पीपलू के वार्ड-4 में निर्दलीय दशरथ राजावत ने बढ़ाई BJP की टेंशन, ग्रामीण बोले- पार्टी नहीं, काम करने वाले को देंगे वोट

पीपलू नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 में भाजपा के पूर्व जिला प्रवक्ता दशरथ सिंह राजावत निर्दलीय मैदान में हैं। पेयजल, सड़क और स्थानीय मुद्दे चुनाव में अहम बने हुए हैं।

पीपलू के वार्ड-4 में निर्दलीय दशरथ राजावत ने बढ़ाई BJP की टेंशन, ग्रामीण बोले- पार्टी नहीं, काम करने वाले को देंगे वोट

पीपलू नगरपालिका का पहला चुनाव स्थानीय राजनीति के कई पुराने समीकरण बदलता दिखाई दे रहा है। सबसे दिलचस्प तस्वीर वार्ड नंबर 4 से सामने आ रही है, जहां भाजपा के जिला प्रवक्ता रहे दशरथ सिंह राजावत अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। ग्राउंड पर बातचीत के दौरान कई स्थानीय लोगों ने राजावत के पक्ष में अपनी राय जाहिर की। कुछ मतदाताओं का कहना था कि चुनाव में पार्टी से ज्यादा उस व्यक्ति को महत्व मिलना चाहिए, जिसने वर्षों तक क्षेत्र और संगठन के लिए काम किया हो। लोगों ने यहां तक दावा किया कि राजावत वार्ड में मजबूत स्थिति में हैं। हालांकि इसका अंतिम फैसला मतदान और चुनाव परिणाम ही करेंगे।

पानी बना वार्ड का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा 

वार्ड नंबर 4 की चुनावी लड़ाई केवल टिकट और राजनीतिक बगावत तक सीमित नहीं है। यहां लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल पेयजल का है। स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र में खारे और फ्लोराइडयुक्त पानी की समस्या है। बीसलपुर में पानी की उपलब्धता पर्याप्त नहीं होने और कम दबाव से सप्लाई आने की शिकायत भी सामने आई। ग्रामीण चाहते हैं कि घर-घर पर्याप्त और साफ पेयजल पहुंचाने को नए पार्षद की पहली प्राथमिकता बनाया जाए। इसके अलावा खराब सड़कें, बंद या खराब रोड लाइट, पर्याप्त नल कनेक्शन और दूसरी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी।

श्मशान तक रास्ता नहीं, स्कूल के ऊपर बिजली लाइन पर भी चिंता

ग्रामीणों ने श्मशान घाट की स्थिति को भी बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना है कि वहां पहुंचने के लिए उचित रास्ता, टिन शेड और पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। स्थानीय लोगों ने बारिश के दौरान अंतिम संस्कार में होने वाली परेशानी का भी जिक्र किया। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय परिसर से गुजर रही थ्री-फेज बिजली लाइन को लेकर ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा पर चिंता जताई और इसे हटाने या सुरक्षित करने की मांग की।

राजावत बोले- सबसे पहले पानी पर करूंगा काम

निर्दलीय प्रत्याशी दशरथ सिंह राजावत ने कहा कि जनता ने उन्हें अवसर दिया तो उनकी प्राथमिकता वार्ड की बुनियादी समस्याओं का समाधान होगी। उन्होंने पेयजल को पहली प्राथमिकता बताते हुए सड़क, सामुदायिक भवन और प्रदोष नगर, अलीमपुरा तथा नया गांव से जुड़ी स्थानीय समस्याओं पर काम करने की बात कही। राजावत ने नगरपालिका में बुजुर्गों, महिलाओं और आम लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए अधिक पारदर्शी व्यवस्था बनाने का भी वादा किया।

भाजपा से अलग होकर निर्दलीय क्यों उतरे राजावत?

यही इस चुनाव की सबसे बड़ी राजनीतिक कहानी है। राजावत भाजपा के जिला प्रवक्ता रहे हैं, लेकिन टिकट वितरण से नाराज होकर निर्दलीय मैदान में उतर गए। राजावत का कहना है कि टिकट वितरण के दौरान उनकी बात को नजरअंदाज किया गया। इसके बाद वार्ड के लोगों के समर्थन पर उन्होंने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय से जमीन पर काम करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी किसी भी संगठन के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

विधायक रामसहाय वर्मा को लेकर भी लगे आरोप

स्थानीय राजनीतिक खींचतान के बीच विधायक रामसहाय वर्मा को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। राजावत समर्थक पक्ष का दावा है कि टिकट वितरण में स्थानीय समीकरणों और विधायक पक्ष की भूमिका को लेकर नाराजगी थी। कुछ लोगों ने विधायक के बेटे अंकित वर्मा के नाम को लेकर भी सवाल उठाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विधायक अथवा उनके पक्ष का जवाब उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

निर्दलीय बिगाड़ेंगे भाजपा-कांग्रेस का गणित?

ग्राउंड पर सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कुछ मतदाता खुलकर भाजपा के समर्थन में दिखाई दिए, लेकिन वहीं कई लोगों का कहना था कि यदि पार्टी किसी पुराने और काम करने वाले कार्यकर्ता को दरकिनार करती है तो जनता निर्दलीय प्रत्याशी के साथ भी जा सकती है। यानी वार्ड नंबर 4 में मुकाबला केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रह गया है। दशरथ सिंह राजावत की निर्दलीय दावेदारी ने यहां तीसरा कोण तैयार कर दिया है। अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि राजावत के समर्थन में दिखाई दे रही स्थानीय नाराजगी वोट में बदलती है या पार्टी का परंपरागत वोट आखिरकार भाजपा के साथ जाता है। एक बात साफ है। पीपलू के इस चुनाव में टिकट से ज्यादा पानी, सड़क, स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के सम्मान की चर्चा हो रही है। और वार्ड नंबर 4 इस पूरी सियासी कहानी का सबसे दिलचस्प मैदान बनता दिखाई दे रहा है।