कोलंबो टेस्ट में टीम इंडिया का बड़ा बदलाव? कुलदीप की जगह इस ऑलराउंडर को मिल सकता है मौका

भारत-श्रीलंका दूसरे टेस्ट से पहले सारांश जैन के डेब्यू की चर्चा तेज है। 23 अगस्त से कोलंबो में होने वाले मुकाबले में टीम इंडिया स्पिन विभाग में बदलाव कर सकती है।

कोलंबो टेस्ट में टीम इंडिया का बड़ा बदलाव? कुलदीप की जगह इस ऑलराउंडर को मिल सकता है मौका

भारत और श्रीलंका के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। गॉल में पहला टेस्ट 165 रन से जीतने के बाद टीम इंडिया की नजर अब सीरीज अपने नाम करने पर है। दूसरे टेस्ट से पहले सबसे ज्यादा चर्चा स्पिन विभाग को लेकर है।

पहले टेस्ट में भारत ने तीन स्पिनरों—कुलदीप यादव, रवींद्र जडेजा और मानव सुतार—के साथ मैदान संभाला था। ऐसे में कोलंबो की परिस्थितियों को देखते हुए टीम मैनेजमेंट प्लेइंग इलेवन में बदलाव पर विचार कर सकता है। इसी कड़ी में 33 वर्षीय सारांश जैन का नाम चर्चा में है, जिन्हें श्रीलंका के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू करने का मौका मिल सकता है। उन्हें पहली बार भारतीय टेस्ट स्क्वॉड में शामिल किया गया है।

 कुलदीप के प्रदर्शन ने बढ़ाई चयन की चर्चा

गॉल टेस्ट में भारत की ओर से स्पिन गेंदबाजी का अहम हिस्सा रहे कुलदीप यादव उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ सके। ऐसे में दूसरे टेस्ट के लिए टीम संयोजन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, अभी भारतीय टीम की आधिकारिक प्लेइंग इलेवन सामने नहीं आई है। इसलिए कुलदीप के बाहर होने की खबर को फिलहाल संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

दूसरी ओर सारांश जैन की खासियत यह है कि वह केवल गेंदबाजी का विकल्प नहीं हैं। वह दाएं हाथ से ऑफ-स्पिन गेंदबाजी करने के साथ बाएं हाथ से बल्लेबाजी भी करते हैं। ऐसे में उनका चयन टीम को गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में अतिरिक्त बल्लेबाजी विकल्प भी दे सकता है।

 कौन हैं सारांश जैन?

मध्य प्रदेश के ऑलराउंडर सारांश जैन ने घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में जगह बनाई है। उनका जन्म 31 मार्च 1993 को इंदौर में हुआ था।

वह बाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ-स्पिन गेंदबाज हैं। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है और अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।

भारतीय टेस्ट टीम में उनका चयन अचानक नहीं हुआ। श्रीलंका दौरे से पहले भारत के टेस्ट स्क्वॉड में उन्हें शामिल किया गया था। BCCI की टीम में उन्हें राइट-आर्म ऑफ-स्पिन विकल्प के तौर पर जगह मिली, जबकि वॉशिंगटन सुंदर पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं थे।

घरेलू क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड

सारांश जैन का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड उनकी असली ताकत बताता है। फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उन्होंने गेंद से बड़ी संख्या में विकेट लिए हैं और बल्ले से भी उपयोगी पारियां खेली हैं।

मध्य प्रदेश के साथ उनका प्रदर्शन खास तौर पर चर्चा में रहा है। 2021-22 रणजी ट्रॉफी सीजन में मध्य प्रदेश की खिताबी जीत के दौरान उन्होंने अहम योगदान दिया। इसके बाद अगले सीजन में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा।

उनकी ऑलराउंड क्षमता के कारण उन्हें रणजी ट्रॉफी में बेस्ट ऑलराउंडर के लिए लाल अमरनाथ अवॉर्ड भी मिला था।

 श्रीलंका A के खिलाफ भी दिखाया दम

भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाने से पहले सारांश जैन ने श्रीलंका A के खिलाफ भारत A के लिए भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दो अनऑफिशियल टेस्ट की सीरीज में उन्होंने छह विकेट लिए और एक मुकाबले में नाबाद 70 रन की पारी खेलकर भारत A को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

यही प्रदर्शन उनके चयन के पीछे एक महत्वपूर्ण वजह माना गया। श्रीलंका की परिस्थितियों में ऑफ-स्पिन के साथ बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

पिता भी खेल चुके हैं रणजी ट्रॉफी

सारांश जैन का क्रिकेट से रिश्ता परिवार से भी जुड़ा रहा है। उनके पिता सुबोध जैन मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं।

सारांश ने घरेलू क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई और अब भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचे हैं। अगर उन्हें कोलंबो में अंतिम एकादश में जगह मिलती है तो यह उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव होगा।

कोलंबो में क्यों उपयोगी हो सकते हैं सारांश?

दूसरे टेस्ट के लिए टीम संयोजन में सारांश जैन का विकल्प इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों से योगदान दे सकते हैं। भारत के पास पहले से रवींद्र जडेजा और मानव सुतार जैसे बाएं हाथ के स्पिन विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में सारांश की ऑफ-स्पिन गेंदबाजी आक्रमण में विविधता ला सकती है।

ICC ने भी उनके चयन को टीम के स्पिन विकल्पों में एक नया आयाम जोड़ने वाला कदम बताया था।

23 अगस्त से होगा दूसरा टेस्ट

भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक कोलंबो के Sinhalese Sports Club में खेला जाएगा। पहला टेस्ट गॉल में 15 से 19 अगस्त तक हुआ था। दोनों मुकाबले ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र का हिस्सा हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय टीम मैनेजमेंट जीत के कॉम्बिनेशन को बरकरार रखता है या कोलंबो में परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करता है। अगर सारांश जैन को मौका मिलता है, तो 33 साल की उम्र में उनका इंटरनेशनल डेब्यू भारतीय क्रिकेट की खास कहानियों में शामिल हो सकता है।