‘सड़क बने तो 20 साल तक टिके’, दिनेश चौधरी ने बताया कुम्हारिया बॉस गांव के विकास का प्लान
कुम्हारिया बॉस ग्राम पंचायत से सरपंच पद के दावेदार दिनेश चौधरी ने PK Times से बातचीत में सड़क, पानी, शिक्षा, डिजिटल लाइब्रेरी, सीसीटीवी और योजनाबद्ध विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताएं बताईं।
गांव में सड़क बनती है और कुछ समय बाद पाइपलाइन डालने के लिए उसे दोबारा खोद दिया जाता है। फिर सड़क की मरम्मत होती है और किसी दूसरे काम के लिए दोबारा खुदाई शुरू हो जाती है। इससे सरकारी धन भी खर्च होता है और ग्रामीणों को परेशानी भी उठानी पड़ती है। कुम्हारिया बॉस ग्राम पंचायत से सरपंच पद के दावेदार दिनेश चौधरी इस व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं। PK Times से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि गांव में विकास कार्य ऐसे होने चाहिए, जिनका लाभ लोगों को लंबे समय तक मिले। सड़क निर्माण से पहले पानी की पाइपलाइन और जल निकासी की योजना तैयार होनी चाहिए, ताकि बार-बार खुदाई की जरूरत न पड़े।
पहली बार सरपंच चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दिनेश चौधरी ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में पांच गांव आते हैं। गोगियावास, श्री सवाई जयसिंहपुरा, बाजडोली, कुम्हारिया बॉस और फतेहपुरा। उन्होंने सड़क, शिक्षा, डिजिटल लाइब्रेरी, सीसीटीवी, स्वच्छता और युवाओं की भागीदारी को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। पढ़िए PK Times के साथ दिनेश चौधरी की विशेष बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल 1: पहली बार सरपंच चुनाव लड़ रहे हैं। जनता के बीच जाने पर आपको कैसा समर्थन मिल रहा है?
दिनेश चौधरी: मेरा नाम दिनेश चौधरी है। मैं ग्राम पंचायत कुम्हारिया बॉस से सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा हूं और मेरा गांव श्री सवाई जयसिंहपुरा है। हमारी पंचायत में पांच गांव आते हैं। गोगियावास, श्री सवाई जयसिंहपुरा, बाजडोली, कुम्हारिया बॉस और फतेहपुरा। मैं पहली बार चुनाव लड़ रहा हूं, लेकिन इससे पहले भी जनता के कामों के लिए प्रयास करता रहा हूं। लोगों की समस्याओं को लेकर संबंधित विभागों और सरकार तक पहुंचने की कोशिश की है। अब चुनाव लड़ने का उद्देश्य यही है कि पंचायत के विकास के लिए अधिक जिम्मेदारी के साथ काम कर सकूं। हमारे पांचों गांवों में सड़क की समस्या प्रमुख है। मैं चाहता हूं कि इन समस्याओं के समाधान के लिए काम किया जाए।
सवाल 2: गांवों में सड़क, पानी और बिजली जैसी समस्याएं वर्षों तक क्यों बनी रहती हैं?
दिनेश चौधरी: मेरे अनुसार, कई बार ग्रामीण अपनी समस्याओं को संबंधित विभागों और सरकार तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचा पाते। गांव में सड़क खराब है, पानी की समस्या है या स्ट्रीट लाइट की जरूरत है, लेकिन इन मुद्दों को आगे तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ता है। जब तक समस्याओं को संबंधित अधिकारियों और सरकार के सामने नहीं रखा जाएगा, तब तक समाधान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। मेरा मानना है कि सरपंच की जिम्मेदारी है कि वह ग्रामीणों की समस्याएं सुने और उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाकर समाधान के लिए प्रयास करे।
सवाल 3: कुम्हारिया बॉस को आदर्श ग्राम पंचायत बनाने के लिए आपकी क्या योजना है?
दिनेश चौधरी: मेरी सोच है कि पंचायत के विकास में युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों का अनुभव भी शामिल होना चाहिए। हम गांव के लोगों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं समझेंगे और उसी आधार पर विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करेंगे। मैं चाहता हूं कि पंचायत में सड़क, पानी, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाएं बेहतर हों। विकास कार्यों की योजना बनाते समय युवाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि पंचायत में ऐसे काम हों, जिन्हें देखकर दूसरे गांव भी प्रेरणा ले सकें।
सवाल 4: सरकारी स्कूलों में शिक्षा और खेल सुविधाओं को लेकर आपकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?
दिनेश चौधरी: स्कूलों की स्थिति सुधारना बहुत जरूरी है। कई बार स्कूलों में शौचालय, पानी, बैठने की जगह, कमरे और भवन की मरम्मत जैसी समस्याएं होती हैं। मेरा मानना है कि सरपंच को अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाकर देखना चाहिए कि वहां किन सुविधाओं की कमी है। जहां पानी की समस्या है, वहां पानी की व्यवस्था के लिए प्रयास होना चाहिए। जहां शौचालय या भवन की मरम्मत जरूरी है, वहां संबंधित विभागों से काम करवाने का प्रयास करना चाहिए। बच्चों के लिए खेल मैदान भी जरूरी है, ताकि वे पढ़ाई के साथ खेलों में भी आगे बढ़ सकें। मैं चाहता हूं कि पंचायत के स्कूलों में बच्चों को बेहतर वातावरण मिले।
सवाल 5: बारहवीं के बाद गांव के युवाओं को पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ता है। क्या उनके लिए स्थानीय स्तर पर कोई योजना है?
दिनेश चौधरी: आजकल आसपास के क्षेत्रों में भी कॉलेज और विश्वविद्यालयों की सुविधाएं बढ़ रही हैं। मेरी कोशिश होगी कि पंचायत और आसपास के क्षेत्र में शिक्षा के अवसरों को लेकर युवाओं को जानकारी मिले। अगर हमारे क्षेत्र में अनुभवी और शिक्षित लोग हैं, तो उन्हें स्थानीय स्तर पर कोचिंग या मार्गदर्शन की सुविधा शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके अलावा मेरी एक प्रमुख योजना डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था करना है। अगर जनता मुझे सरपंच बनने का अवसर देती है, तो युवाओं के लिए अच्छी लाइब्रेरी विकसित करने का प्रयास करूंगा। इससे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य पढ़ाई की तैयारी में मदद मिल सकती है।
सवाल 6: महिलाओं की सुरक्षा और गांवों में चोरी जैसी घटनाओं की रोकथाम को लेकर आपकी क्या योजना है?
दिनेश चौधरी: हमारे क्षेत्र में चोरी जैसी घटनाओं की कोई बड़ी समस्या मेरे सामने नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना जरूरी है। मेरी कोशिश होगी कि पंचायत के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं। इससे सार्वजनिक स्थानों की निगरानी में मदद मिल सकती है। मैं चाहता हूं कि पूरी पंचायत में जरूरत के अनुसार सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था विकसित हो। इसके लिए स्थानों की पहचान करके योजना तैयार की जाएगी।
सवाल 7: जैविक खेती और सरकारी योजनाओं को किसानों तक पहुंचाने के लिए क्या करेंगे?
दिनेश चौधरी: किसानों और ग्रामीणों के लिए सरकार की कई योजनाएं होती हैं। मेरी सोच है कि पंचायत में लोगों को इन योजनाओं की जानकारी मिलनी चाहिए। जैविक खेती और खेती से जुड़े नए तरीकों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित कृषि विभाग और अधिकारियों से संपर्क करके योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। मेरा मानना है कि पंचायत का प्रतिनिधि सक्रिय रहेगा, तो ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहायता मिल सकती है।
सवाल 8: पंचायत कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति की शिकायतें रहती हैं। इस व्यवस्था को कैसे सुधारेंगे?
दिनेश चौधरी: अगर मैं सरपंच बनता हूं, तो पंचायत के कर्मचारियों के कामकाज की जानकारी रखना मेरी जिम्मेदारी होगी। कौन कर्मचारी कब आ रहा है, कौन-सा काम लंबित है और ग्रामीणों को किस वजह से परेशानी हो रही है, इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर किसी कर्मचारी से संबंधित समस्या सामने आती है, तो पहले संबंधित स्तर पर समाधान का प्रयास करेंगे। जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों और सरकार तक भी मामला पहुंचाएंगे। मेरी प्राथमिकता होगी कि पंचायत में आने वाले लोगों के काम समय पर हों और उन्हें अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
सवाल 9: अगर जनता आपको सरपंच चुनती है, तो शुरुआती तीन महीनों का रोडमैप क्या रहेगा?
दिनेश चौधरी: मेरी पहली कोशिश होगी कि पंचायत के सभी गांवों में लोगों के साथ बैठक करूँ। बुजुर्गों से उनका अनुभव लूंगा और युवाओं से उनकी जरूरतों के बारे में बात करूंगा। उसके बाद विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करेंगे। सबसे पहले साफ-सफाई, सड़क, नालियों और पानी की निकासी जैसी समस्याओं पर ध्यान देना चाहूंगा। जहां स्ट्रीट लाइट और सोलर लाइट की जरूरत होगी, वहां उनकी व्यवस्था के लिए प्रयास करेंगे। मैं चाहता हूं कि हमारी पंचायत स्वच्छ और सुव्यवस्थित बने।
सवाल 10: आपने कहा कि विकास कार्य बार-बार नहीं होने चाहिए। इसका क्या मतलब है?
दिनेश चौधरी: मेरा मानना है कि विकास कार्यों की योजना पहले से तैयार होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी गांव में सड़क बनानी है, तो उससे पहले यह देखना चाहिए कि वहां पानी की पाइपलाइन डालनी है या नहीं और नालियों की व्यवस्था कैसी होगी। कई जगह ऐसा देखने को मिलता है कि पहले सड़क बना दी जाती है और बाद में पाइपलाइन डालने के लिए उसे खोद दिया जाता है। इससे दोबारा खर्च होता है और लोगों को परेशानी भी होती है। मेरी कोशिश होगी कि सड़क, पानी की पाइपलाइन और नालियों से जुड़े काम आपसी समन्वय के साथ किए जाएं। जहां संभव हो, सड़क बनाने से पहले भूमिगत पाइपलाइन और जल निकासी की जरूरतों का आकलन कर लिया जाए। इससे सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सकेगा और विकास कार्यों की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
सवाल 11: पंचायत के विकास में युवाओं और बुजुर्गों की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?
दिनेश चौधरी: मेरे लिए युवाओं की ऊर्जा और बुजुर्गों का अनुभव दोनों महत्वपूर्ण हैं। गांव के बुजुर्ग लंबे समय से यहां की समस्याएं देखते आए हैं। उन्हें पता है कि पहले कौन-से काम हुए और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। वहीं, युवा नई तकनीक और नई सोच के साथ पंचायत के विकास में योगदान दे सकते हैं। मेरी कोशिश होगी कि दोनों को साथ लेकर काम किया जाए। पंचायत के विकास से जुड़े फैसलों में लोगों की राय लेना जरूरी है।
सवाल 12: पांच साल बाद आप अपनी पंचायत को किस रूप में देखना चाहते हैं?
दिनेश चौधरी: मेरी इच्छा है कि कुम्हारिया बॉस एक स्वच्छ और व्यवस्थित ग्राम पंचायत के रूप में विकसित हो। सड़कों की स्थिति बेहतर हो, नालियों और पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं मिलें। मैं चाहता हूं कि जो भी विकास कार्य हों, वे अच्छी गुणवत्ता के हों और लंबे समय तक लोगों के काम आएं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आज सड़क बने और कुछ समय बाद दोबारा उसे तोड़ना पड़े। मेरा प्रयास रहेगा कि पंचायत में योजनाबद्ध तरीके से काम हो और आने वाले वर्षों में भी लोगों को उसका लाभ मिलता रहे।

