राजस्थान में किशोर गर्भावस्था बढ़ी, NFHS-6 रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
NFHS-6 रिपोर्ट में राजस्थान में किशोर गर्भावस्था दर 4.7% तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में बाल विवाह, कुपोषण, स्तनपान में कमी और सरकारी अस्पतालों में प्रसव घटने जैसे चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। 50 से अधिक संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
राजस्थान में कम उम्र में शादी और किशोर गर्भावस्था की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप से सामने आई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 15 से 19 वर्ष की लड़कियों में गर्भावस्था दर बढ़कर 4.7 प्रतिशत हो गई है, जो पिछले सर्वे (NFHS-5) में 3.7 प्रतिशत थी। यह देश में सबसे अधिक किशोर गर्भावस्था दरों में से एक मानी जा रही है।
रिपोर्ट में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई चिंताजनक संकेत भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर गर्भावस्था का संबंध केवल स्वास्थ्य से नहीं बल्कि बाल विवाह, शिक्षा और जागरूकता की कमी से भी जुड़ा हुआ है।
गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग घटा
रिपोर्ट के अनुसार आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 62.1 से घटकर 57.1 रह गया है। हालांकि कुल गर्भनिरोधक उपयोग 72.3 प्रतिशत से बढ़कर 74.4 प्रतिशत हुआ है, लेकिन इसकी मुख्य वजह पारंपरिक तरीकों का बढ़ता इस्तेमाल है, जो 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 17.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सरकारी अस्पतालों में प्रसव कम हुए
राज्य में संस्थागत प्रसव यानी अस्पतालों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 94.9 से घटकर 94.1 हो गया है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव की संख्या में अधिक गिरावट दर्ज की गई है, जो 77 प्रतिशत से घटकर 70.5 प्रतिशत रह गई। वहीं सीजेरियन डिलीवरी की दर 10.4 प्रतिशत से बढ़कर 15.6 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
बच्चों के पोषण पर भी खतरा
NFHS-6 रिपोर्ट में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई गई है। छह माह से कम उम्र के शिशुओं में केवल स्तनपान कराने की दर 70.4 प्रतिशत से घटकर 54.3 प्रतिशत हो गई है।
इसके अलावा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण की स्थिति भी खराब हुई है। अंडरवेट बच्चों का प्रतिशत 27.6 से बढ़कर 33.3 हो गया है, जबकि वेस्टिंग (लंबाई के हिसाब से कम वजन) की दर 16.8 प्रतिशत से बढ़कर 19.8 प्रतिशत पहुंच गई है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
रिपोर्ट सामने आने के बाद 50 से अधिक सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि किशोर गर्भावस्था, बाल विवाह, कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट जैसे मुद्दों पर विशेष अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि आने वाले वर्षों में स्थिति में सुधार लाया जा सके।
Saloni Kushwaha 
