नेपाल की सुरंगों में जिंदगी की जंग! फंसे लोगों को बचाने चीन ने भेजे एक्सपर्ट, भारत भी मदद के लिए तैयार

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों के रेस्क्यू के लिए चीन ने 5-6 सुरंग विशेषज्ञ भेजे हैं। चीनी टीम नेपाली सेना के साथ अपर त्रिशूली-3बी परियोजना में बचाव अभियान चलाएगी।

नेपाल की सुरंगों में जिंदगी की जंग! फंसे लोगों को बचाने चीन ने भेजे एक्सपर्ट, भारत भी मदद के लिए तैयार

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी से जुड़ी बाढ़ और उसके असर के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं के भूमिगत ढांचे प्रभावित हुए हैं। सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जो कुछ परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे हुए बताए जा रहे हैं।

इस मुश्किल ऑपरेशन के लिए अब चीन ने नेपाल की मदद के लिए अपने सुरंग विशेषज्ञ भेजे हैं। नेपाल सरकार के अनुरोध पर चीन के तिब्बत क्षेत्र से विशेषज्ञों की एक तकनीकी टीम हेलीकॉप्टर के जरिए नेपाल पहुंची है। यह टीम नेपाली सेना के विशेषज्ञों के साथ मिलकर रसुवा स्थित अपर त्रिशूली 3 बी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में बचाव अभियान में तकनीकी सहयोग करेगी।

सुरंग के भीतर चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन

29 अगस्त 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक चीन की विशेषज्ञ टीम में करीब 5 से 6 सुरंग विशेषज्ञ शामिल हैं। इन्हें खासतौर पर ऐसे जटिल भूमिगत बचाव अभियानों का अनुभव है, जहां पानी, मलबे और क्षतिग्रस्त ढांचे के बीच फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

अब चीनी विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ संयुक्त रूप से स्थिति का आकलन करेंगे। सुरंग के भीतर पानी और मलबे की स्थिति, सुरक्षित प्रवेश मार्ग और फंसे लोगों तक पहुंचने की संभावनाओं का तकनीकी स्तर पर परीक्षण किया जाएगा।

बचाव दल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बाढ़ के बाद सुरंगों और आसपास के इलाकों की स्थिति सामान्य नहीं है। ऐसे में किसी भी अभियान को आगे बढ़ाने से पहले ढांचे की सुरक्षा और बचावकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

त्रिशूली क्षेत्र में बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें

नेपाल के रसुवा के साथ नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भी बाढ़ का असर पड़ा है। कई जलविद्युत परियोजनाओं और उनके आसपास बने भूमिगत ढांचों पर इसका प्रभाव पड़ा, जिसके बाद वहां काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा चिंता का विषय बन गई।

राहत अभियान के दौरान त्रिशूली-1 परियोजना क्षेत्र से करीब 350 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि अन्य प्रभावित परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान जारी है।

यही वजह है कि नेपाल ने सामान्य राहत और बचाव से अलग, उन विशेष तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांगा है, जहां अत्यधिक विशेषज्ञता और विशेष उपकरणों की जरूरत है।

चीन ने सिर्फ विशेषज्ञ ही नहीं, राहत सहायता भी भेजी

नेपाल की मदद के लिए चीन ने सुरंग विशेषज्ञों की टीम भेजने के साथ ही आर्थिक और मानवीय सहायता देने की भी घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार चीन की ओर से नेपाल को 20 लाख डॉलर की नकद सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

इसके अलावा आवश्यक आपातकालीन राहत सामग्री भेजने की भी तैयारी है। बताया जा रहा है कि दो सैन्य कार्गो विमानों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों के लिए जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा सकती है।

चीन की यह सहायता ऐसे समय में आई है, जब नेपाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे को बहाल करने की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है।

नेपाल ने क्यों मांगी सिर्फ तकनीकी मदद?

नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, नेपाल को सामान्य सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बाहरी बचाव बलों की व्यापक जरूरत नहीं है।

नेपाल ने विदेशी देशों से खासतौर पर उन क्षेत्रों में सहायता मांगी है, जहां विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता है। इनमें सुरंगों में जटिल बचाव अभियान, बेली ब्रिज का निर्माण, त्वरित डीएनए मैपिंग और फोरेंसिक जांच जैसे काम शामिल हैं।

यानी नेपाल का फोकस विदेशी टीमों को सामान्य राहत कार्य में लगाने के बजाय उनकी विशेष तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करने पर है।

भारत भी नेपाल के साथ, तकनीकी और सैन्य मदद की तैयारी

इस आपदा में भारत ने भी नेपाल को मदद पहुंचाई है। भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने के साथ प्रभावित इलाकों में तकनीकी सहयोग की तैयारी की गई है।

बेली ब्रिज निर्माण में विशेषज्ञ तकनीकी और सैन्य टीमों को भी मदद के लिए तैयार रखा गया है। सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने की जरूरत पड़ने पर भारत के सुरंग विशेषज्ञों की क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जटिल और संकरे इलाकों में बचाव अभियानों के लिए भारत के विशेष तकनीकी अनुभव पर भी चर्चा हो रही है। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित विशेषज्ञों और विशेष बचाव तकनीकों की मदद से अभियान को मजबूत किया जा सकता है।

अब सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती

नेपाल के लिए इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता उन सभी प्रभावित लोगों तक सुरक्षित पहुंचना है, जो बाढ़ के कारण कटे हुए या भूमिगत क्षेत्रों में फंसे हैं। अपर त्रिशूली 3 बी परियोजना में चलने वाला अभियान इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि यहां सामान्य बचाव ऑपरेशन के बजाय विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है।

चीनी सुरंग विशेषज्ञों और नेपाली सेना के संयुक्त अभियान से बचाव कार्य को नई तकनीकी मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं भारत की ओर से भी राहत और विशेषज्ञ सहायता की तैयारी नेपाल के लिए अतिरिक्त सहयोग साबित हो सकती है।

फिलहाल नेपाल की नजर मौसम, जलस्तर और प्रभावित सुरंगों की स्थिति पर टिकी है। आने वाले घंटों में तकनीकी टीमों की जांच और रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति से साफ होगा कि सुरंगों में फंसे लोगों तक बचाव दल कितनी जल्दी पहुंच पाता है।