पायलट की बढ़ती सक्रियता के बीच गहलोत पहुंचे 10 जनपथ, सामने आयी सोनिया- गहलोत की मीटिंग की वजह
करीब साढ़े तीन साल बाद अशोक गहलोत ने 10 जनपथ पहुंचकर सोनिया गांधी से मुलाकात की। बैठक के आधिकारिक कारणों के बीच राजस्थान कांग्रेस की सियासत में नए समीकरणों और सचिन पायलट की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। करीब साढ़े तीन साल बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 10 जनपथ पहुंचकर सोनिया गांधी से मुलाकात की। आधिकारिक तौर पर यह बैठक गांधी परिवार से जुड़े ट्रस्टों और एफसीआरए से जुड़े मामलों पर रणनीति बनाने के लिए बताई जा रही है, लेकिन राजस्थान की राजनीति में इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
दिल्ली में हुई इस बैठक में अशोक गहलोत के अलावा मुकुल वासनिक, पवन बंसल, जनार्दन द्विवेदी और सलमान खुर्शीद जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि गांधी परिवार के ट्रस्टों से जुड़े कानूनी और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा के लिए पुराने भरोसेमंद नेताओं को बुलाया गया था।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा सिर्फ बैठक की नहीं, बल्कि अशोक गहलोत की ‘टाइमिंग’ की भी है। पिछले कुछ समय से राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट की बढ़ती सक्रियता और उनके बढ़ते राजनीतिक कद को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में गहलोत का लंबे अंतराल के बाद सीधे 10 जनपथ पहुंचना कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब-जब राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन या शक्ति संतुलन की चर्चाएं तेज होती हैं, तब गहलोत भी राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ अपनी सक्रियता बढ़ाते नजर आते हैं। हालांकि, इसे लेकर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

इस मुलाकात की एक और वजह हाल ही में अशोक गहलोत का वह बयान भी माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने 2022 के कांग्रेस अध्यक्ष पद के विवाद को लेकर कहा था कि अगर सोनिया गांधी उन्हें अध्यक्ष बनाना चाहती थीं तो वह मना क्यों करते। उन्होंने उस पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ एक “साजिश” बताया था।
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के दौरान राजस्थान में हुए सियासी संकट ने पार्टी की रणनीति बदल दी थी। उस समय विधायकों के बागी रुख के बाद गहलोत अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए थे। बाद में उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात कर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए माफी भी मांगी थी।
अब करीब साढ़े तीन साल बाद हुई यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक है या फिर राजस्थान कांग्रेस की नई राजनीतिक बिसात की शुरुआत, इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है। फिलहाल इतना तय है कि 10 जनपथ में गहलोत की मौजूदगी ने प्रदेश कांग्रेस की सियासत को फिर से गर्मा दिया है।

