LAC पर चीन की गश्त को लेकर भारत का बड़ा बयान, विदेश मंत्रालय बोला- तय प्रक्रिया से हटने पर बिगड़ते हैं हालात
भारत-चीन LAC पर गश्त और सीमा प्रबंधन को लेकर विदेश मंत्रालय ने बयान दिया। जानिए ITBP के डीजी के बयान, सीमा पर शांति की प्राथमिकता और ईरान को दवाओं की आपूर्ति पर क्या कहा गया।
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव और गश्त के तौर-तरीकों को लेकर विदेश मंत्रालय ने अहम बयान दिया है। ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने संबंधी बयान के बाद मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर हालात तब बिगड़ते हैं, जब चीन की सेना तय गश्त प्रक्रिया से हटकर गतिविधियां करती है। भारत ने साफ किया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद जरूरी है।
गश्त की प्रक्रिया से हटने पर बिगड़ते हैं हालात: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और चीन सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर स्थापित व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का उद्देश्य किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन से बचना है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कुछ विशेष क्षेत्रों में LAC को लेकर आपसी समझ मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा करने की सहमति बनी है।
मंत्रालय के बयान में सीमा पर शांति और स्थिरता को भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। ऐसे में गश्त के दौरान तय प्रक्रियाओं का पालन और संवाद बनाए रखना अहम माना जा रहा है।
ITBP के डीजी ने सैनिकों के आमने-सामने आने की बात कही थी
यह प्रतिक्रिया ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ समय में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई बार भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आए और टकराव जैसी स्थितियां बनीं।
उन्होंने इन परिस्थितियों में ITBP के जवानों के प्रदर्शन और शौर्य की सराहना की थी। उनके बयान के बाद सीमा पर चीन के साथ भारत के संबंधों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक चर्चा भी तेज हुई।
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सीमा विवादों को सुलझाने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र के जरिए बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।
LAC पर क्या है भारत की प्राथमिकता?
भारत की प्राथमिकता सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ लंबित मुद्दों का समाधान करना है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देश गलतफहमी और गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं के तहत संपर्क बनाए हुए हैं।
कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में LAC को लेकर आपसी समझ बेहतर करने पर चर्चा भी इसी दिशा में एक कदम है। सीमा पर स्थिरता का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों से भी जुड़ा है।
ईरान को जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति पर भी बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान को जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति से जुड़े सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत इस मानवीय सहायता को जारी रखने के लिए प्रयासरत है।
क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण भारत और ईरान के बीच विमान सेवाओं तथा कनेक्टिविटी को लेकर चुनौतियां पैदा हुई हैं। मंत्रालय के अनुसार, जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति सुगम बनाने के लिए भारत ईरान के अधिकारियों के संपर्क में है।
इस तरह विदेश मंत्रालय के बयान में एक ओर LAC पर सीमा प्रबंधन और शांति बनाए रखने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय संघर्ष के बीच मानवीय सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता भी सामने आई।

