रसोई की हींग पर बड़ा एक्शन! Everest के सैंपल जांच में फेल, FSSAI ने बिक्री पर लगाई रोक

FSSAI ने गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाए जाने के बाद Everest Food Products की कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। जांच में कई सैंपल सब-स्टैंडर्ड और मिसब्रांडेड मिले।

रसोई की हींग पर बड़ा एक्शन! Everest के सैंपल जांच में फेल, FSSAI ने बिक्री पर लगाई रोक

रसोई में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाली हींग को लेकर खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में तय गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं होने के बाद Everest Food Products की कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया गया है।

FSSAI की जांच में कंपनी के कुछ हींग सैंपल सब-स्टैंडर्ड और मिसब्रांडेड पाए गए। जांच में सबसे प्रमुख गड़बड़ी उत्पाद में मौजूद अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट की मात्रा को लेकर सामने आई। कई नमूनों में इसकी मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई।

नियामक ने कंपनी को मामले में जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने और आगे की कार्रवाई के लिए एक्शन प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी।

आखिर जांच में क्या मिला?

FSSAI के अनुसार सरकारी प्रयोगशालाओं में कंपाउंडेड हींग के अलग-अलग सैंपलों की जांच की गई। जांच के दौरान कुछ नमूने गुणवत्ता और लेबलिंग से जुड़े निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।

कंपाउंडेड हींग के लिए अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट की न्यूनतम मात्रा 5 फीसदी होनी चाहिए। लेकिन जांच में एक नमूने में यह मात्रा शून्य पाई गई।

वहीं अन्य नमूनों में भी निर्धारित स्तर से कम मात्रा दर्ज की गई। पीली हींग के एक सैंपल में यह 3.29 फीसदी और काली हींग के एक नमूने में 4.4 फीसदी पाई गई। यानी जांच में सामने आए ये सभी नमूने तय 5 फीसदी के मानक से नीचे थे।

क्या है अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट, क्यों है इतना अहम?

इस मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि बाजार में बिकने वाली कंपाउंडेड हींग पूरी तरह शुद्ध हींग नहीं होती। इसमें असली हींग के अलावा आटा, स्टार्च और अन्य स्वीकृत सामग्री भी मिलाई जा सकती है।

अल्कोहल सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट एक ऐसा गुणवत्ता मानक है, जिससे उत्पाद में मौजूद हींग के घुलनशील तत्वों की मात्रा का आकलन किया जाता है। नियामकीय मानकों के अनुसार कंपाउंडेड हींग में इसकी न्यूनतम मात्रा तय की गई है।

इसी वजह से जब किसी नमूने में यह मात्रा निर्धारित सीमा से काफी कम मिलती है तो उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। एक सैंपल में इसका शून्य प्रतिशत मिलना जांच के दौरान सामने आई सबसे बड़ी खामियों में शामिल रहा।

Everest की सभी संबंधित कंपाउंडेड हींग पर रोक

FSSAI ने इस कार्रवाई के तहत Everest Food Products की कंपाउंडेड हींग की बिक्री को अगले आदेश तक रोकने के निर्देश दिए हैं। कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में बाजार में भेजे जाने वाले उत्पाद सभी निर्धारित खाद्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों।

नियामक ने कंपनी से सुधारात्मक कार्रवाई की योजना मांगी है। कंपनी को बताना होगा कि जांच में सामने आई कमियों को कैसे दूर किया जाएगा और आगे ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

यदि जवाब और सुधारात्मक कार्रवाई संतोषजनक नहीं पाई जाती है तो आगे नियमानुसार अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।

पहले भी दूसरे उत्पादों को लेकर सामने आई थीं खामियां

FSSAI के आदेश में कंपनी के कुछ अन्य उत्पादों से जुड़ी पुरानी शिकायतों और कमियों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें चिकन मसाला, गरम मसाला और एग करी पाउडर जैसे उत्पादों में लेबलिंग से संबंधित मुद्दों का जिक्र है।

नियामक के मुताबिक अलग-अलग स्थानों से लिए गए हींग के सैंपलों की जांच में एक जैसी गुणवत्ता संबंधी समस्या बार-बार सामने आई। कई नमूनों में अल्कोहलिक एक्सट्रैक्ट निर्धारित न्यूनतम स्तर 5 फीसदी से कम पाया गया।

यही कारण है कि FSSAI ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल रोक लगाने का फैसला किया।

 2024 में भी विवादों में आया था मसाला ब्रांड

Everest के कुछ मसाला उत्पादों को लेकर 2024 में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे। हांगकांग और सिंगापुर में कुछ भारतीय मसाला उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड की मौजूदगी को लेकर जांच और कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं।

इसके बाद भारत में भी मसालों के नमूनों की जांच की गई थी। हालांकि वर्तमान कार्रवाई उससे अलग है। इस बार मामला हींग की गुणवत्ता और कंपाउंडेड हींग के लिए तय मानकों का पालन न होने से जुड़ा है।

लालजी गोधू एंड कंपनी पर भी कार्रवाई

FSSAI की कार्रवाई केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। नियामक ने लालजी गोधू एंड कंपनी की कंपाउंडेड हींग के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए हैं।

जांच में कंपनी के उत्पादों के नमूने भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके अलावा कंपाउंडेड हींग तैयार करने में इस्तेमाल की जाने वाली कच्ची हींग की कुछ किस्मों में स्टार्च की मात्रा तय सीमा से अधिक मिलने की बात सामने आई।

FSSAI के अनुसार यह समस्या किसी एक बैच तक सीमित नहीं थी, बल्कि अलग-अलग बैचों की जांच में भी इसी तरह की खामियां सामने आईं। इसके बाद कंपनी की कंपाउंडेड हींग की मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगाने का फैसला किया गया।

 अब आगे क्या होगा?

अब दोनों कंपनियों को FSSAI के निर्देशों के अनुसार गुणवत्ता संबंधी कमियों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे। नियामक आगे कंपनियों की ओर से दी जाने वाली जानकारी और सुधारात्मक कार्रवाई की समीक्षा कर सकता है।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कंपनियां अपनी निर्माण प्रक्रिया और उत्पादों की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के अनुरूप कैसे सुनिश्चित करती हैं।

फिलहाल FSSAI की इस कार्रवाई ने रोजमर्रा की रसोई में इस्तेमाल होने वाली हींग की गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उपभोक्ताओं के लिए भी यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और तय मानकों का पालन सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।