पचपदरा रिफाइनरी पर फिर छिड़ी सियासी जंग, पूर्व सीएम अशोक गहलोत का ट्विट, 'बनाया किसने, श्रेय कौन ले रहा?'

पचपदरा रिफाइनरी को लेकर राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर रिफाइनरी के शिलान्यास को लेकर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि परियोजना का शिलान्यास 2013 में यूपीए सरकार के दौरान हुआ था, जबकि भाजपा सरकार ने इसे वर्षों तक लंबित रखा। कांग्रेस ने भाजपा पर विकास से ज्यादा परियोजनाओं का श्रेय लेने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इसे "क्रेडिट मॉडल" करार दिया।

पचपदरा रिफाइनरी पर फिर छिड़ी सियासी जंग, पूर्व सीएम अशोक गहलोत का ट्विट, 'बनाया किसने, श्रेय कौन ले रहा?'

5 साल तक अटकी रिफाइनरी... फिर भी श्रेय की राजनीति! BJP का 'विकास मॉडल' या 'क्रेडिट मॉडल'?

राजस्थान की सबसे बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल पचपदरा रिफाइनरी एक बार फिर राजनीति के केंद्र में है। इस बार मुद्दा सिर्फ विकास का नहीं, बल्कि इतिहास, श्रेय और राजनीतिक नैरेटिव का बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से ये दावा कर दिया कि रिफाइनरी का शिलान्यास साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, जबकि वास्तविकता ये है कि इस परियोजना का शिलान्यास साल 2013 में यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने किया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विकास के साथ-साथ इतिहास भी बदला जा रहा है?

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा अक्सर उन परियोजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश करती है जिनकी नींव पिछली सरकारों के समय रखी गई थी। उनका दावा है कि पचपदरा रिफाइनरी भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन गई है।

 

व्यंग्य करते हुए विपक्ष कह रहा है कि "भाजपा के विकास मॉडल में काम बाद में और क्रेडिट पहले आता है।" आरोप है कि जिस परियोजना की आधारशिला 2013 में रखी गई, उसे अगले पांच वर्षों तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस देरी का असर यह हुआ कि परियोजना की अनुमानित लागत करीब 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई।.. पूर्व सीएम अशोक गहलोत का ट्विट देखिए...



कांग्रेस यह भी याद दिला रही है कि राजस्थान में रिफाइनरी लाना आसान नहीं था। एचपीसीएल को इस परियोजना के लिए तैयार करने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने एक असामान्य फैसला लेते हुए 26 प्रतिशत हिस्सेदारी ली। इसी मॉडल के तहत एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) का गठन हुआ, जिसने परियोजना को आगे बढ़ाया।

विपक्ष का तंज है कि अगर मुख्यमंत्री को परियोजना का पूरा इतिहास मालूम नहीं है, तो सार्वजनिक मंचों पर गलत दावे करने के बजाय अधिकारियों से दस्तावेज मंगवाकर तथ्य जांच लेने चाहिए। क्योंकि राजनीति में बयान बदल सकते हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड नहीं।

फिलहाल पचपदरा रिफाइनरी विकास से ज्यादा श्रेय की राजनीति का प्रतीक बनती दिखाई दे रही है। एक पक्ष इसे मोदी सरकार की उपलब्धि बता रहा है, तो दूसरा पक्ष कह रहा है कि "नींव हमारी, फीता आपका"—यही भाजपा का नया विकास मॉडल बन गया है। 


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