राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव में देरी, फिर हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने दायर की अवमानना याचिका
राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने आरोप लगाया है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार और संबंधित विभाग चुनाव नहीं करा रहे हैं तथा ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर प्रक्रिया टाली जा रही है।
पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में हो रही देरी को लेकर मामला एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है। निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव नहीं कराए जाने पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार और संबंधित विभाग चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं कर रहे हैं।
यह अवमानना याचिका सिरोही के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा की ओर से दायर की गई है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला देकर चुनावों में देरी की जा रही है, जबकि हाईकोर्ट पहले ही इस आधार को स्वीकार नहीं कर चुका है।

31 जुलाई तक चुनाव कराने का था निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई 2026 को अपने आदेश में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जुलाई 2026 तक संपन्न कराए जाएं। इसके बावजूद अब तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई है। याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
परिसीमन और मतदाता सूची का कार्य भी समय पर पूरा नहीं
हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में नगरीय निकायों के वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य 20 जून 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, वर्तमान में पंचायतों और शहरी निकायों में आरक्षण की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसी बीच स्वायत्त शासन विभाग ने 15 जून को ओबीसी आयोग के सचिव को पत्र लिखकर नगरीय निकायों में अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) के आरक्षण से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को बनाया जा रहा आधार
सरकारी पत्र में कहा गया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग के आरक्षण की अंतिम स्थिति ओबीसी आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट अपने पूर्व आदेश में स्पष्ट कर चुका है कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना भी चुनाव कराए जाएं और रिपोर्ट में देरी को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके बावजूद राज्य सरकार और संबंधित विभाग लगातार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया का हवाला दे रहे हैं। अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और उसके निर्देशों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
देश-दुनिया की हर बड़ी और ताजा खबर सबसे पहले पाने के लिए जुड़े रहिए PK TIMES के साथ। हमारी टीम हर पल आपको सटीक, तेज और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाने के लिए तैयार है। राजनीति से लेकर जन सरोकार सहित हर महत्वपूर्ण अपडेट अब एक ही प्लेटफॉर्म पर। PK TIMES ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड करें और कहीं भी,कभी भी खबरों से अपडेट रहें।

