटी क्रांति

इस परियोजना से राजस्थान न केवल गुजरात के कांडला पोर्ट से जुड़ेगा, बल्कि अन्य प्रमुख बंदरगाहों के साथ भी लिंकेज बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि के साथ, राज्य का निर्यात लक्ष्य दोगुना हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान को औद्योगिक हब में बदल देगी, जहां चूना पत्थर, जिप्सम, लिग्नाइट और सीमेंट जैसे खनिजों का परिवहन आसान होगा।

राजस्थान सरकार ने घोषणा की है कि परियोजना का शिलान्यास अगले कुछ महीनों में होगा, और पूर्ण कार्यान्वयन 2027 तक लक्षित है। यह कदम 'विकसित भारत' के संकल्प के अनुरूप है, जहां हर राज्य को अपनी क्षमता के अनुरूप अवसर मिलें।