पंचायत चुनाव से पहले गहलोत का BJP पर बड़ा हमला: बोले- गांवों में गुस्सा, ग्रामीण चुनाव में देंगे जवाब

Rajasthan Panchayat Election 2026 से पहले अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने ग्रामीण नाराजगी, किसान मुद्दे, योजनाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।

पंचायत चुनाव से पहले गहलोत का BJP पर बड़ा हमला: बोले- गांवों में गुस्सा, ग्रामीण चुनाव में देंगे जवाब

राजस्थान में पंचायत चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार को घेरते हुए दावा किया है कि ग्रामीण इलाकों में सरकार के खिलाफ नाराजगी है और इसका असर पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगा। गहलोत ने कहा कि गांवों की जनता चुनाव के जरिए सरकार के कामकाज का जवाब देगी।

गहलोत ने हाल में हुए नगर निकाय चुनावों का हवाला देते हुए पुलिस और प्रशासन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनका कहना है कि निकाय चुनाव के दौरान सामने आए घटनाक्रम को लेकर लोगों में नाराजगी है और अब यही मुद्दे पंचायत चुनाव में भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

गांव से जिला स्तर तक कांग्रेस को मजबूत बताया

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर सक्रिय हैं। उनके मुताबिक, पिछले करीब ढाई साल से पार्टी विपक्ष की भूमिका निभाते हुए सरकार की नीतियों और जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रही है।

गहलोत ने दावा किया कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि ग्रामीण मतदाता सरकार के कामकाज का आकलन करने के बाद अपना फैसला सुनाएंगे।

किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

गहलोत ने किसानों से जुड़े एक कथित बयान को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों के 20-25 दिन काम करने से जुड़े बयान को लेकर गांवों में चर्चा और प्रतिक्रिया है।

गहलोत ने सवाल उठाया कि अगर किसान सिर्फ कुछ दिन ही काम करता है तो बाकी समय वह क्या करता है। उन्होंने दावा किया कि खेती-किसानी से जुड़े लोगों के बीच ऐसे बयानों को लेकर नाराजगी है और पंचायत चुनाव में इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है।

पुरानी योजनाओं को लेकर सरकार पर निशाना

गहलोत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को भी चुनावी मुद्दा बनाने के संकेत दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पिछली सरकार की कई योजनाओं को बंद कर दिया या उनमें बदलाव किया है।

उन्होंने गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनका असर गांवों तक पहुंचा था। गहलोत ने सवाल उठाया कि यदि योजनाओं का नाम या स्वरूप बदलना जरूरी था तो उन्हें पूरी तरह बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी।

चार चरणों में पंचायत चुनाव कराने पर सवाल

पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने के फैसले को लेकर भी गहलोत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर सोच-समझकर फैसला किया होगा, लेकिन यदि इसमें सरकार की कोई भूमिका है तो उसके पीछे की वजह स्पष्ट होनी चाहिए।

गहलोत ने आशंका जताई कि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव के बाद निर्वाचित सदस्यों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव के बाद खरीद-फरोख्त या किसी तरह के दबाव की स्थिति बनती है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल होगा।

‘विपक्ष मुक्त राजनीति’ के आरोप से बढ़ाया हमला

गहलोत ने केंद्र और राज्य सरकार पर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की अपनी अहम भूमिका होती है।

उनके मुताबिक, मजबूत विपक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है और विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।

‘वोट चोरी’ के मुद्दे का भी किया जिक्र

गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से उठाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस पहले से आवाज उठाती रही है।

गहलोत ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग से जुड़े कुछ अधिकारियों की ओर से भी समय-समय पर चिंताएं जाहिर की गई थीं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कई मुद्दों पर पहले ही सवाल उठाते रहे हैं और बाद में उन्हीं विषयों पर चर्चा तेज होती दिखाई देती है।

पंचायत चुनाव में बड़ी जीत का दावा

अशोक गहलोत ने आखिर में पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस के पक्ष में बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में पार्टी का संगठन मजबूत है और जनता के बीच सरकार के कामकाज को लेकर कई सवाल हैं।

अब पंचायत चुनाव में गहलोत के इन आरोपों को भाजपा किस तरह जवाब देती है और ग्रामीण मतदाताओं के बीच कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं, यह चुनावी नतीजों में सामने आएगा।