RGHS घोटालों के बाद बड़ा बदलाव: अब डॉक्टर की अपनी मुहर और हस्ताक्षर के बिना मान्य नहीं होगी पर्ची

RGHS में अनियमितताओं के बाद राजस्थान सरकार ने मेडिकल प्रेस्क्रिप्शन के सत्यापन के नियम सख्त कर दिए हैं। अब संबंधित डॉक्टर को पर्ची पर खुद हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर लगाकर उसे प्रमाणित करना होगा।

RGHS घोटालों के बाद बड़ा बदलाव: अब डॉक्टर की अपनी मुहर और हस्ताक्षर के बिना मान्य नहीं होगी पर्ची

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में सामने आई अनियमितताओं के बाद अब सरकार ने इलाज और मेडिकल प्रेस्क्रिप्शन की प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। नई व्यवस्था के तहत मरीज की पर्ची का सत्यापन अब संबंधित डॉक्टर को खुद करना होगा। केवल डॉक्टर के नाम से पर्ची जारी होना पर्याप्त नहीं माना जाएगा, बल्कि उस पर संबंधित चिकित्सक के हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर भी जरूरी होगी।

RGHS प्रशासन ने साफ किया है कि पर्ची को अंतिम रूप से प्रमाणित करने की जिम्मेदारी उस डॉक्टर की होगी, जिसके नाम से इलाज और चिकित्सा परामर्श दर्ज किया गया है। यदि डॉक्टर की जगह किसी जूनियर रेजिडेंट, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर पाए जाते हैं तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

यह बदलाव RGHS में सामने आए घोटालों और जांच के दौरान मिली अनियमितताओं के बाद किया गया है।

जांच में पर्चियों को लेकर सामने आई थी बड़ी गड़बड़ी

RGHS से जुड़े मामलों की जांच के दौरान मेडिकल प्रेस्क्रिप्शन की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए थे। कई मामलों में ऐसी पर्चियां सामने आईं, जिन पर उस संबंधित डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं थे जिसके नाम से इलाज या परामर्श दर्ज किया गया था।

जांच में कुछ पर्चियों पर जूनियर रेजिडेंट या अन्य कार्मिकों के हस्ताक्षर पाए जाने की बात सामने आई। ऐसे में यह सवाल उठा कि जिस चिकित्सक के नाम से इलाज दर्ज किया गया, क्या उसने वास्तव में मरीज की पर्ची और उसमें दर्ज उपचार को स्वयं सत्यापित किया था।

इसी खामी को दूर करने और जवाबदेही तय करने के लिए अब सेल्फ-वेरिफिकेशन की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है।

अब डॉक्टर को खुद जांचनी होगी हर पर्ची

नई व्यवस्था के अनुसार RGHS से जुड़े एम्पैनल्ड डॉक्टर को मरीज की पर्ची को स्वयं जांचना होगा। इलाज, दवा और अन्य संबंधित विवरणों की पुष्टि करने के बाद ही डॉक्टर अपने हस्ताक्षर और मुहर के साथ उसे प्रमाणित करेगा।

इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेडिकल प्रेस्क्रिप्शन केवल औपचारिक दस्तावेज न रहे, बल्कि संबंधित चिकित्सक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी के तहत जारी हो।

अब अस्पतालों को भी इस प्रक्रिया का सख्ती से पालन कराना होगा। पर्ची तैयार करने, उसकी जांच करने और अंतिम सत्यापन के बीच किसी तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

जूनियर रेजिडेंट या कर्मचारी के हस्ताक्षर पर उठेंगे सवाल

RGHS ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर की जगह किसी अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर स्वीकार्य नहीं होंगे। यानी यदि पर्ची किसी एम्पैनल्ड डॉक्टर के नाम से जारी की गई है तो उसका सत्यापन भी उसी डॉक्टर को करना होगा।

जूनियर रेजिडेंट, सहायक या किसी अन्य कर्मचारी द्वारा डॉक्टर की जगह पर्ची पर हस्ताक्षर किए जाने की स्थिति में कार्रवाई हो सकती है।

इस व्यवस्था का मकसद केवल दस्तावेजी प्रक्रिया को बदलना नहीं, बल्कि इलाज और RGHS के तहत होने वाले दावों में पारदर्शिता बढ़ाना भी है।

 डॉक्टर की जवाबदेही होगी और ज्यादा स्पष्ट

नई व्यवस्था के बाद किसी भी पर्ची को लेकर जवाबदेही सीधे संबंधित डॉक्टर तक तय की जा सकेगी। डॉक्टर के हस्ताक्षर और मुहर यह प्रमाणित करेंगे कि उसने मरीज से जुड़े दस्तावेज और उपचार संबंधी जानकारी का स्वयं सत्यापन किया है।

इससे भविष्य में किसी पर्ची की जांच होने पर यह स्पष्ट रहेगा कि उसका अंतिम अनुमोदन किस चिकित्सक ने किया था।

RGHS व्यवस्था में अस्पतालों और डॉक्टरों की भूमिका पहले से ही महत्वपूर्ण है, लेकिन घोटालों की जांच के बाद अब व्यक्तिगत सत्यापन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

घोटालों के बाद व्यवस्था में कसावट

राजस्थान में RGHS से जुड़ी अनियमितताओं के सामने आने के बाद सरकार और योजना प्रशासन लगातार निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। अब पर्चियों के सत्यापन से जुड़े नियमों में बदलाव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

मकसद यह है कि इलाज, दवाओं और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े हर दस्तावेज की जिम्मेदारी स्पष्ट रहे और किसी भी स्तर पर गलत जानकारी या अनधिकृत सत्यापन की गुंजाइश कम की जा सके।

नई प्रक्रिया से अस्पतालों को भी अपने आंतरिक सिस्टम में बदलाव करना पड़ सकता है ताकि डॉक्टर के व्यक्तिगत सत्यापन के बाद ही RGHS से संबंधित पर्चियां आगे की प्रक्रिया के लिए भेजी जाएं।

RGHS परियोजना अधिकारी ने दी जानकारी

RGHS परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल के अनुसार, अब संबंधित डॉक्टर का सेल्फ-वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। एम्पैनल्ड चिकित्सक को अपने हस्ताक्षर और मुहर के साथ मरीज की पर्ची प्रमाणित करनी होगी।

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद डॉक्टर के नाम से जारी होने वाली हर पर्ची में उसके प्रत्यक्ष सत्यापन को महत्वपूर्ण माना जाएगा।

कुल मिलाकर, RGHS में घोटालों के बाद सरकार ने मेडिकल दस्तावेजों की जवाबदेही को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब डॉक्टर की जगह किसी दूसरे व्यक्ति के हस्ताक्षर से पर्ची का सत्यापन करने पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। ऐसे में अस्पतालों और एम्पैनल्ड चिकित्सकों को नई प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना होगा।