राजस्थान में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, अगस्त में मिले सबसे ज्यादा 55 नए मरीज; जानें लक्षण और बचाव
राजस्थान में स्वाइन फ्लू H1N1 के मामले तेजी से बढ़े हैं। अगस्त में 55 नए केस मिले, जिससे 2026 में कुल मामले 146 पहुंच गए। जानें लक्षण और बचाव के उपाय।
राजस्थान में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अगस्त महीने में प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 55 नए मामले सामने आए हैं, जो इस साल किसी एक महीने में दर्ज सबसे अधिक केस हैं। इसके साथ ही जनवरी 2026 से अब तक राजस्थान में H1N1 के कुल मामलों की संख्या 146 पहुंच गई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा संस्थानों को अलर्ट रहने और जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
अगस्त में सबसे ज्यादा केस सामने आए
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में 2, फरवरी में 3, मार्च में 20, अप्रैल में 22, मई में 25, जून में 14 और जुलाई में 5 स्वाइन फ्लू के मामले सामने आए थे। वहीं अगस्त में अचानक 55 नए केस दर्ज किए गए। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में H1N1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए विभाग पूरी निगरानी कर रहा है। सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों को स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नए और घातक स्ट्रेन की पुष्टि नहीं
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राजस्थान में H1N1 के किसी नए या अधिक घातक स्ट्रेन के फैलने की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि ICMR के अनुसार फिलहाल प्रसारित वायरस पहले से सक्रिय है, इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि, संक्रमण से बचने के लिए सावधानी बरतना और लक्षण दिखाई देने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू के क्या हैं लक्षण?
स्वाइन फ्लू एक श्वसन संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान शामिल हैं। ज्यादातर मरीज उचित देखभाल और चिकित्सकीय सलाह से ठीक हो जाते हैं।
हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों में संक्रमण के कारण जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखने पर लापरवाही न करते हुए समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।

