अशोक गहलोत करेंगे CM भजनलाल शर्मा का स्वागत! राजेंद्र राठौड़ कर रहे इंतज़ार!

राजस्थान-हरियाणा यमुना जल समझौते के बाद सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने अशोक गहलोत को उनके पुराने बयान की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्वागत करने की चुनौती दी। वहीं गहलोत ने एमओए सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

अशोक गहलोत करेंगे CM भजनलाल शर्मा का स्वागत! राजेंद्र राठौड़ कर रहे इंतज़ार!
फाइल फोटो

राजस्थान और हरियाणा के बीच बहुप्रतीक्षित यमुना जल समझौते (MOA) पर हस्ताक्षर होने के बाद अब पानी से ज्यादा सियासत बहने लगी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में दिल्ली में इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए। भाजपा इसे राजस्थान के लिए 32 साल के इंतजार का अंत और बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि कांग्रेस इस समझौते के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग उठा रही है।

इसी बीच, राजस्थान भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीधे निशाने पर ले लिया। राठौड़ ने कहा कि कुछ समय पहले अशोक गहलोत ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि यदि राजस्थान के लिए यमुना जल आने का रास्ता खुल जाता है, तो वे स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का माला पहनाकर स्वागत और अभिनंदन करेंगे।

अब जब यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, तो राठौड़ ने गहलोत को उनके उसी बयान की याद दिलाते हुए कहा कि “अब वह ऐतिहासिक अवसर आ चुका है। गहलोत साहब अपने वचन पर कायम रहें और जयपुर एयरपोर्ट पहुंचकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्वागत-अभिनंदन करें।” राठौड़ ने यहां तक कहा कि सुबह 9:30 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर आपका इंतजार रहेगा।

राठौड़ का दूसरा वार- “स्पष्ट बताइए, समझौते के पक्ष में हैं या विरोध में?”

राजेंद्र राठौड़ यहीं नहीं रुके। उन्होंने अशोक गहलोत के उस ट्वीट पर भी पलटवार किया, जिसमें गहलोत ने नए एमओए (MOA) का दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की थी।

राठौड़ ने कहा कि यदि गहलोत को इस समझौते पर आपत्ति है तो वे घुमा-फिराकर बयान देने के बजाय साफ शब्दों में कहें कि वे और उनकी पार्टी यमुना जल समझौते के विरोध में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद गहलोत अपने कार्यकाल में इस समझौते को जमीन पर नहीं ला सके, जबकि भाजपा सरकार ने 32 साल से अटके रास्ते को खोल दिया।

राठौड़ ने यह भी दावा किया कि नए एमओए में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि राजस्थान को जल आवंटन 1994 के यमुना जल समझौते के प्रावधानों के अनुरूप ही मिलेगा, इसलिए जनता को भ्रमित करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

गहलोत ने उठाए सवाल, मांगा समझौते का दस्तावेज

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हरियाणा के साथ नया एमओए तो कर लिया, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस समझौते में किन शर्तों पर सहमति बनी है।

गहलोत ने अपने ट्वीट में यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2024 में हुए एमओयू को भी लोकसभा चुनाव तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। उनका कहना है कि यदि नए एमओए में भी पहले जैसी शर्तें हैं तो यह 1994 के मूल समझौते की भावना के विपरीत होगा। उन्होंने मांग की कि नए एमओए की प्रति तत्काल सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी भी तरह की आशंका और भ्रम समाप्त हो सके।

अब सियासत का सबसे बड़ा सवाल…

यमुना जल समझौते के बाद अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पानी की नहीं, बल्कि अशोक गहलोत के पुराने बयान की हो रही है।

क्या गहलोत अपने शब्दों पर कायम रहते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का सार्वजनिक स्वागत करेंगे? या फिर यह बयान भी राजस्थान की राजनीति के उन वादों में शामिल हो जाएगा, जो चुनावी मंचों से तो गूंजते हैं, लेकिन समय आने पर खामोश हो जाते हैं?

फिलहाल, यमुना का पानी राजस्थान तक पहुंचे या नहीं, लेकिन इस समझौते ने भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बहस की धारा जरूर तेज कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या गहलोत अपने वचन का सम्मान करेंगे, या फिर यह मुद्दा आने वाले दिनों में भाजपा के लिए एक नया राजनीतिक हथियार बन जाएगा।