दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की सात दिवसीय श्रीकृष्ण कथा, साध्वी कालिंदी भारती करेंगी कथा वाचन
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीकृष्ण कथा महोत्सव का शुभारंभ 14 नवंबर से होगा। कथा प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक आयोजित की जाएगी। यह कथा गोकुलधाम ढाब, गणेश मंदिर के पास आयोजित होगी।
सूरतगढ़। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीकृष्ण कथा महोत्सव का शुभारंभ 14 नवंबर से होगा। कथा प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक आयोजित की जाएगी। यह कथा गोकुलधाम ढाब, गणेश मंदिर के पास आयोजित होगी। कथा से एक दिन पूर्व 13 नवंबर को भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी, जो आनंद विहार कॉलोनी से सुबह 10 बजे प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल पर पहुंचेगी।
प्रेस वार्ता में दी गई जानकारी
कथा के आयोजन को लेकर दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान संस्थान की शाखा प्रबंधक साध्वी मोनिका भारती जी, साध्वी मंजीत भारती जी, श्री बलमीत सिंह जी, श्रीमती बलजिंदर जी और नूरमहल (पंजाब) आश्रम से आए स्वामी प्रेम प्रकाशानंद जी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि संस्थान न केवल आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, बल्कि समाज में कई सेवा एवं जागरूकता प्रकल्प भी संचालित कर रहा है।

सामाजिक सेवा और जागृति के प्रकल्प
संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि कथा के साथ-साथ संस्थान समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं को दूर करने के लिए सक्रिय है। साध्वी मोनिका भारती जी ने कहा “संस्थान का उद्देश्य है समाज में नैतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जागरूकता लाना। हम युवाओं को नशे से दूर करने, नारी शक्ति को उनके आंतरिक सामर्थ्य से परिचित कराने और दिव्यांग बच्चों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्यरत हैं।” स्वामी प्रेम प्रकाशानंद जी ने कहा कि “कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाला ज्ञान पर्व है।”
मंगल कलश यात्रा
कथा से एक दिन पूर्व 13 नवंबर को सुबह 10:00 बजे आनंद विहार कॉलोनी स्थित शाखा कार्यालय से भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कथा स्थल गोकुलधाम ढाब, गणेश मंदिर के पास पहुंचेगी।
कथा के बाद प्रसाद एवं रात्रि भोजन की व्यवस्था
संस्थान की ओर से बताया गया कि कथा के प्रत्येक दिन के समापन के पश्चात भक्तों के लिए रात्रि भोजन (भंडारा) की व्यवस्था की गई है। संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं और नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने परिवार सहित कथा में सम्मिलित होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें।

