खाद संकट पर नरेश मीणा का जयपुर कूच: बारां से पैदल यात्रा शुरू, बोले- सभी किसानों को खाद मिलने तक नहीं रुकेगा आंदोलन
खाद संकट को लेकर नरेश मीणा ने बारां से जयपुर तक किसान यात्रा शुरू की। पंचायत चुनाव के लिए थर्ड फ्रंट ने उम्मीदवारों के नाम घोषित किए और AAP से गठबंधन की जानकारी सामने आई।
राजस्थान में खाद की किल्लत को लेकर चल रहा आंदोलन अब बारां से निकलकर जयपुर की ओर बढ़ गया है। बारां कलेक्ट्रेट पर आमरण अनशन खत्म करने के बाद थर्ड फ्रंट के नेता नरेश मीणा ने शनिवार शाम जयपुर के लिए किसान यात्रा शुरू कर दी। उन्होंने साफ कहा कि बारां में खाद की समस्या काफी हद तक दूर हुई है, लेकिन प्रदेश के दूसरे जिलों के किसान अभी भी परेशान हैं। जब तक राजस्थान के सभी किसानों को खाद उपलब्ध नहीं हो जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
नरेश मीणा ने बारां से जयपुर तक की यात्रा पैदल शुरू की। यात्रा के दौरान वे कुछ दूरी तक नंगे पैर भी चले। बाद में समर्थकों ने उन्हें रेहड़ी पर बैठाया और उसे धक्का देते हुए आगे बढ़े। बड़ी संख्या में समर्थक बाइक के साथ इस यात्रा में शामिल हुए।
बारां से जयपुर तक किसान यात्रा, शहीद स्मारक पर धरने का ऐलान
नरेश मीणा ने कहा कि बारां में खाद को लेकर स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन प्रदेशभर के किसानों की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि सरकार को खाद की समस्या को गंभीरता से लेना होगा।
उन्होंने कहा कि वे किसानों की समस्याओं को लेकर जयपुर जा रहे हैं। अगर जयपुर पहुंचने तक किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो शहीद स्मारक पर धरना दिया जाएगा। उनका आंदोलन किसानों को खाद मिलने तक जारी रहने की बात कही गई है।
किसान यात्रा के पहले दिन करीब 35 किलोमीटर का सफर तय कर मांगरोल पहुंचा गया। आगे यह यात्रा इटावा, लाखेरी, इंद्रगढ़, उनियारा और टोंक होते हुए जयपुर पहुंचेगी।
पंचायत चुनाव में थर्ड फ्रंट की एंट्री, उम्मीदवारों के नाम भी घोषित
खाद आंदोलन के बीच नरेश मीणा ने पंचायत राज चुनाव को लेकर भी अपनी राजनीतिक रणनीति सामने रखी। बारां में धरने के दौरान उन्होंने थर्ड फ्रंट की ओर से कुछ संभावित उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया।
उन्होंने छबड़ा से बृजभूषण शर्मा, अटरू से वंदना नागर और बारां पंचायत समिति की सामान्य सीट से ममता नागर को प्रधान पद के लिए आगे करने की बात कही। वहीं पूर्व प्रधान संदीप शर्मा को जिला प्रमुख पद के चेहरे के तौर पर घोषित किया।
नरेश मीणा के मुताबिक थर्ड फ्रंट भले ही संख्या के लिहाज से कमजोर हो, लेकिन वह जनसमर्थन रखने वाले युवाओं को चुनावी मैदान में उतारने की कोशिश करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारों के चयन में सभी समाजों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर रहेगा।
आरक्षित सीटों पर भी चुनाव लड़ने की तैयारी
थर्ड फ्रंट की नजर केवल सामान्य सीटों पर ही नहीं है। नरेश मीणा ने कहा कि अंता, मांगरोल समेत करीब पांच आरक्षित सीटों पर भी उनका संगठन चुनाव लड़ेगा। हालांकि इन सीटों के लिए अभी किसी एक प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है।
इससे संकेत मिल रहा है कि पंचायत राज चुनाव में थर्ड फ्रंट अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी में है और स्थानीय स्तर पर नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
जातिवाद के आरोपों पर नरेश मीणा का पलटवार
पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को लेकर नरेश मीणा ने जातीय समीकरणों के आरोपों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने छात्र राजनीति से लेकर पंचायत राज की राजनीति तक कभी जातिवाद को आधार नहीं बनाया और हमेशा अलग-अलग समाजों को साथ लेकर चलने की कोशिश की।
उन्होंने विश्वविद्यालय की राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में मीणा समाज की बेटी प्रभा चौधरी को पहली बार विश्वविद्यालय का उपाध्यक्ष बनाने में उनकी भूमिका रही। इसके अलावा जाट समाज के एक युवक को निर्दलीय अध्यक्ष बनाए जाने और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके विनोद जाखड़ को निर्दलीय रूप से विश्वविद्यालय अध्यक्ष बनाए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
वोटों के आंकड़े गिनाकर दिया जवाब
जातिवाद के आरोपों पर नरेश मीणा ने चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बारां में उन्हें सर्व समाज का समर्थन मिला। उन्होंने दावा किया कि एक जगह उन्हें मिले 6200 वोटों में उनके जाति समाज का एक भी वोट नहीं था।
उन्होंने बताया कि कुल 53 हजार वोटों में करीब 32 हजार वोट उनके समाज से जुड़े मतदाताओं के थे, लेकिन इनमें से करीब 5 हजार वोट पड़े ही नहीं। उनके अनुसार उन्हें अपने समाज से लगभग 2 से 2.5 हजार वोट मिले, जबकि करीब 28 हजार वोट सामान्य वर्ग से आए।
ब्राह्मण और धाकड़ समाज को प्रतिनिधित्व देने का दावा
पंचायत चुनाव के लिए घोषित चेहरों को लेकर भी नरेश मीणा ने सामाजिक प्रतिनिधित्व का तर्क दिया। उन्होंने कहा कि बारां में सामान्य सीट होने के बावजूद लंबे समय से ब्राह्मण समाज को जिला प्रमुख पद पर प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसी वजह से पूर्व प्रधान संदीप शर्मा को जिला प्रमुख के चेहरे के तौर पर आगे किया गया है।
इसी तरह बारां पंचायत समिति की दोनों सामान्य सीटों पर धाकड़ समाज से आने वाले प्रत्याशियों को प्रधान पद के लिए मौका देने की बात उन्होंने कही। छबड़ा में भी ब्राह्मण समाज को प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से एडवोकेट बृजभूषण शर्मा को उम्मीदवार बनाए जाने का तर्क दिया गया।
खाद आंदोलन और पंचायत चुनाव, दोनों मोर्चों पर सक्रियता
नरेश मीणा का बारां से जयपुर कूच ऐसे समय हुआ है जब राजस्थान में पंचायत राज चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में खाद संकट को लेकर आंदोलन के साथ-साथ पंचायत चुनाव में थर्ड फ्रंट की सक्रियता भी राजनीतिक तौर पर अहम मानी जा रही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बारां से शुरू हुई किसान यात्रा जयपुर पहुंचने तक कितना बड़ा रूप लेती है और क्या सरकार की ओर से खाद संकट को लेकर कोई बड़ा कदम उठाया जाता है। वहीं पंचायत चुनाव में थर्ड फ्रंट के घोषित चेहरों और अन्य सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा से स्थानीय राजनीति में मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।

