Nepal Flood Rescue: सुरंगों में फंसे 898 कर्मचारियों तक पहुंचने की जंग, 6 इंच का छेद कर पाइप से पहुंचाई हवा; मौतों का आंकड़ा 768
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में 898 कर्मचारी फंसे हैं। 361 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही का दायरा लगातार सामने आ रहा है। नदियों में अचानक आए उफान के कारण कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में कर्मचारी फंस गए हैं। बचाव एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन सुरंगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचना और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालना है।
ताजा जानकारी के अनुसार, विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 898 कर्मचारी अब भी फंसे हुए हैं। राहत की बात यह है कि अब तक 361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। वहीं, बाढ़ से नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 768 बताई जा रही है।
सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
नेपाल में बचाव दलों ने सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर ऑपरेशन शुरू किया है। त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में बचाव कार्य विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सुरंग के भीतर भारी मात्रा में मिट्टी, गाद और मलबा जमा होने के कारण रेस्क्यू टीमों को आगे बढ़ने में कठिनाई हो रही है। मशीनों की सहायता से लगातार मलबा हटाया जा रहा है, ताकि सुरंग के भीतर मौजूद कर्मचारियों तक पहुंचने का रास्ता बनाया जा सके।

बचावकर्मियों की प्राथमिकता सुरंग में फंसे लोगों तक जल्द से जल्द संपर्क स्थापित करना और उनके लिए सुरक्षित निकासी का मार्ग तैयार करना है।
6 इंच का छेद कर पाइप से पहुंचाई जा रही हवा
रेस्क्यू ऑपरेशन में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत सुरंग में करीब 6 इंच का छेद किया गया है। इस छेद के जरिए पाइप डालकर अंदर हवा पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
बचाव दल अब इस छेद को और बड़ा करने की तैयारी में हैं। योजना इसे इतना चौड़ा बनाने की है कि आगे चलकर मैनहोल जैसा रास्ता तैयार किया जा सके। इसके बाद रेस्क्यू टीमों को सुरंग के अंदर पहुंचकर फंसे कर्मचारियों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।
मलबे से भरी और सीमित जगह वाली सुरंग में यह अभियान तकनीकी रूप से बेहद कठिन माना जा रहा है। ऐसे में मशीनों के साथ-साथ इंजीनियरिंग और रेस्क्यू विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया
आपदा के बाद शुरू किए गए बचाव अभियान में अब तक 361 कर्मचारियों को सुरंगों और प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
हालांकि बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी अलग-अलग जगहों पर फंसे बताए जा रहे हैं। करीब 898 लोगों तक पहुंचना बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। सुरंगों की स्थिति, अंदर जमा मलबा और बाहरी मौसम की परिस्थितियां रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावित कर रही हैं।
बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं और उम्मीद की जा रही है कि सुरंग तक पहुंचने के लिए तैयार किए जा रहे वैकल्पिक रास्तों से ऑपरेशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
26 अगस्त को नदियों में अचानक आया था उफान
नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशुली नदियों में अचानक आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई थी। तेज बहाव के साथ आए पानी और मलबे ने कई इलाकों को प्रभावित किया।
बाढ़ का असर न सिर्फ आबादी वाले क्षेत्रों पर पड़ा, बल्कि बिजली उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी इसकी चपेट में आ गए। कई स्थानों पर मलबा जमा होने और संपर्क मार्ग प्रभावित होने से राहत एवं बचाव कार्यों को और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल की पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बचाव टीमों के सामने पहले ही कई चुनौतियां हैं। ऐसे में बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों और दुर्गम क्षेत्रों तक भारी मशीनरी पहुंचाना भी आसान नहीं है।
नेपाल में बढ़ता जा रहा आपदा का आंकड़ा
इस विनाशकारी बाढ़ में नेपाल में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 768 बताई जा रही है। बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
आपदा का असर सीमावर्ती क्षेत्रों तक भी देखा गया है। तिब्बत में भी इस प्राकृतिक आपदा से 16 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।
मृतकों और प्रभावित लोगों के आंकड़ों में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ बदलाव संभव है, क्योंकि विभिन्न इलाकों में तलाशी अभियान अभी भी जारी है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान
नेपाल की ऊर्जा व्यवस्था में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की अहम भूमिका है। बाढ़ और नदियों के तेज बहाव ने इन परियोजनाओं के सामने भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
सुरंगों में पानी, कीचड़ और मलबा भरने के कारण कई जगह कर्मचारियों के फंसने की स्थिति बनी। बचाव अभियान के साथ-साथ परियोजनाओं को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को सुरक्षित निकालना है। इसके बाद प्रभावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी स्थिति और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी दुनिया की नजर
नेपाल में जारी यह बचाव अभियान अब समय के खिलाफ जंग बन गया है। एक ओर मशीनों से सुरंगों का मलबा हटाया जा रहा है, तो दूसरी ओर छोटे छेद के जरिए अंदर तक हवा पहुंचाकर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
6 इंच के छेद को बड़ा कर मैनहोल तैयार करने की योजना रेस्क्यू ऑपरेशन का अहम हिस्सा बन गई है। अगर बचाव दल सुरंग के भीतर सुरक्षित तरीके से पहुंचने में सफल रहते हैं, तो फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के अभियान में तेजी आ सकती है।
फिलहाल नेपाल की बचाव एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। 361 कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के बाद अब सभी की नजर उन 898 लोगों तक पहुंचने के प्रयासों पर है, जो अब भी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे होने की जानकारी है।

