पीपलू में दशरथ सिंह राजावत के निर्दलीय ऐलान से सियासी हलचल, समर्थकों ने खोला मोर्चा, विधायक रामसहाय वर्मा पर उठाए सवाल
पीपलू नगरपालिका चुनाव से पहले भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। जिला प्रवक्ता दशरथ सिंह राजावत ने वार्ड नंबर 4 से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। विधायक रामसहाय वर्मा से विवाद और टिकट वितरण को लेकर सियासी घमासान बढ़ गया है।
नगरपालिका चुनाव की औपचारिक लड़ाई शुरू होने से पहले ही पीपलू में भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। भाजपा जिला प्रवक्ता दशरथ सिंह राजावत ने पार्टी की आधिकारिक टिकट सूची सामने आने से पहले ही वार्ड नंबर 4 से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। राजावत के इस फैसले के बाद उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के एक वर्ग में राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। राजावत समर्थक इसे टिकट की व्यक्तिगत लड़ाई के बजाय स्थानीय नेतृत्व बनाम राजनीतिक प्रभाव की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि राजावत को कितना व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है, इसका वास्तविक आकलन चुनावी प्रक्रिया और मतदान के बाद ही हो सकेगा।
विधायक रामसहाय वर्मा से विवाद के बाद लिया फैसला?
सूत्रों के मुताबिक टिकट वितरण और उसकी पारदर्शिता को लेकर दशरथ सिंह राजावत तथा निवाई-पीपलू विधायक रामसहाय वर्मा के बीच फोन पर तीखी बातचीत हुई थी। इसके बाद राजावत ने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला सार्वजनिक किया। राजावत ने सोशल मीडिया के जरिए भी विधायक के व्यवहार पर नाराजगी जताई और दावा किया कि पीपलू की जनता उनका अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फोन पर हुई कथित बातचीत और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विधायक के बेटे की पीपलू में एंट्री से बढ़ा विवाद
विवाद के केंद्र में एक और घटनाक्रम है। विधायक रामसहाय वर्मा के बेटे और जयपुर नगर निगम ग्रेटर के निवर्तमान पार्षद अंकित वर्मा का नाम पीपलू नगरपालिका के वार्ड नंबर 18 की मतदाता सूची में शामिल होने के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजावत ने इसे लेकर खुलकर विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि पीपलू की स्थानीय राजनीति में बाहर से नेतृत्व थोपने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “पीपलू नगरपालिका में बाहर से आकर बड़ा सपना संजोने वालों का सपना कभी पूरा नहीं होगा। हम अपनी राजनीतिक हत्या किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
'पद के प्रभाव' पर सवाल, लेकिन आरोपों की पुष्टि बाकी
राजावत समर्थक खेमे की ओर से अब यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या विधायक पद का राजनीतिक प्रभाव स्थानीय टिकट वितरण और चुनावी समीकरणों पर पड़ रहा है। इसे सीधे तौर पर “पद का दुरुपयोग” कहना फिलहाल तथ्य के रूप में स्थापित नहीं है। ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण या सक्षम प्राधिकारी का निष्कर्ष उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। इसलिए इसे राजावत पक्ष द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक आरोप और सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। विधायक रामसहाय वर्मा या उनके बेटे अंकित वर्मा का इन आरोपों पर विस्तृत पक्ष सामने आने पर उसे भी इस विवाद की पूरी तस्वीर में शामिल किया जाना जरूरी होगा।
पत्नी के भी चुनाव लड़ने की चर्चा
राजावत के वार्ड नंबर 4 से चुनाव लड़ने के साथ उनकी पत्नी के वार्ड नंबर 15 से मैदान में उतरने की भी चर्चा है। हालांकि इसे लेकर अंतिम स्थिति नामांकन और आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी। राजावत के निर्दलीय उतरने से भाजपा के सामने एक नई चुनौती जरूर खड़ी हो सकती है। खास तौर पर यदि पार्टी किसी दूसरे उम्मीदवार को वार्ड नंबर 4 से टिकट देती है और राजावत अपने समर्थकों के साथ चुनाव में बने रहते हैं, तो मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस तक सीमित रहने के बजाय त्रिकोणीय हो सकता है।
अब चुनाव सिर्फ टिकट का नहीं, स्थानीय वर्चस्व का भी
पीपलू की राजनीति में उभरा यह विवाद अब एक वार्ड के टिकट से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ विधायक रामसहाय वर्मा का राजनीतिक प्रभाव है, दूसरी तरफ भाजपा संगठन में पद संभाल रहे दशरथ सिंह राजावत ने ही निर्दलीय मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल होगा। क्या पार्टी चुनाव से पहले दोनों पक्षों के बीच समझौता करा पाएगी, या पीपलू में अपने ही संगठन से निकली बगावत भाजपा के चुनावी समीकरण बिगाड़ेगी? फिलहाल राजावत अपने पक्ष में स्थानीय समर्थन होने का दावा करते हुए मैदान में उतर चुके हैं। अब भाजपा की आधिकारिक टिकट और विधायक रामसहाय वर्मा का पक्ष सामने आने के बाद ही साफ होगा कि पीपलू की यह लड़ाई टिकट की नाराजगी है या नगरपालिका चुनाव से पहले स्थानीय नेतृत्व की बड़ी सियासी जंग का आगाज।

