राजस्थान के नए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संभाला पदभार, सुधांश पंत को विदाई
राजस्थान की नौकरशाही में बड़ा बदलाव आ गया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वी. श्रीनिवास ने सोमवार को औपचारिक रूप से मुख्य सचिव का पदभार संभाल लिया। 1989 बैच के राजस्थान कैडर के ये अधिकारी केंद्र सरकार से अपनी डेपुटेशन ड्यूटी समाप्त कर राज्य लौटे हैं।
जयपुर। राजस्थान की नौकरशाही में बड़ा बदलाव आ गया है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी वी. श्रीनिवास ने सोमवार को औपचारिक रूप से मुख्य सचिव का पदभार संभाल लिया। 1989 बैच के राजस्थान कैडर के ये अधिकारी केंद्र सरकार से अपनी डेपुटेशन ड्यूटी समाप्त कर राज्य लौटे हैं। निवर्तमान मुख्य सचिव सुधांशु पंत ने उन्हें पद सौंपा, जिन्हें केंद्र सरकार ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में सचिव के पद पर भेजा है। श्रीनिवास का कार्यकाल सितंबर 2026 तक रहेगा, जब वे सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करेंगे।
पदभार ग्रहण करने के बाद श्रीनिवास ने पत्रकारों से बातचीत में राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य फोकस अंतर-विभागीय समन्वय पर होगा, ताकि शासन की योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सके। यह नियुक्ति सुधांशु पंत के अचानक केंद्र वापसी के बाद हुई, जो 30 नवंबर को रिटायर होने वाले थे। श्रीनिवास को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से दिल्ली में मुलाकात के बाद यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
केंद्र से लौटे वरिष्ठ अधिकारी
वी. श्रीनिवास आंध्र प्रदेश/तेलंगाना के मूल निवासी हैं, लेकिन राजस्थान कैडर के सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शुमार हैं। वे 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और राज्य कैडर में सुबोध अग्रवाल (1988 बैच) के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ हैं। केंद्र में वे प्रशासनिक सुधार, लोक शिकायत एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग (DARPG) के सचिव के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा, पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राजस्थान सरकार ने 14 नवंबर को केंद्र को श्रीनिवास की सेवाओं की मांग की थी, जिसे DoPT ने स्वीकृति दे दी। 15 नवंबर को केंद्र ने उन्हें रिलीज कर दिया, और 16 नवंबर को राज्य सरकार ने औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी किया। श्रीनिवास को अतिरिक्त रूप से राजस्थान राज्य खान एवं भूवैज्ञानिक निगम लिमिटेड के चेयरमैन और नई दिल्ली में मुख्य रेजिडेंट आयुक्त का भी दायित्व सौंपा गया है। उनके पास रासायनिक इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की डिग्री है, जो उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में प्राप्त की।
निवर्तमान मुख्य सचिव सुधांशु पंत का कार्यकाल अप्रत्याशित रूप से समाप्त हुआ। केंद्र ने उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अमित यादव की जगह भेजा, जो 30 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। पंत ने श्रीनिवास को हैंडओवर-टेकओवर प्रक्रिया में राज्य के प्रमुख मुद्दों की जानकारी दी, जिसमें चल रही योजनाओं और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा शामिल थी।
समन्वय, नवाचार और विकास पर जोर
पदभार संभालते ही श्रीनिवास ने अपनी प्राथमिकताओं को साझा किया। उन्होंने कहा, "राजस्थान विजन 2047 को जमीन पर उतारना मेरी पहली प्राथमिकता होगी।" उनका मुख्य उद्देश्य सभी विभागों के बीच बेहतर को-ऑर्डिनेशन स्थापित करना है, जिससे शासन की योजनाओं और निर्णयों को तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
श्रीनिवास ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रायोरिटी सेक्टर प्रोग्राम्स को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इनके क्रियान्वयन पर निरंतर प्रयास होगा। विशेष रूप से, कृषि, आईजीएनपी (इंदिरा गांधी नहर परियोजना), वाटरशेड डेवलपमेंट और सामाजिक क्षेत्रों में नवाचार पर फोकस रहेगा। उन्होंने जोर दिया कि हेल्थ फॉर ऑल कार्यक्रम को मजबूत बनाना जरूरी है।
शिक्षा के क्षेत्र में 2022 में शुरू की गई नई शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। श्रीनिवास ने कहा कि राइजिंग राजस्थान सम्मेलन में सामने आए कई महत्वपूर्ण नवाचार और एमओयू पर अब काम तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। विकसित राजस्थान के बिग थ्रस्ट एरिया – गरीब, अन्नदाता (किसान), महिला और युवा – को प्राथमिकता देते हुए नीतियों को लागू करना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी।
अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन में अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत बनाना आगामी कार्यकाल का प्रमुख फोकस रहेगा। श्रीनिवास ने अपने जिला कलेक्टर के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि ये नई जिम्मेदारी में उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने नवाचार और सुधारों के जरिए प्रदेश के विकास को नई दिशा देने का संकल्प लिया।
छोटा लेकिन प्रभावी कार्यकाल
श्रीनिवास का कार्यकाल लगभग 10 महीने का है, लेकिन उनकी केंद्र स्तर की विशेषज्ञता से राज्य के प्रशासनिक सुधारों को गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में ई-गवर्नेंस और पेंशन सुधार जैसे क्षेत्रों में प्रगति होगी। यह नियुक्ति राज्य सरकार की 'विकसित राजस्थान' विजन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

