करौली में पांचना बांध के पानी पर बढ़ा विवाद, गुर्जर समाज ने सरकार को 24 घंटे का दिया अल्टीमेटम, इंटरनेट बंद
करौली में पांचना बांध से जल निकासी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया और सड़क दोनों पर गहरा गया है। गुड़ला गांव में हुई गुर्जर समाज की महापंचायत में जिला प्रशासन और राज्य सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई कि यदि सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और जिले में लगे जाम नहीं हटाए गए तो पूरे राजस्थान में चक्का जाम किया जाएगा। हालात को देखते हुए प्रशासन ने करौली में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और पुलिस ने विभिन्न थानों में मामले दर्ज किए हैं।
करौली में पांचना बांध के पानी को लेकर विवाद गहराया
राजस्थान के करौली जिले में पांचना बांध से जल निकासी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। मामला सड़क से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। गुड़ला गांव में आयोजित गुर्जर समाज की महापंचायत में समाज के पंच-पटेलों और नेताओं ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
पंचायत में निर्णय लिया गया कि यदि जिले में लगे जाम नहीं हटाए गए और सोशल मीडिया पर अभद्र व भड़काऊ टिप्पणियां करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे राजस्थान में चक्का जाम किया जाएगा।

प्रशासन ने बंद किया इंटरनेट, दर्ज हुए मुकदमे
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने करौली जिले में रात करीब 12 बजे से इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। वहीं सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट और टिप्पणियां करने के आरोप में दोनों पक्षों से जुड़े लोगों के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
कुछ मार्ग खुले, लेकिन जनजीवन अब भी प्रभावित
धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने करौली-गंगापुर, करौली-कैलादेवी, करौली-मंडरायल और करौली-धौलपुर मार्ग को खोल दिया है। हालांकि गुड़ला क्षेत्र में केवल आपातकालीन सेवाओं को ही अनुमति दी गई है।
शादी-विवाह, रोडवेज बस संचालन, सरकारी और निजी कर्मचारियों की आवाजाही सहित सामान्य जनजीवन अब भी प्रभावित है। जिले के कई हिस्सों में आवागमन बाधित बना हुआ है।

पंचायत में क्या हुआ फैसला?
महापंचायत में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैसला, गुड़ला पांचना संघर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाबाई, हाकिम बैसला सहित समाज के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पंचायत में समाज की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया पर जातीय वैमनस्य फैलाने की कोशिश की जा रही है। समिति के अध्यक्ष अशोक सिंह धाबाई ने आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए समाजों के बीच विभाजन पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए एक मंत्री पर भी निशाना साधा।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
6 जुलाई को राजस्थान सरकार के दो मंत्रियों की मौजूदगी में पांचना बांध से 13 गांव कमांड क्षेत्र, 39 गांव गुड़ला क्षेत्र और गंभीर नदी बहाव क्षेत्र के 360 गांवों के किसानों के लिए पानी छोड़ा गया था। इसी दौरान करीब 61 करोड़ रुपये की लागत वाली पीडीएन आधारित नई लिफ्ट परियोजनाओं और गुड़ला लिफ्ट परियोजना की रीमॉडलिंग का शिलान्यास भी किया गया।
लेकिन तकनीकी खराबी के कारण कमांड क्षेत्र की नहरों में समय पर पानी नहीं पहुंच पाया। इसके विरोध में सबसे पहले कुसाय क्षेत्र में किसानों ने जाम लगा दिया। बाद में तकनीकी टीम ने नहरों की मरम्मत कर टेस्टिंग के लिए पानी छोड़ा, जो 7 जुलाई को कुसाय तक पहुंच गया। हालांकि परीक्षण पूरा होने के बाद पानी बंद कर दिया गया, जिसके बाद भी आंदोलन जारी रहा।
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने की शांति बनाए रखने की अपील
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने प्रदर्शनकारियों से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन हिंसा या कानून व्यवस्था बिगाड़ने से किसी का हित नहीं होगा। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
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